नीट पेपर लीक पर चर्चा को सरकार तैयार, रिजिजू बोले — विपक्ष तारीख और समय तय करे
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में 23 जुलाई 2024 को मानसून सत्र के चौथे दिन भी नीट पेपर लीक विवाद की आँच से प्रश्नकाल और शून्यकाल दोनों बाधित रहे। शून्यकाल आरंभ होते ही केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में स्पष्ट किया कि सरकार विपक्ष की तय की गई किसी भी तारीख और समय पर इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है। लगातार नारेबाज़ी और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
रिजिजू की सदन में अपील
केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने पीठासीन अधिकारी के माध्यम से सदन को संबोधित करते हुए कहा, 'हमने कल अपील की थी। मैं आज आपके जरिए सदन से फिर अपील करना चाहता हूँ। हमने कांग्रेस पार्टी के नेताओं और दूसरे विपक्षी सदस्यों से भी व्यक्तिगत स्तर पर बात की है। हमने उन्हें व्यक्तिगत रूप से मिलने और अपने सुझाव साझा करने के लिए बुलाया है।' उन्होंने आगे कहा कि सरकार लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष की इच्छानुसार किसी भी तारीख, किसी भी समय और जितनी अवधि के लिए चाहे, चर्चा के लिए तैयार है।
PM मोदी का संदेश और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रस्ताव
रिजिजू ने बताया कि गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के समक्ष यह संदेश दिया कि नीट पेपर लीक मामलों में दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए जाएँगे। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होगा। रिजिजू ने कहा, 'हम विपक्ष से हाथ जोड़कर विनती करना चाहते हैं कि कृपया तय करें कि चर्चा कब शुरू करनी है — हम तैयार हैं।'
विपक्ष पर बहानेबाज़ी का आरोप
रिजिजू ने विपक्ष पर सीधा आरोप लगाया कि वह शर्तें रखकर चर्चा से बचने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा, 'अगर आप बहाने बनाएँगे, तो स्पष्ट है कि आप चर्चा से भागना चाहते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि NDA के सभी सदस्यों ने भी सदन में प्रदर्शन कर माँग की कि नीट पेपर लीक पर तत्काल और राष्ट्रव्यापी चर्चा हो।
राष्ट्रीय मुद्दा, दलगत राजनीति से परे
केंद्रीय मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि यह विषय किसी एक सरकार या दल का नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों में जितने भी पेपर लीक हुए हैं, उन सभी पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। रिजिजू ने सभी दलों से अपील की कि छात्रों के हित को सर्वोपरि रखते हुए एकजुट होकर इस मुद्दे पर विचार-विमर्श करें और बिना किसी देरी के चर्चा शुरू की जाए।
आगे क्या
सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित रहने के बाद भी गतिरोध जारी रहने की आशंका है। यदि विपक्ष सरकार के प्रस्ताव पर सहमति जताता है, तो नीट पेपर लीक पर संसद में विस्तृत बहस हो सकती है — जो लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़े इस संकट पर नीतिगत जवाबदेही की दिशा में एक अहम कदम होगा।