NEET पेपर लीक: राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू, जज अनु ग्रोवर बालिगा ने संभाला कार्यभार
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में राऊज एवेन्यू कोर्ट के कोर्ट नंबर 408 में 25 जुलाई 2026 को स्थापित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने औपचारिक रूप से कामकाज शुरू कर दिया है, जो NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई करेगी। विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने शनिवार को इस अदालत का कार्यभार संभाला। यह अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित की गई है।
अदालत का गठन और उद्देश्य
दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेज़ी लाने के उद्देश्य से इस विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया। इस अदालत का प्राथमिक लक्ष्य लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करना और दोषियों के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया को गति देना है। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक विवाद ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया था और देशभर में व्यापक विरोध को जन्म दिया था।
प्रधानमंत्री की घोषणा और सरकार का रुख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी। इसी दिशा में न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
कानून में संशोधन: कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार पेपर लीक पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कानूनी ढाँचे को और कठोर बनाने की प्रक्रिया में है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' में संशोधन से जुड़े मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी। यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बनाया गया है।
नए विधेयक में प्रस्तावित दंड
संशोधित विधेयक में पेपर लीक के संगठित मामलों के लिए 10 साल तक के कारावास और अधिकतम ₹10 करोड़ के जुर्माने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा कानून की तुलना में काफी कठोर है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत अपराधियों के लिए 3 से 5 वर्ष की सज़ा है, जबकि संगठित अपराधों में 5 से 10 वर्ष के कारावास और न्यूनतम ₹1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।
आगे क्या होगा
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के साथ ही NEET और अन्य परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक मामलों की सुनवाई में उल्लेखनीय तेज़ी आने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। संशोधित कानून के संसद में पारित होने के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा तय होगी।