नीट-यूजी पेपर लीक: दिल्ली कोर्ट ने सीबीआई को अतिरिक्त संदिग्धों की जांच की अनुमति दी
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार, 14 अगस्त को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस अर्जी को मंजूरी दे दी, जिसमें नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जांच का दायरा बढ़ाकर अतिरिक्त संदिग्धों के खिलाफ साक्ष्य संकलन की अनुमति माँगी गई थी। राउज एवेन्यू कोर्ट परिसर स्थित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के इस आदेश से जांच एजेंसी को उन व्यक्तियों की गतिविधियों की गहराई से पड़ताल करने का अधिकार मिल गया है, जिनकी भूमिका 3 मई को निर्धारित — और बाद में रद्द की गई — नीट-यूजी परीक्षा से पहले सामने आई थी।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया कि एजेंसी द्वारा दाखिल चार्जशीट में यह स्पष्ट किया गया था कि 13 आरोपियों के अलावा कुछ अन्य संदिग्धों के खिलाफ भी जांच जारी है। एजेंसी का कहना है कि मूल 13 आरोपियों के विरुद्ध जांच पूर्ण हो चुकी है, परंतु पेपर लीक की व्यापक साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका अभी जांच के दायरे में है।
गौरतलब है कि इससे दो दिन पहले, बुधवार को अदालत ने 13 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई द्वारा दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लिया था। यह चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई थी।
चार्जशीट में क्या है
सीबीआई का आरोप है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के विषय विशेषज्ञों, बिचौलियों, कोचिंग संचालकों और अन्य लोगों के नेटवर्क के जरिए गोपनीय प्रश्नपत्र 3 मई की परीक्षा से पहले लीक किए गए। चार्जशीट के अनुसार, प्रश्नपत्रों के अनुवाद, पुनः अनुवाद और प्रूफरीडिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे NTA के तीन विषय विशेषज्ञों ने सुरक्षा व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर गोपनीय प्रश्न दिल्ली स्थित NTA कार्यालय से बाहर निकाले।
सीबीआई के अनुसार, आरोपी पीवी कुलकर्णी ने कथित तौर पर रसायन विज्ञान के सभी 135 प्रश्न और उनके उत्तर विकल्प छोटे-छोटे कागजों पर लिखकर गोपनीय अनुभाग से बाहर निकलते समय छिपाकर ले गए। एजेंसी ने यह भी बताया कि NTA के गोपनीय अनुभाग में प्रवेश या बाहर निकलते समय विशेषज्ञों की तलाशी लेने की कोई व्यवस्था ही नहीं थी।
एक अन्य आरोपी मनीषा गुरुनाथ मंडारे ने कथित तौर पर NCERT की किताबों की अपनी जानकारी का उपयोग करते हुए होटल लौटने के बाद प्रश्नों को पुनः तैयार किया। वहीं मनीषा संजय हवालदार ने कथित रूप से भौतिक विज्ञान के प्रश्नों का संक्षिप्त विवरण अपने ठिकाने पर लौटने के बाद लिखा।
सुरक्षा व्यवस्था में खामियाँ
सीबीआई ने NTA कार्यालय की सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था में गंभीर खामियाँ उजागर की हैं। एजेंसी के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज का बैकअप केवल 20 से 25 दिनों तक उपलब्ध था और गोपनीय अनुभाग की निगरानी के लिए कोई अलग लाइव-फीड कंट्रोल रूम नहीं था। यह ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
साक्ष्यों का दायरा
सीबीआई ने अपने मामले को पुख्ता करने के लिए 360 गवाहों, 422 दस्तावेजों और 43 भौतिक साक्ष्यों का उल्लेख किया है। अदालत की अनुमति के बाद अब जांच का दायरा और विस्तृत होने की संभावना है।
आगे की राह
अदालत की यह मंजूरी संकेत देती है कि नीट-यूजी पेपर लीक मामले में जांच अभी अपने अंतिम चरण में नहीं पहुँची है। सीबीआई के अतिरिक्त संदिग्धों की भूमिका की पड़ताल से यह स्पष्ट होगा कि साजिश का दायरा कितना बड़ा था और क्या इसमें और अधिक लोग शामिल थे।