NEET पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट नाकाफी, व्यवस्था सुधार जरूरी — सीजेपी प्रवक्ता
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 23 जुलाई — नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर फास्ट ट्रैक कोर्ट गठन और दोषियों को त्वरित सख्त सजा देने की घोषणा की। इस पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि असली सवाल दंड का नहीं, बल्कि पेपर लीक की जड़ खत्म करने का है।
सीजेपी का रुख: सज़ा नहीं, व्यवस्था बदलो
रांका ने कहा कि पेपर लीक इसलिए हो रहे हैं क्योंकि शीर्ष से लेकर निचले स्तर तक सिस्टम में अक्षम लोग बैठे हैं। उनके अनुसार, जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, दोषियों में भय नहीं होगा और व्यवस्था को इस तरह सुदृढ़ नहीं किया जाएगा कि लीक की गुंजाइश ही न रहे, तब तक यह समस्या बनी रहेगी।
उन्होंने प्रधानमंत्री के एक्स पोस्ट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'आपने चोट लगने के बाद मरहम लगाने की बात की है, जबकि हमारी लड़ाई यह है कि चोट लग ही क्यों रही है।' रांका का मानना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थायी समाधान नहीं है — देश में पहले भी ऐसे कोर्ट बनाए गए, लेकिन मूल खामियाँ दूर नहीं हुईं।
संगठित गिरोह का आरोप
रांका ने आरोप लगाया कि पेपर लीक किसी एकल व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह के जरिए होता है जिसमें कई स्तरों पर लोग शामिल होते हैं और आर्थिक लाभ पहुँचता है। उन्होंने कहा कि केवल कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को बदलना जरूरी है जो लीक की जमीन तैयार करती है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं की जड़ अक्षमता और भ्रष्टाचार में बताई और कहा कि इसकी जिम्मेदारी शिक्षा मंत्रालय तक जाती है। उनकी माँग है कि जब तक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, आंदोलन जारी रहेगा।
जंतर-मंतर पर छात्रों की आवाज़
जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने भी प्रधानमंत्री के बयान को नाकाफी बताया। एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि देश के लाखों युवा सड़क पर हैं, लेकिन उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा, 'हम शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं। हमें मजबूर न किया जाए कि आंदोलन का रास्ता बदलना पड़े।'
एक अन्य छात्र ने बताया कि संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ। उनकी माँग है कि सरकार मुद्दे को दबाने की बजाय स्थायी समाधान निकाले।
सरकार से कार्रवाई की माँग
कई प्रदर्शनकारियों ने एकमत से कहा कि सोशल मीडिया पोस्ट से समस्या हल नहीं होगी — जमीन पर ठोस कदम चाहिए। एक युवक ने कहा कि वह पहले प्रधानमंत्री मोदी का समर्थक रहा है, लेकिन मौजूदा हालात देखकर वह प्रदर्शन में शामिल होने आया। उन्होंने नेताओं से सीधी बातचीत और माँगों पर कार्रवाई का भरोसा माँगा।
एक प्रदर्शनकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'हम यहाँ सिर्फ शब्द सुनने के लिए नहीं बैठे हैं। हम कार्रवाई देखना चाहते हैं। जब तक ठोस कदम नजर नहीं आएंगे, तब तक संतुष्टि की बात करना मुश्किल है।' आने वाले दिनों में यह आंदोलन और व्यापक रूप लेने की संभावना है यदि सरकार की ओर से ठोस प्रतिक्रिया नहीं आती।