23 जुलाई 2026
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नीट पेपर लीक: चार राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत होगी कार्रवाई

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नीट पेपर लीक: चार राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत होगी कार्रवाई

सारांश

नीट पेपर लीक विवाद में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के दायरे में चार फास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने की प्रक्रिया शुरू की। पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत दोषियों को 5 साल जेल और ₹10 लाख जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने 23 जुलाई को नीट पेपर लीक मामले में चार राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की।
अदालतें बॉम्बे , कलकत्ता , दिल्ली और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में बनेंगी; दो मामले बॉम्बे हाईकोर्ट के दायरे में।
आरोपियों पर पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट, 2024 के तहत मुकदमा; दोषी सिद्ध होने पर 5 साल जेल और ₹10 लाख जुर्माना।
अब तक इस कानून के तहत नीट लीक में 4 एफआईआर दर्ज; उच्च न्यायालयों में लगभग 4 मामले लंबित।
नया कानून UPSC, SSC, RRB, IBPS और NTA की सभी परीक्षाओं पर भी लागू होगा।
PM मोदी ने एक्स पर लिखा — युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

नई दिल्ली में 23 जुलाई को केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक मामले में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए चार राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प जताया था।

किन अदालतों के अधिकार क्षेत्र में बनेंगी विशेष अदालतें

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर चार फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए जा रहे हैं। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाईकोर्ट के दायरे में आते हैं। केंद्र सरकार इन राज्यों और संबंधित उच्च न्यायालयों से विशेष अदालतें बनाने का औपचारिक अनुरोध करने वाली है, ताकि प्रतिदिन सुनवाई हो सके और मामलों का शीघ्र निपटारा संभव हो।

पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत कार्रवाई

आरोपियों पर पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 — जिसे 'एंटी-चीटिंग कानून' भी कहा जा रहा है — के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर पाँच साल की कैद और ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब तक नीट लीक से जुड़े इस कानून के तहत चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।

नीट और एनटीए का दायरा

नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है। चूँकि यह एक सार्वजनिक परीक्षा है, इससे जुड़े पेपर लीक और अनुचित साधनों के सभी मामले नए कानून के दायरे में आएंगे। सूत्रों के मुताबिक, नया कानून UPSC, SSC, RRB, IBPS, केंद्र सरकार के मंत्रालयों-विभागों की भर्ती परीक्षाओं और NTA द्वारा आयोजित समस्त प्रवेश परीक्षाओं पर भी लागू होगा — यानी यह एक व्यापक ढाँचा है जो भविष्य के पेपर लीक मामलों को भी कवर करेगा।

PM मोदी का एक्स पर संदेश

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश के युवाओं के प्रति सरकार की चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, 'हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। जो लोग हमारे युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।' इसी पोस्ट में उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की थी।

आगे क्या होगा

फिलहाल उच्च न्यायालयों में लगभग चार मामले लंबित हैं, जिन्हें नई विशेष अदालतों में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों मेडिकल अभ्यर्थी और उनके परिवार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा नियामक तंत्र की जवाबदेही पर बहस को नई धार दी है। विशेष अदालतों के गठन से यह स्पष्ट होगा कि सरकार मामले को कितनी गति से आगे बढ़ाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — भारत में विशेष अदालतें प्रायः संसाधन और न्यायाधीशों की कमी से जूझती हैं। पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 एक नया कानून है जिसकी अदालत में व्याख्या अभी होनी है; यदि अभियोजन पक्ष तकनीकी पेचीदगियों में उलझा तो 'त्वरित न्याय' का वादा खोखला पड़ सकता है। इसके अलावा, NTA की संरचनागत खामियों — जिनसे लीक संभव हुई — पर कोई स्पष्ट सुधार एजेंडा अभी तक सामने नहीं आया है, जो इस पूरी कवायद की सीमा को रेखांकित करता है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट पेपर लीक मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट कहाँ बनाई जाएंगी?
सूत्रों के अनुसार, बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में चार फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाई जा रही हैं। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाईकोर्ट के दायरे में आते हैं।
पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत क्या सज़ा मिल सकती है?
इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर पाँच साल की कैद और ₹10 लाख तक का जुर्माना हो सकता है। यह कानून पेपर लीक और अनुचित साधनों के उपयोग को गंभीर आपराधिक अपराध मानता है।
नीट पेपर लीक में अब तक कितने मामले दर्ज हुए हैं?
सूत्रों के मुताबिक, पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत नीट लीक से जुड़ी अब तक चार एफआईआर दर्ज की गई हैं। इसके अलावा उच्च न्यायालयों में लगभग चार मामले लंबित हैं जिन्हें फास्ट-ट्रैक अदालतों में स्थानांतरित किया जाएगा।
क्या यह कानून केवल नीट पर लागू होगा या अन्य परीक्षाओं पर भी?
यह कानून केवल नीट तक सीमित नहीं है — UPSC, SSC, RRB, IBPS और NTA द्वारा आयोजित सभी प्रवेश व भर्ती परीक्षाओं से जुड़े पेपर लीक के मामले भी इसके दायरे में आएंगे। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों की भर्ती परीक्षाएँ भी इसमें शामिल हैं।
PM मोदी ने नीट लीक पर क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि 'हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है' और जो लोग युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। इसी पोस्ट में उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की।
राष्ट्र प्रेस
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