20 सितंबर 2026
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डूसू चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेता उदित राज का एनएसयूआई पर तीखा हमला, बोले- 'हाईकमान को ध्यान देना होगा'

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डूसू चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेता उदित राज का एनएसयूआई पर तीखा हमला, बोले- 'हाईकमान को ध्यान देना होगा'

सारांश

डूसू में एनएसयूआई की हार के बाद कांग्रेस नेता उदित राज ने खुद अपनी पार्टी की छात्र इकाई को कठघरे में खड़ा किया — पदाधिकारियों पर जनसंपर्क न करने का आरोप, टिकट बंटवारे में कमियाँ, और हाईकमान से समीक्षा की माँग। यह आत्म-आलोचना डूसू में कांग्रेस की गहरी संगठनात्मक चुनौती को उजागर करती है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता उदित राज ने 20 सितंबर 2026 को डूसू चुनाव में एनएसयूआई की हार के बाद संगठन की समीक्षा की माँग की।
उन्होंने आरोप लगाया कि एनएसयूआई पदाधिकारी जनता से नहीं मिलते और फोन कॉल का जवाब नहीं देते।
उदित राज ने ईवीएम और धन-बल के प्रयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'चुनाव मैनेजमेंट और सिस्टम से जीता जाता है।' जेन-जी आंदोलन को उन्होंने बहु-संगठन गठबंधन बताया, किसी एक पार्टी की उपलब्धि नहीं।
एबीवीपी की जीत को उन्होंने RSS-BJP की संगठनात्मक मज़बूती का नतीजा करार दिया।

कांग्रेस नेता उदित राज ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की हार के बाद संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 20 सितंबर 2026 को उन्होंने साफ कहा कि एनएसयूआई में बड़े बदलावों की ज़रूरत है और इस हार की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए।

एनएसयूआई के पदाधिकारियों पर क्या आरोप लगाए

उदित राज ने कहा, 'जो लोग ऊंचे पदों पर हैं, वे लोगों से मिलते नहीं, फोन कॉल का जवाब नहीं देते और लोगों से बातचीत नहीं करते।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें इस संबंध में कई बार शिकायतें मिली हैं और पार्टी हाईकमान को इस मसले पर गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है।

टिकट वितरण में कमियों को लेकर उन्होंने कहा, 'इसकी समीक्षा होनी चाहिए। कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब डूसू चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एनएसयूआई को करारी शिकस्त दी है।

सीजेपी और जेन-जी आंदोलन पर क्या बोले

उदित राज से जब पूछा गया कि क्या जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन का श्रेय सीजेपी की ओर से लेना डूसू हार का कारण था, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया, 'अगर उन्होंने जनता के गुस्से का श्रेय लिया होता, तो वे चुनाव लड़ते और जीतते। उन्होंने चुनाव क्यों नहीं लड़ा?'

उन्होंने जेन-जी आंदोलन के संदर्भ में स्पष्ट किया कि उस प्रदर्शन में 95 प्रतिशत प्रतिभागी आम जन-भावना से प्रेरित होकर सड़कों पर निकले थे। उनके अनुसार वह आंदोलन कई पार्टियों और संगठनों का सम्मिलित प्रयास था, जिसका नेतृत्व अकेले किसी एक संस्था ने नहीं किया था।

चुनाव परिणामों पर उठाए सवाल

उदित राज ने डूसू के चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि 'धन-बल और ईवीएम का प्रयोग भारी पैमाने पर हुआ है। चुनाव मैनेजमेंट और सिस्टम के ज़रिए जीता जाता है।'

गौरतलब है कि ईवीएम पर इस तरह के आरोप पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जाते रहे हैं, हालाँकि चुनाव आयोग इन दावों को खारिज करता रहा है।

एबीवीपी की जीत पर कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया

उदित राज ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक मज़बूती को स्वीकार करते हुए कहा, 'भाजपा और आरएसएस अक्षुण्ण चुनाव लड़ते हैं, इसलिए उनकी शक्ति कहीं अधिक संगठित है। भले जन-समर्थन उनके साथ न रहे, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में आते हैं।'

उन्होंने यह भी कहा कि जब युवा पीढ़ी भाजपा से इतनी नाराज़ है, तो यह सोचने वाली बात है कि एबीवीपी जीती कैसे। इस टिप्पणी को कांग्रेस के भीतर आत्ममंथन की ज़रूरत का संकेत माना जा रहा है।

आगे क्या

उदित राज के इन बयानों के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर एनएसयूआई की संरचनात्मक खामियों को दूर करने का दबाव बढ़ने की संभावना है। डूसू चुनावों में लगातार हार का यह सिलसिला पार्टी के छात्र आधार को मज़बूत करने की बड़ी चुनौती को रेखांकित करता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी हाईकमान इस बार ठोस संगठनात्मक बदलाव करता है या मामला महज़ बयानबाज़ी तक सीमित रहता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या पार्टी अपनी आंतरिक विफलताओं पर उतनी ही बेबाकी से विचार करेगी जितनी बेबाकी उदित राज ने आज दिखाई। हाईकमान की चुप्पी इस चुनौती को और गंभीर बनाती है।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डूसू चुनाव 2026 में एनएसयूआई की हार क्यों हुई?
कांग्रेस नेता उदित राज के अनुसार एनएसयूआई की हार की वजह पदाधिकारियों का जनसंपर्क से कटाव, टिकट बंटवारे में कमियाँ और संगठनात्मक कमज़ोरियाँ हैं। उन्होंने हाईकमान से इस पर विस्तृत समीक्षा की माँग की है।
उदित राज ने एनएसयूआई के पदाधिकारियों पर क्या आरोप लगाए?
उदित राज ने कहा कि ऊँचे पदों पर बैठे एनएसयूआई के नेता आम लोगों और कार्यकर्ताओं से नहीं मिलते, फोन कॉल का जवाब नहीं देते और जमीनी स्तर पर बातचीत नहीं करते। उन्होंने बताया कि उन्हें इस बारे में कई बार शिकायतें मिल चुकी हैं।
उदित राज ने डूसू के चुनाव परिणामों पर क्या सवाल उठाए?
उदित राज ने आरोप लगाया कि डूसू चुनाव में धन-बल और ईवीएम का भारी पैमाने पर प्रयोग हुआ। उनके अनुसार चुनाव मैनेजमेंट और सिस्टम के ज़रिए जीत हासिल की गई, जो जन-समर्थन का वास्तविक प्रतिबिंब नहीं है।
जेन-जी आंदोलन और सीजेपी के बारे में उदित राज ने क्या कहा?
उदित राज ने स्पष्ट किया कि जेन-जी आंदोलन में 95 प्रतिशत लोग आम भावना से प्रेरित होकर निकले थे और यह किसी एक संगठन की उपलब्धि नहीं थी। उन्होंने सीजेपी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर उन्होंने सच में आंदोलन का नेतृत्व किया, तो चुनाव क्यों नहीं लड़े।
एबीवीपी की डूसू जीत को उदित राज ने कैसे देखा?
उदित राज ने माना कि भाजपा और आरएसएस की संगठनात्मक शक्ति कहीं अधिक व्यवस्थित है, इसीलिए एबीवीपी जीतती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब युवा पीढ़ी भाजपा से नाराज़ है, तब भी एबीवीपी की जीत एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
राष्ट्र प्रेस
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