13 अगस्त 2026
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नीट यूजी पेपर लीक: जंतर मंतर प्रदर्शनकारियों पर फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल की याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार

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नीट यूजी पेपर लीक: जंतर मंतर प्रदर्शनकारियों पर फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल की याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक का विरोध करने वाले प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस के फेशियल रिकग्निशन इस्तेमाल का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय पहुँच गया है। CJI सूर्यकांत की पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली है और 19 अगस्त को सुनवाई होगी — जब एनटीए की भूमिका और डेटा गोपनीयता, दोनों मुद्दे एक साथ कटघरे में होंगे।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 अगस्त को जंतर मंतर प्रदर्शनकारियों पर फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार की।
वकील मेनका गुरुस्वामी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों का डेटा निजी कंपनियों के पास रखा जा रहा है।
मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी; 6 अगस्त की सुनवाई में केंद्र के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब माँगा गया था।
केंद्र सरकार के नए कानून के तहत पेपर लीक पर 10 साल की जेल और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देगी।
याचिकाकर्ताओं की माँग — एनटीए को भंग कर स्वतंत्र और सुरक्षित नई परीक्षा संस्था का गठन किया जाए।

सर्वोच्च न्यायालय ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक के कथित इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। 13 अगस्त को प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को जंतर मंतर प्रदर्शन से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया।

याचिका में क्या आरोप हैं

याचिकाकर्ता की वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है और इससे संबंधित डेटा निजी कंपनियों के पास संग्रहीत किया जा रहा है। यह गोपनीयता और नागरिक अधिकारों से जुड़ी गंभीर चिंताओं को उठाता है।

नीट-यूजी मामले में अब तक का घटनाक्रम

6 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। पीठ ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब माँगा था। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, 'हलफनामे में कई ऐसी बातें हैं, जिन पर विचार और चर्चा की जाएगी।' मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को निर्धारित है।

एनटीए पर उठे सवाल और याचिकाकर्ताओं की माँगें

दाखिल याचिकाओं में परीक्षा संचालन संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की माँग है कि सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार को निर्देश दे कि एनटीए को भंग कर उसकी जगह एक नई, तकनीकी रूप से सक्षम, अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र संस्था का गठन किया जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

सरकार की प्रतिक्रिया और सुधार के कदम

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार के अनुसार, 2026 में बने नए कानून के तहत पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों में 10 साल तक की कारावास और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो मौजूदा परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देगी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का यह मामला व्यापक बहस का विषय बन चुका है — विशेषकर तब, जब देश में डेटा संरक्षण कानून अभी भी अपने शुरुआती दौर में है। 19 अगस्त की सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार के हलफनामे, एनटीए की भूमिका और फेशियल रिकग्निशन के इस्तेमाल — तीनों पहलुओं पर एक साथ विचार करेगी, जिससे इस मामले का दायरा और व्यापक हो गया है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वहाँ निजी कंपनियों के सर्वर पर प्रदर्शनकारियों का चेहरा-डेटा संग्रहीत होना एक खतरनाक मिसाल बन सकता है। दूसरी ओर, एनटीए सुधार की माँग वैध है — लेकिन केवल संस्था बदलने से व्यवस्थागत खामियाँ नहीं जाएंगी, जब तक जवाबदेही का ढाँचा नहीं बदलता। नंदन नीलेकणी की टास्क फोर्स एक सकारात्मक कदम है, पर असली परीक्षा उसकी सिफारिशों के क्रियान्वयन में होगी।
RashtraPress
13 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट यूजी प्रदर्शनकारियों पर फेस रिकग्निशन का मामला क्या है?
जंतर मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल और उस डेटा को निजी कंपनियों के पास रखे जाने के आरोपों को चुनौती देने वाली याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की गई है। CJI सूर्यकांत की पीठ ने इसे 13 अगस्त को सुनवाई के लिए स्वीकार किया।
सुप्रीम कोर्ट में नीट-यूजी मामले की अगली सुनवाई कब है?
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी याचिकाओं और फेशियल रिकग्निशन याचिका की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित है। 6 अगस्त की सुनवाई में केंद्र सरकार के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब माँगा गया था।
याचिकाकर्ता एनटीए के बारे में क्या माँग कर रहे हैं?
याचिकाकर्ताओं की माँग है कि सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार को एनटीए को भंग कर उसकी जगह एक नई, तकनीकी रूप से मजबूत, अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र परीक्षा संस्था बनाने का निर्देश दे। उनका तर्क है कि मौजूदा ढाँचे में पेपर लीक रोकने की क्षमता नहीं है।
पेपर लीक रोकने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि 2026 में बने नए कानून के तहत पेपर लीक या नकल के दोषियों को 10 साल तक की जेल और ₹5 करोड़ तक का जुर्माना हो सकता है। इसके अलावा इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स भी गठित की गई है।
फेशियल रिकग्निशन डेटा को निजी कंपनियों के पास रखना क्यों चिंताजनक है?
वकील मेनका गुरुस्वामी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का बायोमेट्रिक डेटा निजी कंपनियों के सर्वर पर संग्रहीत किया जा रहा है, जो नागरिकों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है। भारत में व्यापक डेटा संरक्षण कानून के अभाव में यह मामला और भी संवेदनशील हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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