डूसू चुनाव 2026: एबीवीपी ने 3 सीटें जीतीं, अध्यक्ष-सचिव-सह-सचिव पद पर कब्ज़ा
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 19 सितंबर 2026 को घोषित दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव परिणामों में तीन सीटों पर निर्णायक जीत दर्ज की — अध्यक्ष, सचिव और सह-सचिव के पद एबीवीपी के खाते में गए। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) को इस बार एक भी सीट नहीं मिली, जो उसके डूसू के इतिहास के सबसे कमज़ोर प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है।
मुख्य चुनाव परिणाम
एबीवीपी के प्रवक्ताओं ने इस जीत को '3-0' का स्वीप बताया। नॉर्थ कैंपस, जिसमें श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी), हिंदू कॉलेज, हंसराज कॉलेज, किरोड़ीमल कॉलेज, रामजस कॉलेज और लॉ फैकल्टी जैसे प्रतिष्ठित संस्थान शामिल हैं, वहाँ एबीवीपी का प्रदर्शन विशेष रूप से मज़बूत रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय को देश की विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले 'मिनी-इंडिया' के रूप में देखा जाता है, इसलिए यहाँ के चुनाव परिणाम राष्ट्रीय छात्र राजनीति के लिए भी संकेतक माने जाते हैं।
एबीवीपी की प्रतिक्रिया
एबीवीपी ने इस जीत को 'राष्ट्रविरोधी ताकतों पर देशभक्ति की विजय' करार दिया है। संगठन का कहना है कि यह परिणाम स्पष्ट करता है कि आज का युवा वर्ग विकास और राष्ट्रवाद की सोच से जुड़ा है। एबीवीपी के अनुसार, एनएसयूआई ने युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश की, लेकिन मतदाताओं ने इसे अस्वीकार कर दिया।
भाजपा नेताओं की टिप्पणी
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता वीरेंद्र सचदेवा ने इस जीत पर कहा, 'एबीवीपी ने तीन सीटों पर स्पष्ट रूप से जीत हासिल की है। यह दिखाता है कि आज का युवा क्या सोचता है — युवा भ्रमित नहीं है, युवा जानता है कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत सुरक्षित है।' उन्होंने आगे कहा कि युवा 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ खड़ा है और राहुल गांधी की तथाकथित 'झूठ की गूंज' डीयू में नहीं सुनाई दी।
एनएसयूआई की स्थिति और ऐतिहासिक संदर्भ
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई), जो कांग्रेस का छात्र संगठन है और जिसका एक समय डूसू पर लंबे समय तक दबदबा रहा, इस बार शून्य सीटों पर सिमट गया। यह ऐसे समय में आया है जब छात्र संघ चुनावों को राष्ट्रीय राजनीतिक दलों की युवा अपील के बैरोमीटर के रूप में देखा जाता है। गौरतलब है कि डूसू के नतीजे हर वर्ष छात्र राजनीति की दिशा को लेकर व्यापक बहस छेड़ते हैं।
आगे क्या होगा
नवनिर्वाचित एबीवीपी पदाधिकारी जल्द ही पदभार ग्रहण करेंगे। छात्र राजनीति के जानकारों के अनुसार, डूसू जीत से एबीवीपी का दिल्ली विश्वविद्यालय परिसरों में संगठनात्मक आधार और मज़बूत होगा। एनएसयूआई के लिए यह परिणाम अपनी रणनीति और युवाओं से जुड़ाव पर पुनर्विचार करने का संकेत है।