नीट पेपर लीक: कोटा के छात्रों ने फास्ट ट्रैक कोर्ट का स्वागत किया, बोले- सजा नहीं, सिस्टम सुधार चाहिए
सारांश
मुख्य बातें
कोटा के नीट-उत्तीर्ण छात्रों और उनके अभिभावकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस घोषणा का स्वागत किया है जिसमें पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने और दोषियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। हालाँकि, छात्रों का एकमत स्वर यह है कि केवल दोषियों को दंडित करना पर्याप्त नहीं — परीक्षा प्रणाली को इतना अभेद्य बनाया जाए कि भविष्य में पेपर लीक की नौबत ही न आए।
मेधावी छात्रों पर सबसे गहरी चोट
नीट में ऑल इंडिया रैंक 16 हासिल करने वाले कार्तिक चौधरी ने बताया कि पेपर लीक का सर्वाधिक नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ता है जो वास्तविक मेहनत के बल पर आगे बढ़ते हैं। री-नीट की घोषणा के बाद उन्होंने पूरे एक महीने पहले से भी अधिक परिश्रम किया। उन्होंने कहा, 'फास्ट ट्रैक कोर्ट का निर्णय महत्वपूर्ण है, यह कदम पहले भी उठाया जा सकता था, लेकिन अब दोषियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा मिलनी चाहिए।' उनका यह भी कहना था कि यह मुद्दा अब काफी हद तक राजनीतिक रंग ले चुका है, जबकि इसे शिक्षा सुधार के दायरे में ही रहना चाहिए।
री-नीट का मानसिक दबाव: छात्रों की ज़ुबानी
पहले नीट में 696 अंक और री-नीट में 667 अंक पाने वाले हार्दिक मिकजानी ने बताया कि री-एग्जाम का वह एक महीना उनके जीवन का सबसे कठिन दौर था। केवल दो सप्ताह में पूरे सिलेबस को दोबारा उसी गहराई से तैयार करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। हार्दिक ने स्पष्ट कहा कि केवल सजा देना असली समाधान नहीं — असली चुनौती पेपर लीक होने से पहले ऐसी घटनाओं को रोकना है। उन्होंने जोड़ा, 'सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की बात कही थी, इसलिए परीक्षा प्रणाली में भी इसे पूरी तरह लागू किया जाए।'
एक अन्य छात्रा, जिन्होंने पहले नीट में 665 अंक और री-नीट में 601 अंक प्राप्त किए — यानी 64 अंकों की गिरावट — ने बताया कि री-नीट के लिए मिले 40-45 दिनों में से लगभग 10-15 दिन केवल मानसिक रूप से पुनः तैयारी के माहौल में लौटने में निकल गए। उन्होंने कहा कि यदि निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था नहीं बनी तो प्रतिभाशाली छात्र विदेशों का रुख करने लगेंगे।
अभिभावकों की माँग: प्रणाली बदलो, सिर्फ सजा नहीं
छात्र कार्तिक के पिता सुरेंद्र चौधरी ने कहा कि परीक्षा प्रणाली को ऐसे विकसित किया जाए कि पेपर लीक पूरी तरह रुक जाए। उनके अनुसार पेपर लीक से केवल छात्र नहीं, उनके परिजन भी वर्षों की मेहनत पर पानी फिरते देख गहरी निराशा में डूब जाते हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन पर कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन होना चाहिए, परंतु आंदोलन हिंसक या उग्र नहीं होना चाहिए।
सीबीटी मोड और सुरक्षा व्यवस्था पर ज़ोर
उक्त छात्रा ने अगले वर्ष से नीट को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराए जाने के प्रस्ताव को सकारात्मक कदम बताया। उनका तर्क था कि इससे परीक्षा की दक्षता बढ़ेगी और पेपर लीक की आशंका भी घटेगी। साथ ही उन्होंने माँग की कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और देश के सर्वश्रेष्ठ न्यायविदों को ऐसे मामलों में लगाया जाए, क्योंकि यह देश के युवाओं का भविष्य तय करने वाला विषय है।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद ने पूरे देश में परीक्षा सुधार की बहस को नई धार दी है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी की आशंकाओं ने लाखों छात्रों को मानसिक संकट में डाला हो। फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा से न्याय की प्रक्रिया में तेज़ी की उम्मीद जगी है, लेकिन छात्रों और अभिभावकों की असली कसौटी यह होगी कि सरकार परीक्षा प्रणाली में ढाँचागत बदलाव कब और कैसे लाती है।