डूसू चुनाव में हार के बाद कांग्रेस नेता उदित राज का एनएसयूआई पर तीखा हमला, बोले- 'हाईकमान को ध्यान देना होगा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस नेता उदित राज ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव में कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की हार के बाद संगठन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 20 सितंबर 2026 को उन्होंने साफ कहा कि एनएसयूआई में बड़े बदलावों की ज़रूरत है और इस हार की विस्तृत समीक्षा होनी चाहिए।
एनएसयूआई के पदाधिकारियों पर क्या आरोप लगाए
उदित राज ने कहा, 'जो लोग ऊंचे पदों पर हैं, वे लोगों से मिलते नहीं, फोन कॉल का जवाब नहीं देते और लोगों से बातचीत नहीं करते।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें इस संबंध में कई बार शिकायतें मिली हैं और पार्टी हाईकमान को इस मसले पर गंभीरता से ध्यान देने की ज़रूरत है।
टिकट वितरण में कमियों को लेकर उन्होंने कहा, 'इसकी समीक्षा होनी चाहिए। कहीं न कहीं कोई कमी जरूर है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब डूसू चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने एनएसयूआई को करारी शिकस्त दी है।
सीजेपी और जेन-जी आंदोलन पर क्या बोले
उदित राज से जब पूछा गया कि क्या जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन का श्रेय सीजेपी की ओर से लेना डूसू हार का कारण था, तो उन्होंने पलटकर सवाल किया, 'अगर उन्होंने जनता के गुस्से का श्रेय लिया होता, तो वे चुनाव लड़ते और जीतते। उन्होंने चुनाव क्यों नहीं लड़ा?'
उन्होंने जेन-जी आंदोलन के संदर्भ में स्पष्ट किया कि उस प्रदर्शन में 95 प्रतिशत प्रतिभागी आम जन-भावना से प्रेरित होकर सड़कों पर निकले थे। उनके अनुसार वह आंदोलन कई पार्टियों और संगठनों का सम्मिलित प्रयास था, जिसका नेतृत्व अकेले किसी एक संस्था ने नहीं किया था।
चुनाव परिणामों पर उठाए सवाल
उदित राज ने डूसू के चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि 'धन-बल और ईवीएम का प्रयोग भारी पैमाने पर हुआ है। चुनाव मैनेजमेंट और सिस्टम के ज़रिए जीता जाता है।'
गौरतलब है कि ईवीएम पर इस तरह के आरोप पहले भी विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा लगाए जाते रहे हैं, हालाँकि चुनाव आयोग इन दावों को खारिज करता रहा है।
एबीवीपी की जीत पर कांग्रेस नेता की प्रतिक्रिया
उदित राज ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की संगठनात्मक मज़बूती को स्वीकार करते हुए कहा, 'भाजपा और आरएसएस अक्षुण्ण चुनाव लड़ते हैं, इसलिए उनकी शक्ति कहीं अधिक संगठित है। भले जन-समर्थन उनके साथ न रहे, लेकिन परिणाम उनके पक्ष में आते हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि जब युवा पीढ़ी भाजपा से इतनी नाराज़ है, तो यह सोचने वाली बात है कि एबीवीपी जीती कैसे। इस टिप्पणी को कांग्रेस के भीतर आत्ममंथन की ज़रूरत का संकेत माना जा रहा है।
आगे क्या
उदित राज के इन बयानों के बाद कांग्रेस नेतृत्व पर एनएसयूआई की संरचनात्मक खामियों को दूर करने का दबाव बढ़ने की संभावना है। डूसू चुनावों में लगातार हार का यह सिलसिला पार्टी के छात्र आधार को मज़बूत करने की बड़ी चुनौती को रेखांकित करता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पार्टी हाईकमान इस बार ठोस संगठनात्मक बदलाव करता है या मामला महज़ बयानबाज़ी तक सीमित रहता है।