नीट पेपर लीक: टीडीपी सांसद टेनेटी बोले — इतिहास में पहली बार इतनी तेज़ री-एग्जाम और दोषियों पर कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के सांसद कृष्णा प्रसाद टेनेटी ने 24 जुलाई को केंद्र सरकार की नीट पेपर लीक मामले में की गई कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि भारत के इतिहास में यह पहली बार है जब किसी बड़े पेपर लीक के बाद इतनी तेज़ी से दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, परिणाम घोषित किए गए और दोषियों के विरुद्ध कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई। नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने सरकार के त्वरित निर्णयों को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
री-एग्जाम और परिणाम: क्या रहे आँकड़े
टेनेटी ने बताया कि इस बार दोबारा परीक्षा में करीब 20 लाख छात्रों ने भाग लिया, जिनमें से 11 लाख — यानी लगभग 55 प्रतिशत — अभ्यर्थी सफल हुए। उन्होंने कहा कि इतने कम समय में री-एग्जामिनेशन, परीक्षा संचालन और परिणाम घोषित करना अपने आप में एक उल्लेखनीय प्रशासनिक उपलब्धि है। सफल छात्र इस समय प्रवेश प्रक्रिया में व्यस्त हैं, जबकि जो सफल नहीं हो सके, वे अगली परीक्षा की तैयारी में जुट गए हैं।
सांसद ने यह भी रेखांकित किया कि मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में पहले भी कई बार पेपर लीक की घटनाएँ सामने आई हैं, लेकिन उन मामलों में कार्रवाई बेहद धीमी रही। उनके अनुसार इस बार सरकार ने तुरंत निर्णय लेते हुए पूरी प्रक्रिया को लीक-प्रूफ बनाने का प्रयास किया।
जंतर-मंतर हिंसा पर सवाल
जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए टेनेटी ने कहा कि यदि प्रदर्शन वास्तव में छात्रों का था, तो उसमें हिंसा कैसे हुई? उन्होंने कहा, 'भारत के छात्र पढ़ाई करने वाले होते हैं और सामान्यतः हिंसा का रास्ता नहीं अपनाते।' उन्होंने यह जाँच का विषय बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक किसने बनाया। पहले ही दिन 118 पुलिसकर्मी घायल हुए और मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया गया।
टेनेटी ने कहा कि जब किसी आंदोलन की सफलता का श्रेय लेने की बात आती है तो राजनीतिक दल और छात्र संगठन आगे आते हैं, लेकिन हिंसा करने वाले लोग कभी सामने नहीं आते। इस पूरे मामले की सच्चाई जाँच के बाद ही उजागर होगी।
सरकार की कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट
सांसद ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की घोषणा की है। जाँच एजेंसियों ने आरोपियों की पहचान कर ली है और गिरफ्तारियाँ भी शुरू हो चुकी हैं। अपने प्रशासनिक अनुभव का हवाला देते हुए टेनेटी ने बताया कि वे 35 वर्षों तक आईपीएस अधिकारी रहे हैं और 2013 में एक पेपर लीक मामले की जाँच भी कर चुके हैं। उनका दावा है कि इस बार की कार्रवाई देश के इतिहास में सबसे तेज़ और निर्णायक रही है।
राजनीतिक बयानबाज़ी पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के उस दावे पर — कि सोनम वांगचुक ने सरकार से किसी समझौते के बाद अपना अनशन समाप्त किया — टेनेटी ने कहा कि राजनीति में दल समय-समय पर अलग-अलग बयान और आरोप लगाते रहते हैं। उन्होंने इसे 'केवल राजनीतिक बयानबाज़ी' करार देते हुए कहा कि वास्तविक तथ्य जाँच पूरी होने के बाद ही सामने आएँगे और किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले जाँच के नतीजों का इंतज़ार किया जाना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट पेपर लीक विवाद को लेकर संसद से लेकर सड़क तक राजनीतिक बहस जारी है और सर्वोच्च न्यायालय भी मामले की निगरानी कर रहा है। आने वाले हफ्तों में फास्ट-ट्रैक कोर्ट की कार्यवाही और जाँच रिपोर्ट से तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।