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पेपर लीक विधेयक पर कांग्रेस कर रही राजनीति, छात्रों ने PM मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा: राजेंद्र सिंह राठौड़

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पेपर लीक विधेयक पर कांग्रेस कर रही राजनीति, छात्रों ने PM मोदी के नेतृत्व पर जताया भरोसा: राजेंद्र सिंह राठौड़

सारांश

संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर BJP और कांग्रेस आमने-सामने हैं। BJP के राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कांग्रेस पर छात्र आंदोलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष के टीकाराम जूली ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में हुए पेपर लीक पर सरकार से जवाब माँगा।

मुख्य बातें

BJP नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने 28 जुलाई को कहा कि कांग्रेस ने पेपर लीक आंदोलन का राजनीतिक इस्तेमाल करने की कोशिश की।
राठौड़ के अनुसार, छात्रों ने PM मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए स्वेच्छा से आंदोलन वापस लिया।
पेपर लीक विरोधी विधेयक में कड़ी सजा, भारी जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के प्रावधान शामिल हैं।
विपक्ष नेता टीकाराम जूली ने धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में पेपर लीक रोकने में विफलता पर सरकार से जवाब माँगा।
BJP सांसद कंगना रनौत की 'जेन-जी' प्रदर्शन पर टिप्पणी को लेकर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने 28 जुलाई को जयपुर में कहा कि संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पर विपक्ष द्वारा किया गया हंगामा राजनीति से प्रेरित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए अपना आंदोलन स्वयं वापस लिया, जबकि कांग्रेस इस आंदोलन को अपने राजनीतिक हितों के लिए भुनाने की कोशिश करती रही।

राठौड़ का कांग्रेस पर सीधा आरोप

राठौड़ ने कहा, 'कांग्रेस ने पेपर लीक के मुद्दे और छात्रों के विरोध-प्रदर्शन का इस्तेमाल अपने राजनीतिक फायदे के लिए करने की कोशिश की और छात्रों के आंदोलन में शामिल होने की कोशिश की।' उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को विश्वास था कि एक कड़ा कानून बनाया जाएगा और व्यवस्था में सुधार होगा, इसीलिए उन्होंने स्वेच्छा से अपना प्रदर्शन समाप्त किया।

राठौड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'ऐसा लगता है कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लगता है कि शोर-शराबा और हंगामा करने से उनकी लोकप्रियता बढ़ेगी।' उन्होंने विधेयक की विशेषताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि इसमें कड़ी सजा, भारी जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं।

विपक्ष की पलटवार — टीकाराम जूली का BJP पर हमला

वहीं, विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने BJP सरकार पर जवाबी हमला बोला। उन्होंने कहा, 'भाजपा की विचारधारा सबके सामने आ रही है। भले ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया हो, लेकिन भाजपा अभी भी पूरी तरह से उनके पक्ष में बात कर रही है।' जूली ने तर्क दिया कि धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में पेपर लीक होते रहे और उन्हें इसी विफलता के कारण पद से हटाया गया।

जूली ने सरकार से सीधे जवाब माँगते हुए कहा, 'भाजपा सरकार एक तरफ बच्चों से समझौता कर रही है और उनकी मांगें मान रही है और दूसरी तरफ धर्मेंद्र प्रधान का महिमामंडन किया जा रहा है। धर्मेंद्र प्रधान का काम इतना अच्छा था, तो पेपर लीक क्यों हुए? इस पर सरकार जवाब दे।'

कंगना रनौत की टिप्पणी पर विवाद

BJP सांसद कंगना रनौत की 'जेन-जी' विरोध प्रदर्शन को लेकर की गई टिप्पणी पर भी जूली ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'कंगना रनौत ने कहा है कि यह विरोध प्रदर्शन घिनौना था, यह विरोध प्रदर्शन गलत था।' जूली ने पलटकर पूछा कि क्या यह उचित था कि जिन छात्रों ने आवाज़ उठाई, उनमें से कुछ ने आत्महत्या कर ली — और इस पर कंगना ने एक शब्द भी नहीं कहा।

पेपर लीक विधेयक की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि देशभर में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं ने लाखों छात्रों को प्रभावित किया है, जिसके बाद सरकार ने संसद में यह विधेयक पेश किया। यह ऐसे समय में आया है जब NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर देशव्यापी आक्रोश चरम पर था। विधेयक में फास्ट ट्रैक सुनवाई और कड़े罚 दंड के प्रावधान इस आक्रोश की प्रत्यक्ष प्रतिक्रिया माने जा रहे हैं।

यह विधेयक संसद में पारित होता है या नहीं, यह विपक्ष के सहयोग पर निर्भर करेगा — और दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह दौर बताता है कि राजनीतिक सहमति अभी दूर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह दर्शाता है कि दोनों पक्ष समस्या से ज़्यादा उसके राजनीतिक लाभ में रुचि रखते हैं। BJP का यह तर्क कि छात्रों ने 'स्वेच्छा से' आंदोलन वापस लिया, आधा सच है — असल में सरकारी आश्वासन के बाद दबाव कम हुआ, न कि विश्वास से। विपक्ष का धर्मेंद्र प्रधान पर हमला वैध है, लेकिन विधेयक को रोकना उन्हीं छात्रों के हित में नहीं जिनकी वे वकालत करते हैं। असली जवाबदेही तब होगी जब फास्ट ट्रैक कोर्ट में पहली सज़ा सुनाई जाएगी — तब तक यह बहस महज़ माइक्रोफोन की लड़ाई है।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेपर लीक विरोधी विधेयक में क्या प्रावधान हैं?
विधेयक में कड़ी सजा, भारी जुर्माना और फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के प्रावधान शामिल हैं। यह विधेयक NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के बाद संसद में पेश किया गया।
राजेंद्र सिंह राठौड़ ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
BJP नेता राजेंद्र सिंह राठौड़ ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने छात्रों के पेपर लीक आंदोलन को अपने राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की। उनके अनुसार, विपक्ष कानून बनाने में सहयोग देने की बजाय संसद में हंगामा कर रहा है।
विपक्ष ने धर्मेंद्र प्रधान पर क्या सवाल उठाए?
विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते पेपर लीक होते रहे और उन्हें इसी कारण हटाया गया। जूली ने सवाल किया कि यदि उनका काम अच्छा था, तो पेपर लीक क्यों हुए।
कंगना रनौत की किस टिप्पणी पर विवाद हुआ?
BJP सांसद कंगना रनौत ने 'जेन-जी' के विरोध प्रदर्शन को 'घिनौना' और 'गलत' बताया। इस पर विपक्ष ने आपत्ति जताते हुए कहा कि कंगना ने पेपर लीक से पीड़ित छात्रों और आत्महत्या करने वाले बच्चों पर एक शब्द नहीं कहा।
छात्रों ने पेपर लीक आंदोलन क्यों वापस लिया?
BJP के अनुसार, छात्रों ने PM मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए आंदोलन समाप्त किया, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि कड़ा कानून बनाया जाएगा। सरकार ने इसके बाद संसद में पेपर लीक विरोधी विधेयक पेश किया।
राष्ट्र प्रेस
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