23 जुलाई 2026
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नीट पेपर लीक पर JDU प्रवक्ता नीरज कुमार: दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, छात्रों पर राजनीति बंद हो

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नीट पेपर लीक पर JDU प्रवक्ता नीरज कुमार: दोषी बख्शे नहीं जाएंगे, छात्रों पर राजनीति बंद हो

सारांश

नीट पेपर लीक पर JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने साफ कहा — दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, फास्ट-ट्रैक कोर्ट पर भरोसा रखें। साथ ही चेतावनी दी कि छात्रों को हिंसा की ओर उकसाना राजनीति का गंभीर अपराध है। संसद में व्यापक बहस और परीक्षा प्रणाली में ठोस सुधार की माँग।

मुख्य बातें

JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने 23 जुलाई को पटना में नीट पेपर लीक, छात्र आंदोलन और वक्फ पोर्टल समेत कई मुद्दों पर प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि सरकार ने नीट में गलती स्वीकार की है और फास्ट-ट्रैक कोर्ट के ज़रिए दोषियों पर कार्रवाई होगी।
छात्र आंदोलन के राजनीतिकरण पर चेतावनी — हिंसा की राह पर जाने वाले छात्र का करियर बर्बाद हो सकता है।
जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से इनकार को उन्होंने संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप बताया।
शरद पवार और सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर टिप्पणी से परहेज़ किया।
'उम्मीद' पोर्टल पर कहा — यदि वक्फ और अल्पसंख्यक संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन के लिए है, तो स्वागत योग्य।

जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने 23 जुलाई को पटना में नीट पेपर लीक विवाद, छात्र आंदोलनों के राजनीतिकरण, वक्फ संपत्तियों से जुड़े 'उम्मीद' पोर्टल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) प्रमुख शरद पवार व सांसद सुप्रिया सुले की मुलाकात समेत कई अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि छात्रों के भविष्य से जुड़े सवालों पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ठोस विमर्श होना चाहिए और दोषियों को किसी भी कीमत पर नहीं बख्शा जाना चाहिए।

नीट पेपर लीक: सरकार की जवाबदेही और फास्ट-ट्रैक कोर्ट

नीरज कुमार ने कहा कि सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि नीट पेपर लीक मामले में गलती हुई। देश के करोड़ों छात्र, उनके अभिभावक और आम जनता यह उम्मीद रखते हैं कि दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फास्ट-ट्रैक कोर्ट गठित करने के संकेत का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पर भरोसा किया जाना चाहिए।

उनके अनुसार, इस पूरे मसले पर संसद में व्यापक और सार्थक बहस होनी चाहिए। विपक्ष को चर्चा से बचने के बजाय परीक्षा प्रणाली में सुधार के ठोस सुझाव सामने रखने चाहिए। साथ ही, विभिन्न राज्यों में पूर्व में हुए प्रश्नपत्र लीक मामलों की भी समग्र समीक्षा होनी चाहिए।

कांग्रेस शासनकाल के लीक मामलों का संदर्भ

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) सरकारों के दौरान कथित तौर पर हुए प्रश्नपत्र लीक का उल्लेख करते हुए नीरज कुमार ने कहा कि उस दौर में पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विषय राजनीतिक नहीं, बल्कि छात्र-हित का है। उनके शब्दों में, 'छात्रों के कंधों पर बंदूक रखकर राजनीतिक एजेंडा तय नहीं किया जाना चाहिए।'

छात्र आंदोलन और राजनीतिकरण का सवाल

जेडीयू प्रवक्ता ने माना कि किसी भी बड़े आंदोलन का राजनीतिक स्वरूप लेना स्वाभाविक है, क्योंकि विपक्ष को इसमें एक बड़ा मुद्दा मिलता है। हालांकि, उन्होंने विपक्षी दलों से यह भी अपेक्षा जताई कि वे अपने शासनकाल की कमियों और चूकों को भी ईमानदारी से स्वीकार करें।

अभिनेता सलमान खान के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक और दल को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। लेकिन यदि किसी संवेदनशील मुद्दे को अत्यधिक भावनात्मक बनाकर छात्रों को हिंसा की ओर उकसाया जाता है, तो यह राजनीति का गंभीर अपराध है। उन्होंने चेतावनी दी कि हिंसा के रास्ते पर चलने वाले छात्र का पूरा करियर बर्बाद हो सकता है।

जंतर-मंतर लाठीचार्ज और न्यायपालिका की भूमिका

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तत्काल सुनवाई से इनकार किए जाने पर नीरज कुमार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उनके अनुसार, न्यायपालिका की अपनी संवैधानिक सीमाएँ हैं और यदि पुलिस अपना दायित्व निभा रही है, तो हर मामले में न्यायिक हस्तक्षेप की अपेक्षा उचित नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र लोक-लाज और संवैधानिक मर्यादाओं से संचालित होता है।

शरद पवार-मोदी मुलाकात और 'उम्मीद' पोर्टल

संसद परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से NCP प्रमुख शरद पवार और सांसद सुप्रिया सुले की मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर नीरज कुमार ने कहा कि इस पर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बैठक में देशहित, संसद की गरिमा, महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात और सार्वजनिक जीवन में बढ़ रही भाषाई कटुता जैसे विषयों पर चर्चा हुई होगी।

वक्फ संपत्तियों से जुड़े 'उम्मीद' पोर्टल पर उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी इसका विस्तृत अध्ययन नहीं किया है, इसलिए इसके स्वरूप पर तत्काल टिप्पणी उचित नहीं होगी। उन्होंने यह ज़रूर कहा कि यदि यह पोर्टल अल्पसंख्यक कल्याण कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन या वक्फ संपत्तियों के पारदर्शी प्रबंधन के लिए बनाया गया है, तो इसका स्वागत होना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि मठ-मंदिर और अन्य धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों के दुरुपयोग की शिकायतें भी समय-समय पर आती रही हैं, और पारदर्शी व्यवस्था समाज के व्यापक हित में होगी।

नीरज कुमार का यह बयान ऐसे समय में आया है जब नीट विवाद को लेकर संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह तनाव बना हुआ है और विपक्ष सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

पर विपक्ष भी दोषी है' वाला फ्रेम। हालांकि, फास्ट-ट्रैक कोर्ट की बात महीनों से चल रही है और अभी तक ठोस समयसीमा सामने नहीं आई है। छात्रों को 'हिंसा से बचने' की नसीहत देना उस वर्ग को असहज कर सकता है जो पहले से ही व्यवस्था से निराश है। 'उम्मीद' पोर्टल पर जानकारी न होने की बात स्वीकार करना ईमानदारी है, लेकिन यह भी दिखाता है कि गठबंधन के भीतर नीतिगत समन्वय की कमी है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने नीट पेपर लीक पर क्या कहा?
नीरज कुमार ने कहा कि सरकार ने नीट मामले में गलती स्वीकार की है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन पर भरोसा जताने की अपील की और संसद में व्यापक बहस की माँग की।
नीट विवाद पर विपक्ष की भूमिका के बारे में JDU का क्या मानना है?
JDU प्रवक्ता ने कहा कि विपक्ष को चर्चा से बचने के बजाय परीक्षा सुधार के ठोस सुझाव देने चाहिए। साथ ही उन्होंने विपक्ष से यह भी अपेक्षा जताई कि वह अपने शासनकाल में हुए प्रश्नपत्र लीक मामलों की जिम्मेदारी भी स्वीकार करे।
जंतर-मंतर लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट के रुख पर JDU की क्या राय है?
नीरज कुमार ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है और न्यायपालिका की संवैधानिक सीमाएँ होती हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के तत्काल सुनवाई से इनकार को लोकतांत्रिक मर्यादा के अनुरूप बताया।
शरद पवार और सुप्रिया सुले की PM मोदी से मुलाकात के बारे में JDU ने क्या कहा?
JDU प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस मुलाकात के राजनीतिक मायनों पर अनुमान लगाने से परहेज़ किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि बैठक में देशहित, संसद की गरिमा, महाराष्ट्र के हालात और भाषाई कटुता जैसे विषयों पर चर्चा हुई होगी।
'उम्मीद' पोर्टल क्या है और JDU का इस पर क्या रुख है?
'उम्मीद' पोर्टल वक्फ संपत्तियों और अल्पसंख्यक कल्याण से जुड़ा एक डिजिटल मंच बताया जा रहा है। नीरज कुमार ने कहा कि उन्होंने इसका विस्तृत अध्ययन नहीं किया है, लेकिन यदि यह पारदर्शी प्रबंधन के लिए है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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