पेपर लीक मामले: दिल्ली की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में अब रोज़ाना होगी सुनवाई, जज अजय गुप्ता ने संभाला कार्यभार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 से पूर्ण रूप से कामकाज शुरू कर दिया है। नवनियुक्त विशेष न्यायाधीश अजय गुप्ता ने इस अदालत का कार्यभार संभाल लिया है और स्पष्ट किया है कि अब पेपर लीक से जुड़े सभी मामलों की सुनवाई रोज़ाना के आधार पर की जाएगी, ताकि पीड़ित छात्रों को शीघ्र न्याय सुनिश्चित हो सके।
मुख्य घटनाक्रम
इस मामले में मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल ने अदालत में एक आवेदन प्रस्तुत किया है, जिसमें उन्होंने पॉलीग्राफ टेस्ट, ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने की मांग की है। कोर्ट ने इस आवेदन पर नोटिस जारी करते हुए सरकार और जाँच एजेंसियों से जवाब तलब किया है कि क्या इस प्रकार की अर्जी सुनवाई योग्य है।
वहीं दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। बचाव पक्ष के वकील ने अदालत से मामले की चार्जशीट पढ़ने के लिए अतिरिक्त समय माँगा, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अगली तारीख निर्धारित की। चार्जशीट पर संज्ञान लेने के मुद्दे पर सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
अदालत का गठन और पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए इस फास्ट ट्रैक अदालत का गठन किया था। 25 जुलाई को राऊज एवेन्यू कोर्ट के कोर्ट नंबर 408 में इस विशेष अदालत ने पहली बार कामकाज शुरू किया था, तब विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने इसका कार्यभार संभाला था। अब न्यायाधीश अजय गुप्ता के नेतृत्व में यह अदालत नई गति से काम करेगी।
सरकार का रुख और राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के आरोपों ने देशभर में व्यापक आक्रोश पैदा किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई होनी चाहिए और दोषियों को कठोर दंड मिलना चाहिए।
आम जनता और छात्रों पर असर
पेपर लीक के मामलों ने लाखों प्रतियोगी छात्रों की मेहनत और भविष्य को प्रभावित किया है। फास्ट ट्रैक कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई का निर्णय इन छात्रों के लिए न्याय की उम्मीद को बल देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि त्वरित न्यायिक प्रक्रिया से न केवल दोषियों को सज़ा मिलेगी, बल्कि परीक्षा प्रणाली में जनता का विश्वास भी बहाल होगा।
आगे क्या होगा
अदालत 6 अगस्त को चार्जशीट पर संज्ञान लेने के प्रश्न पर सुनवाई करेगी। पॉलीग्राफ और ब्रेन मैपिंग टेस्ट की मांग पर सरकार और जाँच एजेंसियों का जवाब आने के बाद अदालत अगला निर्णय करेगी। इस मामले की प्रतिदिन होने वाली सुनवाई से यह उम्मीद की जा रही है कि शीघ्र ही मामले में ठोस प्रगति सामने आएगी।