नीट पेपर लीक: चार राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट, पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत होगी कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में 23 जुलाई को केंद्र सरकार ने नीट पेपर लीक मामले में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए चार राज्यों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने दोषियों को कड़ी सजा दिलाने का संकल्प जताया था।
किन अदालतों के अधिकार क्षेत्र में बनेंगी विशेष अदालतें
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, बॉम्बे, कलकत्ता, दिल्ली और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में प्राथमिकता के आधार पर चार फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित किए जा रहे हैं। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाईकोर्ट के दायरे में आते हैं। केंद्र सरकार इन राज्यों और संबंधित उच्च न्यायालयों से विशेष अदालतें बनाने का औपचारिक अनुरोध करने वाली है, ताकि प्रतिदिन सुनवाई हो सके और मामलों का शीघ्र निपटारा संभव हो।
पब्लिक एग्जामिनेशन एक्ट 2024 के तहत कार्रवाई
आरोपियों पर पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 — जिसे 'एंटी-चीटिंग कानून' भी कहा जा रहा है — के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि इस कानून के अंतर्गत दोषी पाए जाने पर पाँच साल की कैद और ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब तक नीट लीक से जुड़े इस कानून के तहत चार एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
नीट और एनटीए का दायरा
नेशनल एलिजिबिलिटी एंट्रेंस टेस्ट (नीट) नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित की जाती है। चूँकि यह एक सार्वजनिक परीक्षा है, इससे जुड़े पेपर लीक और अनुचित साधनों के सभी मामले नए कानून के दायरे में आएंगे। सूत्रों के मुताबिक, नया कानून UPSC, SSC, RRB, IBPS, केंद्र सरकार के मंत्रालयों-विभागों की भर्ती परीक्षाओं और NTA द्वारा आयोजित समस्त प्रवेश परीक्षाओं पर भी लागू होगा — यानी यह एक व्यापक ढाँचा है जो भविष्य के पेपर लीक मामलों को भी कवर करेगा।
PM मोदी का एक्स पर संदेश
इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश के युवाओं के प्रति सरकार की चिंता व्यक्त की। उन्होंने लिखा, 'हमारे युवाओं के कल्याण और भविष्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ भी नहीं है। जो लोग हमारे युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुँचाने की कोशिश करेंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।' इसी पोस्ट में उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की थी।
आगे क्या होगा
फिलहाल उच्च न्यायालयों में लगभग चार मामले लंबित हैं, जिन्हें नई विशेष अदालतों में स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों मेडिकल अभ्यर्थी और उनके परिवार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि नीट पेपर लीक विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा नियामक तंत्र की जवाबदेही पर बहस को नई धार दी है। विशेष अदालतों के गठन से यह स्पष्ट होगा कि सरकार मामले को कितनी गति से आगे बढ़ाती है।