18 सितंबर 2026
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NTA सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जज ने कार्यालय दौरे का संकेत दिया, हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

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NTA सुधारों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: जज ने कार्यालय दौरे का संकेत दिया, हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

सारांश

नीट पेपर लीक के बाद एनटीए सुधारों की रफ्तार से नाखुश सुप्रीम कोर्ट ने खुद कार्यालय दौरे का संकेत दे दिया — यह असाधारण कदम बताता है कि अदालत अब सिर्फ रिपोर्टों पर भरोसा करने को तैयार नहीं, ज़मीनी बदलाव चाहती है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 18 सितंबर 2026 को कहा कि वह एनटीए के कार्यालय का स्वयं दौरा कर सकता है।
नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने संयुक्त सचिव को सुधारों की प्रगति पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की रिपोर्ट पेश करने के लिए सितंबर अंत तक का समय माँगा।
एनटीए को अपनी वेबसाइट पर सुधार-संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश।
अदालत ने दोहराया कि एनटीए में डेपुटेशन पर नहीं, स्थायी विशेषज्ञ स्टाफ की ज़रूरत है।
मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

सर्वोच्च न्यायालय ने 18 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधारों की प्रगति पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वह एनटीए के कार्यालय का स्वयं दौरा कर सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि परीक्षा प्रणाली वास्तव में कार्यात्मक है या केवल कागजों पर। नीट पेपर लीक मामले में याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने एनटीए को अपनी वेबसाइट पर सुधार-संबंधी हलफनामा सार्वजनिक करने का निर्देश दिया।

सुनवाई का घटनाक्रम

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में नीट पेपर लीक के बाद एनटीए में व्यापक संस्थागत सुधार की माँग की गई है।

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स ने डॉ. के. राधाकृष्णन की अगुवाई वाली विशेषज्ञ समिति के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया है। उन्होंने सितंबर के अंत तक टास्क फोर्स की रिपोर्ट पेश करने के लिए समय माँगा।

कोर्ट ने क्या कहा

पीठ ने स्पष्ट किया कि सुधार संबंधी समिति की सिफारिशें महज रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — उन पर ज़मीनी अमल भी ज़रूरी है। अदालत ने हाई पावर्ड कमेटी के साथ समन्वय कर रहे संयुक्त सचिव को सुधारों की प्रगति पर शपथ-पत्र दाखिल करने का आदेश दिया।

कोर्ट ने यह भी दोहराया कि एनटीए में केवल डेपुटेशन पर आए कर्मचारियों से काम नहीं चलाया जा सकता — संस्था को पर्याप्त स्थायी स्टाफ और विशेषज्ञों की ज़रूरत है। इसके अलावा, अदालत ने निर्देश दिया कि एनटीए अपनी वेबसाइट पर सुधारों की स्थिति स्पष्ट करे, ताकि छात्र और अन्य पक्ष इसे देख सकें।

पृष्ठभूमि: 19 अगस्त की पिछली सुनवाई

गौरतलब है कि 19 अगस्त को भी सर्वोच्च न्यायालय ने इसी मामले पर सुनवाई की थी, जब अदालत ने कहा था कि एनटीए में किए जा रहे सुधारों को संस्थागत रूप देना अनिवार्य है। तब केंद्र को राधाकृष्णन समिति और नीलेकणि समिति की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की जानकारी देने का निर्देश दिया गया था। यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक को लेकर छात्रों और अभिभावकों में व्यापक अविश्वास बना हुआ है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की गई है। इससे पहले संयुक्त सचिव को हलफनामा दाखिल करना होगा और एनटीए को अपनी वेबसाइट पर सुधार-संबंधी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। सर्वोच्च न्यायालय का स्पष्ट संदेश है कि नीट जैसी बड़ी परीक्षाओं में पुनः गड़बड़ी न हो और छात्रों का भरोसा बहाल हो — इसके लिए केवल घोषणाएँ नहीं, परिणाम चाहिए।

संपादकीय दृष्टिकोण

विचार-विमर्श हुआ, लेकिन अदालत को अभी भी रिपोर्ट का इंतज़ार है — यह खुद बताता है कि सुधार की गति कितनी धीमी है। असली सवाल यह है कि नीट पेपर लीक से जो लाखों छात्र प्रभावित हुए, उनके लिए जवाबदेही कब तय होगी — रिपोर्टें और हलफनामे उस सवाल का जवाब नहीं हैं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए दौरे का संकेत क्यों दिया?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि वह एनटीए कार्यालय का दौरा इसलिए कर सकता है, ताकि यह सीधे जाँचा जा सके कि परीक्षा आयोजन का तंत्र वास्तव में काम कर रहा है या नहीं। अदालत केवल रिपोर्टों और हलफनामों पर निर्भर नहीं रहना चाहती।
नीट पेपर लीक मामले में एनटीए सुधार के लिए कौन-सी समितियाँ बनाई गई हैं?
केंद्र सरकार ने दो समितियाँ गठित की हैं — डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति और नंदन नीलेकणि की अगुवाई में टास्क फोर्स। दोनों के बीच विचार-विमर्श हो चुका है और टास्क फोर्स की रिपोर्ट सितंबर अंत तक पेश होने की बात है।
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए को क्या निर्देश दिए?
अदालत ने एनटीए को अपनी वेबसाइट पर सुधारों की स्थिति वाला हलफनामा सार्वजनिक करने का आदेश दिया, ताकि छात्र और अन्य पक्ष प्रगति देख सकें। साथ ही, संयुक्त सचिव को प्रगति पर शपथ-पत्र दाखिल करने का निर्देश भी दिया गया।
एनटीए में स्टाफ को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि एनटीए को पर्याप्त स्थायी स्टाफ और विशेषज्ञों की ज़रूरत है। केवल डेपुटेशन पर आए कर्मचारियों से संस्था का सुचारु संचालन संभव नहीं है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी। इससे पहले नीलेकणि टास्क फोर्स को रिपोर्ट पेश करनी होगी और एनटीए को अपनी वेबसाइट पर सुधार-संबंधी जानकारी अपलोड करनी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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