25 जुलाई 2026
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NEET पेपर लीक: राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू, जज अनु ग्रोवर बालिगा ने संभाला कार्यभार

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NEET पेपर लीक: राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू, जज अनु ग्रोवर बालिगा ने संभाला कार्यभार

सारांश

NEET पेपर लीक विवाद के बाद न्यायिक जवाब तेज़ हुआ — राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू, जज अनु ग्रोवर बालिगा ने कार्यभार संभाला। साथ ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संशोधित कानून को मंजूरी दी जिसमें ₹10 करोड़ जुर्माने और 10 साल जेल का प्रस्ताव है।

मुख्य बातें

राऊज एवेन्यू कोर्ट के कोर्ट नंबर 408 में 25 जुलाई 2026 को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने कामकाज शुरू किया।
विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने शनिवार को अदालत का कार्यभार संभाला; अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' में संशोधन के मसौदे को मंजूरी दी।
संगठित पेपर लीक मामलों में प्रस्तावित दंड: 10 साल तक जेल और अधिकतम ₹10 करोड़ जुर्माना।
वर्तमान कानून में संगठित अपराधों पर 5 से 10 वर्ष की सज़ा और न्यूनतम ₹1 करोड़ जुर्माने का प्रावधान है।

नई दिल्ली में राऊज एवेन्यू कोर्ट के कोर्ट नंबर 408 में 25 जुलाई 2026 को स्थापित स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने औपचारिक रूप से कामकाज शुरू कर दिया है, जो NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई करेगी। विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने शनिवार को इस अदालत का कार्यभार संभाला। यह अदालत दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर गठित की गई है।

अदालत का गठन और उद्देश्य

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामलों की सुनवाई में तेज़ी लाने के उद्देश्य से इस विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया। इस अदालत का प्राथमिक लक्ष्य लंबित मामलों का शीघ्र निपटारा करना और दोषियों के विरुद्ध न्यायिक प्रक्रिया को गति देना है। गौरतलब है कि NEET पेपर लीक विवाद ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया था और देशभर में व्यापक विरोध को जन्म दिया था।

प्रधानमंत्री की घोषणा और सरकार का रुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों पर सख्त रुख अपनाते हुए देशभर में फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के विरुद्ध त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाई जाएगी। इसी दिशा में न्यायिक प्रक्रिया को तेज़ करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।

कानून में संशोधन: कैबिनेट की मंजूरी

केंद्र सरकार पेपर लीक पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कानूनी ढाँचे को और कठोर बनाने की प्रक्रिया में है। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'द पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024' में संशोधन से जुड़े मसौदा विधेयक को मंजूरी दे दी। यह कानून सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बनाया गया है।

नए विधेयक में प्रस्तावित दंड

संशोधित विधेयक में पेपर लीक के संगठित मामलों के लिए 10 साल तक के कारावास और अधिकतम ₹10 करोड़ के जुर्माने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा कानून की तुलना में काफी कठोर है। वर्तमान प्रावधानों के अनुसार व्यक्तिगत अपराधियों के लिए 3 से 5 वर्ष की सज़ा है, जबकि संगठित अपराधों में 5 से 10 वर्ष के कारावास और न्यूनतम ₹1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।

आगे क्या होगा

विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के साथ ही NEET और अन्य परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक मामलों की सुनवाई में उल्लेखनीय तेज़ी आने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। संशोधित कानून के संसद में पारित होने के बाद इसके क्रियान्वयन की दिशा तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति की होगी। भारत में परीक्षा घोटालों का इतिहास बताता है कि जाँच एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और राजनीतिक दबाव के चलते मुकदमे वर्षों खिंचते रहे हैं। ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रस्ताव कागज़ पर कठोर दिखता है, लेकिन जब तक दोषसिद्धि दर नहीं बढ़ती, यह आँकड़ा महज़ प्रतीकात्मक रहेगा। लाखों छात्रों का भरोसा बहाल करने के लिए अदालती फैसलों की गति और पारदर्शिता दोनों ज़रूरी हैं।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट क्यों बनाई गई?
दिल्ली उच्च न्यायालय ने NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक और अनुचित साधनों से जुड़े आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए यह विशेष अदालत गठित की। इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को गति देकर दोषियों को जल्द सज़ा दिलाना है।
विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट कहाँ स्थित है और इसकी न्यायाधीश कौन हैं?
यह अदालत नई दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट परिसर के कोर्ट नंबर 408 में स्थापित की गई है। विशेष न्यायाधीश अनु ग्रोवर बालिगा ने 25 जुलाई 2026 को इसका कार्यभार संभाला।
पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट, 2024 में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस कानून में संशोधन के मसौदे को मंजूरी दी है, जिसमें संगठित पेपर लीक मामलों के लिए 10 साल तक के कारावास और अधिकतम ₹10 करोड़ के जुर्माने का प्रस्ताव है। यह मौजूदा प्रावधानों से काफी कठोर है।
मौजूदा कानून में पेपर लीक पर क्या सज़ा है?
वर्तमान कानून के तहत व्यक्तिगत अपराधियों के लिए 3 से 5 वर्ष की सज़ा का प्रावधान है। संगठित पेपर लीक और नकल के मामलों में 5 से 10 वर्ष के कारावास और न्यूनतम ₹1 करोड़ के जुर्माने का प्रावधान है।
इस फास्ट ट्रैक कोर्ट से छात्रों को क्या फायदा होगा?
इस अदालत के गठन से NEET और अन्य परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों की सुनवाई तेज़ होगी, जिससे दोषियों को जल्द सज़ा मिलने की संभावना बढ़ेगी। इससे परीक्षा प्रणाली में छात्रों का भरोसा बहाल करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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