नीट यूजी पेपर लीक: जंतर मंतर प्रदर्शनकारियों पर फेस रिकग्निशन के इस्तेमाल की याचिका सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक के कथित इस्तेमाल को चुनौती देने वाली याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। 13 अगस्त को प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस याचिका को जंतर मंतर प्रदर्शन से जुड़ी अन्य याचिकाओं के साथ जोड़ने का आदेश दिया।
याचिका में क्या आरोप हैं
याचिकाकर्ता की वकील मेनका गुरुस्वामी ने अदालत को बताया कि दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेशियल रिकग्निशन तकनीक का इस्तेमाल कर रही है और इससे संबंधित डेटा निजी कंपनियों के पास संग्रहीत किया जा रहा है। यह गोपनीयता और नागरिक अधिकारों से जुड़ी गंभीर चिंताओं को उठाता है।
नीट-यूजी मामले में अब तक का घटनाक्रम
6 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई हुई थी। पीठ ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब माँगा था। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था, 'हलफनामे में कई ऐसी बातें हैं, जिन पर विचार और चर्चा की जाएगी।' मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को निर्धारित है।
एनटीए पर उठे सवाल और याचिकाकर्ताओं की माँगें
दाखिल याचिकाओं में परीक्षा संचालन संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं की माँग है कि सर्वोच्च न्यायालय केंद्र सरकार को निर्देश दे कि एनटीए को भंग कर उसकी जगह एक नई, तकनीकी रूप से सक्षम, अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र संस्था का गठन किया जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार की प्रतिक्रिया और सुधार के कदम
केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल हलफनामे में कहा है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार के अनुसार, 2026 में बने नए कानून के तहत पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों में 10 साल तक की कारावास और ₹5 करोड़ तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त, इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो मौजूदा परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देगी।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि फेशियल रिकग्निशन तकनीक के इस्तेमाल का यह मामला व्यापक बहस का विषय बन चुका है — विशेषकर तब, जब देश में डेटा संरक्षण कानून अभी भी अपने शुरुआती दौर में है। 19 अगस्त की सुनवाई में अदालत केंद्र सरकार के हलफनामे, एनटीए की भूमिका और फेशियल रिकग्निशन के इस्तेमाल — तीनों पहलुओं पर एक साथ विचार करेगी, जिससे इस मामले का दायरा और व्यापक हो गया है।