3 अगस्त 2026
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नीट विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी — 'आपराधिक तत्वों को नहीं मिलेगी माफी', SIT या रिटायर्ड जज से जाँच पर विचार

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नीट विरोध प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी — 'आपराधिक तत्वों को नहीं मिलेगी माफी', SIT या रिटायर्ड जज से जाँच पर विचार

सारांश

नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों पर सुप्रीम कोर्ट ने दोटूक कहा — पुलिस की ज्यादती हो या आपराधिक तत्वों की घुसपैठ, कोई नहीं बचेगा। SIT या रिटायर्ड जज की समिति से जाँच पर विचार जारी, अगली सुनवाई 18 अगस्त को।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को स्पष्ट किया कि गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी भी व्यक्ति — पुलिसकर्मी या प्रदर्शनकारी — को नहीं बख्शा जाएगा।
दिल्ली (एनसीटी) सहित सभी राज्यों को प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज FIR वापस लेने या बंद करने की स्वतंत्रता दी गई।
पुलिस की कथित ज्यादतियों की जाँच के लिए SIT या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाने पर विचार।
पैलेट गन के उपयोग को लेकर न्यायालय एक व्यापक राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तैयार करेगा।
28 जुलाई के आदेश में 'आपराधिक रिकॉर्ड' का अर्थ केवल गंभीर एवं जघन्य अपराध बताया गया — सामान्य मामले नहीं।
अगली सुनवाई 18 अगस्त को; राज्यों से जवाब माँगा गया।

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अगस्त 2026 को नीट पेपर लीक विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि गंभीर एवं जघन्य आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी भी व्यक्ति को छोड़ा नहीं जाएगा — चाहे वह पुलिसकर्मी हो या प्रदर्शनकारियों के बीच घुसा कोई आपराधिक तत्व। साथ ही, न्यायालय ने दिल्ली (एनसीटी) सहित अन्य राज्यों को प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी बंद करने अथवा वापस लेने की स्वतंत्रता भी प्रदान की।

बेंच की स्पष्ट चेतावनी

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा, 'यह गलतफहमी नहीं होनी चाहिए कि ज्यादती करने वाले पुलिस अधिकारी या प्रदर्शनकारियों के बीच आने वाले किसी आपराधिक तत्व को बख्शा जाएगा।' पीठ की यह टिप्पणी उन याचिकाओं के संदर्भ में आई जिनमें जंतर-मंतर एवं अन्य स्थानों पर छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कथित ज्यादती का मुद्दा उठाया गया था।

SIT या रिटायर्ड जज से जाँच पर विचार

न्यायालय ने पुलिस की कथित ज्यादतियों की जाँच के लिए दो विकल्पों पर विचार करने की बात कही। पीठ ने कहा, 'हमारे मन में दो बातें हैं — एक, जाँच के लिए पुलिस अधिकारियों की विशेष जाँच टीम (SIT) बनाना, और दूसरा, किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति का गठन।' हालाँकि, कोई अंतिम आदेश अभी नहीं दिया गया — न्यायालय ने राज्यों का पक्ष सुनने के बाद निर्णय लेने का संकेत दिया।

पैलेट गन के उपयोग पर प्रोटोकॉल

याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाए जाने पर पीठ ने कहा कि वह एक व्यापक प्रोटोकॉल तय करेगी। पीठ के शब्दों में, 'हम एक पूरा प्रोटोकॉल बनाना चाहते हैं कि इसका इस्तेमाल कैसे और कहाँ किया जा सकता है।' यह उल्लेखनीय है कि पैलेट गन के उपयोग को लेकर पहले भी विभिन्न संदर्भों में न्यायिक सवाल उठते रहे हैं।

28 जुलाई के आदेश का स्पष्टीकरण

न्यायालय ने अपने 28 जुलाई के पूर्व आदेश को भी स्पष्ट किया, जिसमें कहा गया था कि पुलिस आपराधिक रिकॉर्ड वाले प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा जारी रख सकती है। पीठ ने स्पष्ट किया कि 'आपराधिक रिकॉर्ड' से तात्पर्य केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है — सामान्य या मामूली प्रकरणों से नहीं। यह स्पष्टीकरण उन आशंकाओं को दूर करने के लिए आया जिनमें छात्रों को अनावश्यक रूप से आपराधिक श्रेणी में रखे जाने की चिंता जताई जा रही थी।

अगली सुनवाई और राज्यों से जवाब

न्यायालय ने कोई भी ठोस आदेश देने से पहले विभिन्न राज्यों से जवाब माँगने का निर्णय लिया। इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नीट परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर देशभर में व्यापक बहस चल रही है और छात्र समुदाय में गहरा असंतोष बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में होगी। SIT और रिटायर्ड जज समिति के बीच का विकल्प महत्वपूर्ण है; पुलिस-नेतृत्व वाली SIT की स्वतंत्रता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। पैलेट गन प्रोटोकॉल की माँग वर्षों पुरानी है — कश्मीर से लेकर दिल्ली तक इसके दुरुपयोग के आरोप लगते रहे हैं, और इस पर राष्ट्रीय नीति का अभाव एक गंभीर संस्थागत खामी रही है। 'आपराधिक रिकॉर्ड' की परिभाषा का स्पष्टीकरण ज़रूरी था, लेकिन 18 अगस्त तक की प्रतीक्षा यह भी दर्शाती है कि न्यायालय जल्दबाजी में कोई मिसाल नहीं बनाना चाहता।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर प्रदर्शन मामले में क्या कहा?
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अगस्त को स्पष्ट किया कि नीट विरोध प्रदर्शनों में शामिल गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों — चाहे पुलिसकर्मी हों या प्रदर्शनकारियों में घुसे आपराधिक तत्व — को किसी भी स्थिति में नहीं बख्शा जाएगा। साथ ही, राज्यों को प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध FIR वापस लेने की स्वतंत्रता दी गई।
क्या पुलिस की ज्यादतियों की जाँच होगी?
हाँ, सर्वोच्च न्यायालय ने पुलिस की कथित ज्यादतियों की जाँच के लिए SIT या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता वाली समिति बनाने पर विचार करने की बात कही है। अंतिम निर्णय 18 अगस्त की सुनवाई के बाद राज्यों का पक्ष सुनने के बाद लिया जाएगा।
पैलेट गन पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
न्यायालय ने कहा कि वह पैलेट गन के उपयोग को लेकर एक व्यापक राष्ट्रीय प्रोटोकॉल तैयार करेगा, जिसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि इसका इस्तेमाल कब, कहाँ और कैसे किया जा सकता है। यह कदम याचिकाकर्ताओं द्वारा प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मुद्दा उठाए जाने के बाद आया।
'आपराधिक रिकॉर्ड' से न्यायालय का क्या तात्पर्य है?
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने 28 जुलाई के आदेश को स्पष्ट करते हुए कहा कि 'आपराधिक रिकॉर्ड' का अर्थ केवल गंभीर और जघन्य अपराधों से है। सामान्य या मामूली प्रकरणों में दर्ज FIR के आधार पर प्रदर्शनकारियों पर मुकदमा जारी नहीं रखा जाएगा।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की है। न्यायालय ने कोई भी अंतिम आदेश देने से पहले विभिन्न राज्यों से जवाब माँगने का निर्णय लिया है।
राष्ट्र प्रेस
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