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नीट पेपर लीक प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दी राहत, 18 अगस्त को अगली सुनवाई

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नीट पेपर लीक प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दी राहत, 18 अगस्त को अगली सुनवाई

सारांश

नीट पेपर लीक के विरोध में उतरे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को सर्वोच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है — आगे कोई कार्रवाई नहीं होगी। पैलेट गन एसओपी और एसआईटी गठन के संकेतों के साथ यह मामला 18 अगस्त को निर्णायक मोड़ पर पहुँच सकता है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण नीट प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध आगे कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी।
हत्या, डकैती जैसे गंभीर आरोपों वाले प्रदर्शनकारियों की जाँच जारी रहेगी ।
अदालत ने पैलेट गन के उपयोग के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने के संकेत दिए।
निष्पक्ष जाँच के लिए एसआईटी या हाई पावर कमेटी के गठन पर विचार संभव।
संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को 18 अगस्त से पूर्व हलफनामे दाखिल करने होंगे।
मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को निर्धारित।

सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अगस्त 2026 को नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिससे पहले संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे।

अदालत का स्पष्टीकरण: किसे राहत, किसे नहीं

याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुनवाई के बाद मीडिया को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश को और स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हत्या, डकैती जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में एफआईआर दर्ज है, उनकी जाँच जारी रहेगी। किंतु जो लोग केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भागीदार थे, उन्हें अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नीट-यूजी 2024 पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश चरम पर है और कई शहरों में प्रदर्शन हो चुके हैं। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

सॉलिसिटर जनरल का आश्वासन

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि पुलिस आयुक्त और संबंधित एजेंसियों से आवश्यक निर्देश अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। निर्देश मिलने के पश्चात सरकार की ओर से विस्तृत जवाब अदालत में दाखिल किया जाएगा। इसके साथ ही राज्यों के मुख्य सचिवों को भी 18 अगस्त से पूर्व अपने-अपने हलफनामे प्रस्तुत करने होंगे।

पैलेट गन पर अदालत की टिप्पणी और एसओपी का संकेत

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने याचिकाकर्ताओं की ओर से माँग रखी कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग का इस्तेमाल कब, किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर किया गया, इसका पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया जाए।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में संकेत दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पैलेट गन का उपयोग उचित नहीं है। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में पैलेट गन के उपयोग को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा सकती है, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के अंतर्गत इसका प्रयोग संभव होगा।

एसआईटी या हाई पावर कमेटी के गठन का संकेत

अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए एसआईटी अथवा किसी हाई पावर कमेटी का गठन किया जा सकता है। 18 अगस्त की सुनवाई तक राज्यों के हलफनामे और पुलिस का जवाब अदालत के समक्ष आ जाने की उम्मीद है, जिसके बाद जाँच एजेंसी के गठन पर निर्णय लिया जा सकता है।

अधिवक्ता त्रिपाठी के अनुसार अगली सुनवाई में इस दिशा में कोई ठोस निष्कर्ष सामने आने की संभावना है। यह मामला न केवल नीट पेपर लीक की पारदर्शिता, बल्कि प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस बल प्रयोग की सीमाओं पर भी एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत स्थापित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

किंतु असली परीक्षा 18 अगस्त को होगी जब राज्यों के हलफनामे और पुलिस का जवाब सामने आएगा। पैलेट गन के इस्तेमाल पर एसओपी की बात वर्षों से होती रही है — 2016 के कश्मीर प्रकरण के बाद भी यही वादा हुआ था, पर ठोस नीति नहीं बनी। एसआईटी या हाई पावर कमेटी का संकेत सकारात्मक है, लेकिन इसकी स्वतंत्रता और समयसीमा तय न होने तक यह केवल आश्वासन ही रहेगा। नीट पेपर लीक का मूल प्रश्न — परीक्षा प्रणाली की जवाबदेही — इस न्यायिक प्रक्रिया में अभी भी पृष्ठभूमि में है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक प्रदर्शन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या राहत दी?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जो प्रदर्शनकारी केवल शांतिपूर्ण विरोध में शामिल थे, उनके विरुद्ध आगे कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। हालाँकि, हत्या और डकैती जैसे गंभीर आरोपों वाले मामलों में जाँच जारी रहेगी।
इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी और उससे पहले क्या होगा?
अगली सुनवाई 18 अगस्त 2026 को निर्धारित है। इससे पहले संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे और पुलिस आयुक्त सहित अन्य एजेंसियों को भी अपना जवाब अदालत में प्रस्तुत करना होगा।
पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में संकेत दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पैलेट गन का उपयोग उचित नहीं है। इसके साथ ही भविष्य में पैलेट गन के उपयोग को नियंत्रित करने के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार किए जाने के संकेत भी दिए गए।
क्या इस मामले में एसआईटी या कोई जाँच समिति बनेगी?
अदालत ने संकेत दिया है कि मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए एसआईटी या हाई पावर कमेटी का गठन किया जा सकता है। 18 अगस्त की सुनवाई के बाद इस पर कोई ठोस निर्णय लिए जाने की संभावना है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से क्या माँग की?
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने माँग की कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग का पूरा रिकॉर्ड — कब, किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर — अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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