डूसू चुनाव नतीजों पर पप्पू यादव: 'कांग्रेस को कांग्रेसी ही खत्म करते हैं, बाहर से कोई नहीं'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने 20 सितंबर 2026 को दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (डूसू) चुनाव के नतीजों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस की विचारधारा विश्व कल्याण और मानवता की है और इसे बाहर से कोई समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने पार्टी के भीतर की कमज़ोरियों को रेखांकित करते हुए साफ़ कहा कि नुकसान हमेशा अंदर से होता है।
डूसू नतीजों पर पप्पू यादव की प्रतिक्रिया
पप्पू यादव ने कहा, 'कोई एनएसयूआई का क्लीन स्वीप नहीं हुआ। जब तक हम सब हैं, कांग्रेस को कोई डुबा नहीं सकता। कांग्रेस को कोई मार नहीं सकता। कांग्रेस की विचारधारा विश्व कल्याण और मानवता की विचारधारा है।' उन्होंने कहा कि पार्टी का असली दुश्मन बाहर नहीं, बल्कि निजी स्वार्थ और अहंकार में काम करने वाले कांग्रेसी ही हैं।
राहुल गांधी के संघर्ष की अनदेखी पर नाराज़गी
यादव ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस नेता राहुल गांधी की छवि और उनके संघर्ष को देखकर काम नहीं करते। उन्होंने कहा, 'हम लोग राहुल गांधी के इमेज के बारे में, उनके जो संघर्ष है उसको देखकर काम नहीं करते। अपने निजी स्वार्थ को देख के, अपने निजी ईगो को देख के काम करते हैं।' उनके अनुसार यही रवैया पार्टी की चुनावी पराजय की असली वजह बनता है।
आदिवासी उम्मीदवारों को मौका देने की सराहना
यादव ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने डूसू चुनाव में आदिवासी समाज के बच्चों को प्रतिनिधित्व देने का साहस दिखाया, जो उनके अनुसार छोटी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने दावा किया कि गिनती के दौरान एनएसयूआई उम्मीदवार 14 से 15 राउंड तक आगे चल रहे थे और अंत में मात्र हजार से डेढ़ हजार वोटों के अंतर से परिणाम पलट गया।
इंडिपेंडेंट पैनल और हार की व्याख्या
यादव के अनुसार जो इंडिपेंडेंट पैनल डूसू में जीता, वह भी मूलतः कांग्रेसी विचारधारा के समर्थक हैं, और जो 100 वोट से हारे वे भी कांग्रेस से जुड़े हैं। उन्होंने राहुल गांधी के छात्र-हितैषी रुख का उल्लेख करते हुए कहा कि वे लगातार कैंपस के मुद्दे उठाते रहे हैं और कैंपस में हुई छात्रों की मौतों पर भी उनकी आवाज़ बुलंद रही है।
आगे की चुनौती
यादव की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) छात्र राजनीति में अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। गौरतलब है कि डूसू चुनाव परंपरागत रूप से राष्ट्रीय छात्र संगठनों की ताकत का एक अहम पैमाना माना जाता है। यादव की खुली आत्मालोचना पार्टी के भीतर असंतोष और जवाबदेही की माँग को उजागर करती है, और आने वाले समय में एनएसयूआई के पुनर्गठन की ज़रूरत की ओर इशारा करती है।