डीयूएसयू चुनाव 2026: मतदान जारी, एबीवीपी ने 4-0 क्लीन स्वीप का दावा किया
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डीयूएसयू) 2026 के चुनावों के लिए 18 सितंबर 2026 को मतदान जारी रहा, जहाँ छात्र निर्धारित समय पर अपने मतदान केंद्रों पर पहुँचे। मतदान के बीच अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं ने सभी चार सीटें जीतने का दावा करते हुए जोश दिखाया।
एबीवीपी का आत्मविश्वास और मुख्य मुद्दे
एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार यश डबास ने चुनावी माहौल को 'पूरी तरह एकतरफा' बताया और कहा कि उनका संगठन 4-0 से क्लीन स्वीप की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, 'हम सभी इस घटना से बहुत दुखी हैं। ऐसा हादसा कभी नहीं होना चाहिए था। लेकिन हम यह पक्का करेंगे कि सेफ्टी ऑडिट हो और भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो।'
एबीवीपी के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार इशू मौर्य ने अपने संगठन के घोषणापत्र की चार-सूत्री रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने बताया कि एबीवीपी के मुद्दे 'ए से आवास, बी से भागीदारी, वी से विश्वास और पी से परिणाम' पर आधारित हैं — यानी संगठन के नाम के हर अक्षर से एक वादा जुड़ा है।
एनएसयूआई का 'मेरा कैंपस, मेरा घोषणापत्र' अभियान
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार वीर छत्रथ ने बताया कि उनके संगठन ने 'मेरा कैंपस, मेरा घोषणापत्र' अभियान चलाया, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के सभी कॉलेजों तक फैला। छत्रथ ने कहा, 'हमारे एजेंडा और घोषणापत्र की सभी बातें सीधे छात्रों से ली गई हैं। हमारे सभी मुद्दे पूरी तरह से छात्रों पर केंद्रित हैं।' उन्होंने जोर दिया कि इस अभियान के ज़रिये हर कॉलेज की ख़ास समस्याएँ सीधे छात्रों से जुटाई गईं।
कांग्रेस की निष्पक्षता की माँग
कांग्रेस कार्यकर्ता दीपक भारद्वाज ने कहा कि वे निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए जिला कांग्रेस कार्यालय पर एकत्र हुए हैं। उन्होंने बताया कि जिलाध्यक्ष, पूर्व मंत्री और कार्यकर्ता शाम तक कार्यालय में उपस्थित रहेंगे ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव पारदर्शी तरीके से हो और छात्र बिना दबाव के अपना उम्मीदवार चुन सकें।
छात्रों की राय: प्रतिनिधित्व की ज़रूरत
मतदान करने पहुँची छात्रा मनीषा ने कहा कि छात्रों में अपना प्रतिनिधि चुनने को लेकर हमेशा उत्साह रहता है। उनके अनुसार, 'छात्रों की बात विश्वविद्यालय प्रशासन तक पहुँचाने के लिए प्रतिनिधि की ज़रूरत होती है, क्योंकि सभी छात्र एक जैसे नहीं होते।' यह टिप्पणी डीयूएसयू जैसे चुनावों की प्रासंगिकता को रेखांकित करती है, जहाँ देश के सबसे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक के हज़ारों छात्र प्रशासन के सामने अपनी आवाज़ उठाने की उम्मीद रखते हैं।
चुनावी संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि डीयूएसयू चुनाव राष्ट्रीय छात्र राजनीति का एक अहम पड़ाव माना जाता है, क्योंकि यहाँ से उभरे नेता अक्सर बड़े दलों की मुख्यधारा राजनीति में भूमिका निभाते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर छात्र संगठनों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज़ हुई है। मतगणना के बाद स्पष्ट होगा कि एबीवीपी का क्लीन स्वीप का दावा कितना सटीक रहा।