भारत की GDP वृद्धि दर FY27 में 6.5-7% रहने का अनुमान, जेफरीज रिपोर्ट में बड़े संकेत
सारांश
मुख्य बातें
जेफरीज की ताज़ा 'ग्रीड एंड फियर' रिपोर्ट के अनुसार, भारत चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वास्तविक GDP वृद्धि दर 6.5 से 7 प्रतिशत हासिल करने की राह पर है। मज़बूत घरेलू मांग, बैंक ऋण में तेज़ी और व्यापक आर्थिक गतिविधियों में सुधार के कारण नॉमिनल GDP वृद्धि दर 11-12 प्रतिशत के दायरे में रहने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन छह महीने पहले की अपेक्षाओं से बेहतर रहा है।
बैंक ऋण में उल्लेखनीय वृद्धि
रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में बैंक ऋण वृद्धि सालाना आधार पर बढ़कर 17.8 प्रतिशत हो गई — जो ऋण विस्तार की व्यापकता का संकेत है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को दिए जाने वाले ऋण में 24.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसके अलावा उद्योग क्षेत्र को कर्ज़ 20 प्रतिशत, सेवा क्षेत्र को ऋण 22.9 प्रतिशत और कॉर्पोरेट ऋण 21.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा।
निजी कैपेक्स चक्र की शुरुआत के संकेत
जेफरीज की रिपोर्ट में कहा गया, 'कॉर्पोरेट ऋण में तेज़ी यह भी संकेत देती है कि लंबे समय से प्रतीक्षित निजी क्षेत्र के पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) चक्र की शुरुआत आखिरकार हो रही है।' यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद भारतीय कंपनियाँ विस्तार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। गौरतलब है कि निजी निवेश में यह पुनरुत्थान घरेलू अर्थव्यवस्था की लचीलेपन का प्रमाण माना जा रहा है।
आय वृद्धि और घरेलू मांग के संकेतक
जेफरीज में इंडिया रिसर्च के प्रमुख महेश नंदूरकर ने कहा कि आय वृद्धि चालू वित्त वर्ष के 14 प्रतिशत से बढ़कर अगले वित्त वर्ष (जो 1 अप्रैल से शुरू होगा) में 17 प्रतिशत रहने का अनुमान है। घरेलू मांग के मोर्चे पर भी मज़बूती बनी हुई है — अगस्त में जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अप्रैल से अगस्त के बीच बिजली की मांग में वृद्धि 9.4 प्रतिशत दर्ज की गई — जो जनवरी से मार्च की अवधि के 1.8 प्रतिशत की तुलना में बेहद उल्लेखनीय है।
विदेशी मुद्रा प्रवाह और राजकोषीय स्थिति
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की FCNR(B) पहल के तहत विदेशी मुद्रा का मज़बूत प्रवाह देखने को मिला। इस योजना में अनिवासी भारतीयों (NRI) से अपेक्षा से बेहतर $136 अरब की विदेशी मुद्रा जमा राशि जुटाई गई। राजकोषीय मोर्चे पर सरकार के समेकन प्रयासों को सकारात्मक बताते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा GDP के 4.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है और आने वाले वर्षों में इसके और घटने की उम्मीद है।
आगे की राह
जेफरीज की यह रिपोर्ट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संतुलित लेकिन आशावादी तस्वीर पेश करती है। ऋण विस्तार की व्यापकता, उपभोक्ता मांग की स्थिरता और राजकोषीय अनुशासन — ये तीनों मिलकर FY27 में मज़बूत वृद्धि की नींव बना रहे हैं। निवेशकों और नीति-निर्माताओं की नज़र अब निजी कैपेक्स चक्र के विस्तार और अगले वित्त वर्ष की आय वृद्धि पर टिकी रहेगी।