नीट पेपर लीक पर सांसद पप्पू यादव का हमला: '30 साल की सजा का लाऊंगा संशोधन'
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने 16 मई को नई दिल्ली में नीट पेपर लीक मामले, रॉबर्ट वाड्रा की जमानत, पेट्रोल-डीजल मूल्यवृद्धि और चुनाव आयोग के मतदान आँकड़ों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। सांसद ने सवाल उठाया कि जो सरकार परीक्षा का पेपर लीक होने से नहीं रोक सकती, वह देश कैसे चलाएगी।
नीट पेपर लीक पर कड़ा रुख
नीट परीक्षा में बार-बार हो रहे पेपर लीक पर सांसद पप्पू यादव ने कहा, 'अब तक 123 बार गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं और सीबीआई ने सात बार जाँच की, सजाएँ भी सुनाई गईं — लेकिन नाममात्र का जुर्माना और कागजों पर 10 साल की सजा। क्या आज तक किसी को वास्तव में सजा मिली है?' उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ आरोपी जेल से ही परीक्षा प्रश्नपत्र लीक करा रहे हैं और जेल से ही चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं।
यादव ने कहा कि जो व्यक्ति 200-300 करोड़ रुपये कमाता है, उसे कुछ महीने जेल में बिताने की भी परवाह नहीं, क्योंकि उसे पता है कि चार्जशीट ठीक से दाखिल नहीं होगी और अंततः रिहाई मिल जाएगी।
छात्रों के भविष्य पर सवाल
सांसद ने कहा कि डेढ़ से दो करोड़ छात्रों का भविष्य दाँव पर है। उन्होंने पूछा कि पिछली बार नीट परीक्षा रद्द क्यों नहीं की गई — और इसका कारण यह बताया कि कथित तौर पर नेताओं और अधिकारियों के बच्चे उस परीक्षा में शामिल थे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक ही बार में कितने छात्रों ने 720 में से 720 अंक प्राप्त किए।
संसद में संशोधन लाने की घोषणा
पप्पू यादव ने ऐलान किया कि जून में लोकसभा सत्र शुरू होने पर वे एक संशोधन प्रस्ताव लाएँगे, जिसमें पेपर लीक जैसे अपराधों में शामिल प्रत्येक दोषी के लिए 30 साल की सजा का प्रावधान होगा। साथ ही, ऐसे लीक से हुई पूरी वित्तीय क्षति भी दोषियों से वसूल की जानी चाहिए।
रॉबर्ट वाड्रा की जमानत पर प्रतिक्रिया
2008 के जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली की अदालत द्वारा कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा को जमानत दिए जाने पर यादव ने कहा, 'न्याय की उम्मीद अब केवल सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय में बची है।' उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) वर्षों से वाड्रा के खिलाफ नारे लगाती रही, लेकिन ठोस सबूत सामने नहीं आए। उनके अनुसार, प्रियंका गांधी को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के लिए उनके परिवार को निशाना बनाया गया।
चुनाव आयोग के आँकड़ों पर आरोप
चुनाव आयोग ने दावा किया है कि पश्चिम बंगाल में विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदान प्रतिशत और वोटों की संख्या दोनों में वृद्धि हुई है। इस पर यादव ने कहा कि यह 'सरासर धोखाधड़ी' और 'आँकड़ों में हेराफेरी' है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब SIR के बाद मतदाता सूची से 5 लाख वोट काटे गए, तो 92 फीसदी मतदान का दावा कैसे सही हो सकता है। उनके अनुसार वास्तविक मतदान 40-50 फीसदी के आसपास ही रहा होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव आयोग देश को 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' की दिशा में धकेल रहा है और स्थिति चिंताजनक है।
यह ऐसे समय में आया है जब नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन चुकी हैं। आने वाले लोकसभा सत्र में इस मुद्दे पर संसद में गरमागरम बहस की संभावना है।