डूसू चुनाव में NSUI की हार पर कांग्रेस सांसद औजला बोले — 'लोकतंत्र में हार-जीत चलती रहती है'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औजला ने 20 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनावी हार-जीत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है। अमृतसर से कांग्रेस के सांसद औजला ने कांग्रेस की छात्र इकाई राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) के निराशाजनक प्रदर्शन को लेकर संयम और परिपक्वता के साथ अपना पक्ष रखा।
डूसू नतीजों पर औजला की प्रतिक्रिया
डूसू चुनाव में NSUI को मिले झटके पर पूछे गए सवाल के जवाब में सांसद औजला ने कहा कि छात्र और मतदाता अपनी समझ से अपना निर्णय लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'लोकतंत्र में जनता या मतदाताओं का जो भी फैसला होता है, उसे पूरी विनम्रता से स्वीकार करना चाहिए।' औजला ने कहा कि एक लोकतांत्रिक संगठन के रूप में चुनावी परिणाम चाहे पक्ष में हों या विपक्ष में, जनादेश का सम्मान हमेशा किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि NSUI आगे भी छात्रों के मुद्दों को लेकर अपना काम जारी रखेगी और संगठन का ध्यान परिणामों से हटकर छात्रहित पर केंद्रित रहेगा। गौरतलब है कि डूसू चुनाव में NSUI का प्रदर्शन अपेक्षा से कमज़ोर रहा, जिसे लेकर पार्टी के भीतर और बाहर दोनों तरफ से सवाल उठे।
पंजाब की कानून-व्यवस्था पर तीखा हमला
डूसू नतीजों के अलावा सांसद औजला ने पंजाब की बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हो रहे हमलों तथा ग्रेनेड घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है।
औजला ने आरोप लगाया कि 'कमज़ोर नेतृत्व और प्रशासनिक विफलता के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।' राज्य में हाल की एनकाउंटर घटनाओं पर वे बोले कि पुलिस को अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से निभानी चाहिए और कानून का उल्लंघन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए — उन्हें कानून के तहत सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए।
विश्व शांति दिवस पर संदेश
इसी बातचीत में विश्व शांति दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित शांति यात्रा के संदर्भ में औजला ने कहा कि आज के दौर में शांति और सद्भाव बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि चाहे वैश्विक स्तर पर चल रहे तनाव की बात हो या समाज के भीतर की, हर व्यक्ति को अपने भीतर शांति लानी होगी और सामूहिक प्रयासों से सौहार्द स्थापित करना होगा।
आगे क्या
NSUI के लिए डूसू का यह नतीजा एक संकेत है कि दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर में छात्र राजनीति की ज़मीन पर नए सिरे से काम करने की ज़रूरत है। औजला के बयान से यह स्पष्ट है कि कांग्रेस इस हार को खुलेआम स्वीकार कर संगठनात्मक पुनर्निर्माण की ओर ध्यान देना चाहती है। पंजाब में कानून-व्यवस्था का मुद्दा राज्य विधानसभा और राष्ट्रीय राजनीति दोनों स्तरों पर आगे भी गूंजता रहेगा।