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नीट-यूजी पेपर लीक विवाद: सफल छात्रों ने कहा — 'PM मोदी जिम्मेदार नहीं, फास्ट-ट्रैक कोर्ट सही फैसला'

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नीट-यूजी पेपर लीक विवाद: सफल छात्रों ने कहा — 'PM मोदी जिम्मेदार नहीं, फास्ट-ट्रैक कोर्ट सही फैसला'

सारांश

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के शोर के बीच एक अलग आवाज़ भी उठी — सफल छात्रों की। हुबली से भोपाल तक, उत्तीर्ण परीक्षार्थियों ने PM मोदी को जिम्मेदार मानने से इनकार किया और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन को सही दिशा में उठाया गया कदम बताया।

मुख्य बातें

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच सफल छात्रों ने 24 जुलाई को केंद्र सरकार का समर्थन किया।
कर्नाटक की दानेश्वरी सलीमत ने कहा — 'PM मोदी पेपर लीक के लिए किसी भी तरह जिम्मेदार नहीं।' भोपाल के छात्र प्रभात ( 390 अंक ) और प्रियांश कुशवाहा ( 410 अंक ) ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन को सराहा।
छात्रों ने बताया कि नीट के लिए 2-3 साल की तैयारी करने के बाद पेपर लीक की खबर से कई परीक्षार्थी अवसाद में चले गए।
पुनर्परीक्षा के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है; सफल छात्रों को कोर्स आवंटन की उम्मीद है।

नीट-यूजी पेपर लीक को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शनों के बीच परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले कई छात्रों ने 24 जुलाई को केंद्र सरकार के प्रति समर्थन जताया। छात्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेपर लीक के लिए किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं हैं, और यह पहला मौका है जब परीक्षा में धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई की गई है।

कर्नाटक की छात्रा का बयान

कर्नाटक के हुबली की छात्रा दानेश्वरी सलीमत ने कहा, 'मैंने नीट परीक्षा पास की और अच्छी रैंक हासिल की। पहली परीक्षा में प्रश्न पत्र लीक होने की समस्या अवश्य हुई थी, लेकिन दोबारा आयोजित परीक्षा में कोई दिक्कत नहीं रही। काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है और अच्छा कोर्स मिलने की संभावना है।'

उन्होंने आगे कहा, 'कुछ लोग नीट परीक्षा में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए विरोध कर रहे हैं, लेकिन हमें व्यक्तिगत रूप से कोई परेशानी नहीं हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। विपक्षी दल भी सरकार पर जो आरोप लगा रहे हैं, वह सच से बहुत दूर है।'

भोपाल के छात्रों ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट का किया स्वागत

भोपाल के छात्र प्रभात ने कहा, 'मुझे इस वर्ष नीट में 390 अंक मिले। सरकार का फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का फैसला काफी सराहनीय है। बहुत से छात्र नीट के लिए दो से तीन साल की कठिन तैयारी करते हैं। जब परिणाम अपेक्षा के अनुरूप नहीं आता, तो वे अवसाद में चले जाते हैं। फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए पेपर लीक मामलों में त्वरित सजा सुनिश्चित होगी और भविष्य की परीक्षाएँ भी सुचारु रूप से संपन्न हो सकेंगी।'

छात्र प्रियांश कुशवाहा ने बताया, 'इस साल की नीट परीक्षा में मेरे 410 अंक आए। पहली परीक्षा के बाद जब पेपर लीक और पुनर्परीक्षा की खबर आई, तो बहुत से छात्रों को गहरा सदमा लगा। कई बच्चे दोबारा परीक्षा की तैयारी करने की मानसिक स्थिति में भी नहीं थे। पेपर लीक होना बेहद गलत था, लेकिन इसके लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्णय सही दिशा में उठाया गया कदम है।'

छात्राओं की प्रतिक्रिया

छात्रा प्रियांशी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन को सरकार का 'बिल्कुल सही फैसला' बताया। उनके अनुसार, इससे पेपर लीक मामलों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित होगी और दोषियों को जल्द सजा मिल सकेगी, जो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाने में सहायक होगी।

विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 की पहली परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र लीक होने के आरोप सामने आए थे, जिसके बाद देशभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। केंद्र सरकार ने पुनर्परीक्षा आयोजित की और पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहे हैं और शिक्षा मंत्रालय पर जवाबदेही की माँग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन की प्रक्रिया और काउंसलिंग के नतीजे इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनके लिए व्यवस्था काम कर रही है। लेकिन असली सवाल उन लाखों परीक्षार्थियों का है जो पहली परीक्षा के बाद मानसिक रूप से टूट गए और दोबारा तैयारी नहीं कर सके। फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा दंड-प्रक्रिया को तेज़ कर सकती है, लेकिन परीक्षा की संरचनागत खामियों — जैसे केंद्रीकृत प्रश्न पत्र वितरण और निगरानी तंत्र की विफलता — का समाधान इससे नहीं होगा। जब तक जड़ पर कार्रवाई नहीं होती, हर लीक के बाद फास्ट-ट्रैक कोर्ट की माँग एक चक्र बनती रहेगी।
RashtraPress
24 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी पेपर लीक विवाद क्या है?
नीट-यूजी 2024 की पहली परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र लीक होने के आरोप सामने आए, जिसके चलते देशभर में विरोध प्रदर्शन हुए और सरकार को पुनर्परीक्षा आयोजित करनी पड़ी। इस विवाद ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर व्यापक बहस छेड़ दी है।
सफल छात्रों ने PM मोदी के बारे में क्या कहा?
हुबली की छात्रा दानेश्वरी सलीमत सहित कई सफल परीक्षार्थियों ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पेपर लीक के लिए जिम्मेदार नहीं हैं। उनका कहना है कि पहली बार दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की गई है।
नीट पेपर लीक मामले में फास्ट-ट्रैक कोर्ट क्या होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने की घोषणा की है। इसका उद्देश्य दोषियों को शीघ्र सजा दिलाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगाना है।
नीट पुनर्परीक्षा के बाद काउंसलिंग की स्थिति क्या है?
पुनर्परीक्षा संपन्न होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सफल छात्रों को काउंसलिंग के लिए बुलाया गया है और उन्हें अच्छे कोर्स मिलने की उम्मीद है।
पेपर लीक से छात्रों पर क्या असर पड़ा?
भोपाल के छात्र प्रियांश कुशवाहा के अनुसार, पहली परीक्षा के बाद पेपर लीक और पुनर्परीक्षा की खबर से बहुत से छात्रों को गहरा सदमा लगा। कई बच्चे 2-3 साल की तैयारी के बाद मानसिक रूप से इतने प्रभावित हुए कि वे दोबारा परीक्षा देने की स्थिति में नहीं थे।
राष्ट्र प्रेस
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