धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे तक संसद में चर्चा नहीं — राहुल गांधी का माइक बंद करने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने 24 जुलाई को आरोप लगाया कि संसद में उनका माइक बंद कर उन्हें बोलने से रोका गया, जब वे केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बयान का जवाब देना चाहते थे। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से नहीं हटाया जाता, विपक्ष मॉनसून सत्र में किसी भी चर्चा में भाग नहीं लेगा।
विपक्ष की तीन प्रमुख मांगें
राहुल गांधी ने पत्रकारों से बात करते हुए छात्रों की तीन मांगें गिनाईं। पहली — केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल पद से हटाया जाए। दूसरी — छात्रों पर कथित कार्रवाई और हिंसा के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं। तीसरी — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
उन्होंने कहा कि संसदीय परंपरा के अनुसार यदि किसी सदस्य का नाम लिया जाए तो उसे जवाब देने का अधिकार होता है, परंतु उन्हें यह अधिकार नहीं दिया गया।
नीट पेपर लीक पर जवाबदेही की मांग
कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि विपक्ष नीट पेपर लीक मामले पर गंभीर बहस और ठोस जवाबदेही चाहता है। उन्होंने सरकार से पूछा कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर परीक्षा संपन्न होने तक पेपर लीक रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट केवल भवन नहीं होते — उनके लिए न्यायाधीश, कोर्ट मास्टर और अन्य स्टाफ की भी आवश्यकता होती है।
प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर सवाल
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने प्रधानमंत्री के वीडियो संदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट की मांग न छात्रों ने उठाई थी, न विपक्ष ने। उनके अनुसार सरकार उन मुद्दों पर बात कर रही है जिनकी मांग ही नहीं थी, जबकि शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई जैसी वास्तविक मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया।
कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन ने कहा कि नीट सहित अन्य परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं और छात्रों के विरुद्ध कथित हिंसा की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि सभी राजनीतिक दलों, छात्रों और सांसदों की यही राय है कि जवाबदेही तय होनी चाहिए।
पिछले १२ वर्षों में १५० से अधिक पेपर लीक का दावा
कांग्रेस सांसद हिबी ईडन ने प्रधानमंत्री से संसद में उपस्थित होकर विस्तृत बयान देने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि पिछले 12 वर्षों में विभिन्न परीक्षाओं में 150 से अधिक बार पेपर लीक की घटनाएं हुईं, लेकिन सरकार ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में जांच समिति बनाने का सुझाव पहले भी दिया जा चुका है, परंतु उस पर कोई कदम नहीं उठाया गया।
यह गतिरोध ऐसे समय में गहरा हो रहा है जब मॉनसून सत्र में नीट विवाद पर सार्थक संसदीय बहस की उम्मीद थी। देश के छात्र, अभिभावक और नागरिक समाज इस मुद्दे पर सरकार की जवाबदेही की प्रतीक्षा में हैं।