पेपर लीक पर PM मोदी के फास्ट-ट्रैक कोर्ट पोस्ट पर विपक्ष का पलटवार, प्रियंका बोलीं — 'बच्चों का सिस्टम से भरोसा उठ गया'
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर पेपर लीक मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की, जिसके तुरंत बाद विपक्षी दलों की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) समेत कई दलों के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महज एक सोशल मीडिया पोस्ट से छात्रों की पीड़ा का समाधान नहीं होगा।
प्रियंका गांधी की सीधी चेतावनी
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, 'ये तो वैसी ही बात है कि बच्चों का कुछ और कहना है और आप (पीएम) कुछ और कह रहे हैं। नेताओं के नेतृत्व दिखाने का समय आ गया है, वे नेतृत्व दिखाएं। बच्चों की बातें सुनें। बच्चों की स्पष्ट मांगें हैं कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें और जिन्होंने मारा-पीटा है उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।' उन्होंने आगे कहा कि बच्चों का सिस्टम में भरोसा टूट गया है और यदि सरकार की ओर से कोई समाधान थोपा गया तो छात्र उसे स्वीकार नहीं करेंगे।
प्रियंका ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को पहले छात्रों की मांगें सुननी और पूरी करनी होंगी, तभी किसी वास्तविक समाधान की उम्मीद की जा सकती है।
कांग्रेस सांसदों का सरकार पर हमला
कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, 'आजकल कोई भी उनकी बातों पर यकीन नहीं करता। उनकी बातों का भरोसा पहले ही खत्म हो चुका है। सबसे पहले, उन्हें धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाना होगा। फिर उन्हें छात्रों से बात करनी होगी।' कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने कहा कि अब तक केवल एक्स पोस्ट आया है, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई — न कोई इस्तीफा, न लाठीचार्ज पर खेद और न ही राहुल गांधी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कोई प्रतिक्रिया।
सपा और JMM ने उठाए तीखे सवाल
समाजवादी पार्टी के सांसद आनंद भदौरिया ने कहा, 'क्या उस एक्स पोस्ट से उन छात्रों की मांगें पूरी होंगी जिन पर लाठीचार्ज हुआ, जो घायल हुए और जो इतने लंबे समय से जंतर-मंतर पर बैठे हैं? क्या बल प्रयोग से घायल हुए छात्रों की आंखों का दर्द ठीक हो पाएगा?' उन्होंने माँग की कि प्रधानमंत्री को संसद सत्र में स्वयं सदन में आकर युवाओं से संवाद करना चाहिए था।
JMM सांसद महुआ माजी ने कहा, 'आखिरकार, इतने दिनों बाद सरकार की नींद खुली है। 22 दिनों तक जब छात्र जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे और सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, तब सरकार बहरी और खामोश क्यों बनी रही? इस आंदोलन को बढ़ने देने में सरकार की बड़ी भूमिका रही है और अब वह दमनकारी रवैया अपना रही है।'
पृष्ठभूमि: क्यों भड़का है छात्र आक्रोश
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पेपर लीक को लेकर छात्रों का गुस्सा चरम पर है। जंतर-मंतर पर 22 दिनों से जारी प्रदर्शन में हजारों छात्र शामिल हैं, जिनकी प्रमुख मांगें हैं — शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, लाठीचार्ज के जिम्मेदारों पर कार्रवाई और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता। गौरतलब है कि विपक्ष की यह एकजुट प्रतिक्रिया संसद सत्र के दौरान सरकार पर दबाव और बढ़ा सकती है।
आगे क्या होगा
विपक्ष की माँग है कि सरकार केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस कदम उठाए। फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन की समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है। छात्र संगठनों ने संकेत दिया है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा।