नीट पेपर लीक प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को दी राहत, 18 अगस्त को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 3 अगस्त 2026 को नीट पेपर लीक के विरोध में जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध किसी भी प्रकार की आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। अगली सुनवाई 18 अगस्त को निर्धारित की गई है, जिससे पहले संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को हलफनामे दाखिल करने होंगे।
अदालत का स्पष्टीकरण: किसे राहत, किसे नहीं
याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुनवाई के बाद मीडिया को बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व आदेश को और स्पष्ट किया है। अदालत ने कहा कि जिन प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध हत्या, डकैती जैसे गंभीर आपराधिक मामलों में एफआईआर दर्ज है, उनकी जाँच जारी रहेगी। किंतु जो लोग केवल शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में भागीदार थे, उन्हें अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में नीट-यूजी 2024 पेपर लीक को लेकर छात्रों का आक्रोश चरम पर है और कई शहरों में प्रदर्शन हो चुके हैं। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल के आरोप ने इस मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
सॉलिसिटर जनरल का आश्वासन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया कि पुलिस आयुक्त और संबंधित एजेंसियों से आवश्यक निर्देश अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। निर्देश मिलने के पश्चात सरकार की ओर से विस्तृत जवाब अदालत में दाखिल किया जाएगा। इसके साथ ही राज्यों के मुख्य सचिवों को भी 18 अगस्त से पूर्व अपने-अपने हलफनामे प्रस्तुत करने होंगे।
पैलेट गन पर अदालत की टिप्पणी और एसओपी का संकेत
वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकर नारायणन ने याचिकाकर्ताओं की ओर से माँग रखी कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन और अन्य बल प्रयोग का इस्तेमाल कब, किस परिस्थिति में और किसके आदेश पर किया गया, इसका पूरा रिकॉर्ड अदालत के समक्ष पेश किया जाए।
अदालत ने मौखिक टिप्पणी में संकेत दिया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पैलेट गन का उपयोग उचित नहीं है। इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में पैलेट गन के उपयोग को लेकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जा सकती है, जिसमें स्पष्ट किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में और किस प्रक्रिया के अंतर्गत इसका प्रयोग संभव होगा।
एसआईटी या हाई पावर कमेटी के गठन का संकेत
अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि मामले की निष्पक्ष जाँच के लिए एसआईटी अथवा किसी हाई पावर कमेटी का गठन किया जा सकता है। 18 अगस्त की सुनवाई तक राज्यों के हलफनामे और पुलिस का जवाब अदालत के समक्ष आ जाने की उम्मीद है, जिसके बाद जाँच एजेंसी के गठन पर निर्णय लिया जा सकता है।
अधिवक्ता त्रिपाठी के अनुसार अगली सुनवाई में इस दिशा में कोई ठोस निष्कर्ष सामने आने की संभावना है। यह मामला न केवल नीट पेपर लीक की पारदर्शिता, बल्कि प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस बल प्रयोग की सीमाओं पर भी एक महत्त्वपूर्ण न्यायिक दृष्टांत स्थापित कर सकता है।