27 जुलाई 2026
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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्ति का आदेश दिया, 3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

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नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्ति का आदेश दिया, 3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

सारांश

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहली सुनवाई में CBI का कोई वकील नहीं आया — अदालत ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्ति का आदेश दिया और 13 में से दो आरोपियों की जमानत याचिका 3 अगस्त तक टाल दी। लाखों छात्रों का भविष्य दाँव पर है।

मुख्य बातें

राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में CBI के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया।
CBI की ओर से कोई वकील उपस्थित न होने के कारण दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई स्थगित।
अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को; सभी 13 आरोपी 6 अगस्त तक न्यायिक हिरासत में।
23 जुलाई 2026 को 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम-2024' के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित; सभी संबंधित मामले यहाँ स्थानांतरित होंगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर 28 जुलाई को सुनवाई का आदेश दिया; मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को अटल बताया।

नई दिल्ली की राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) का पक्ष रखने हेतु एक सरकारी अभियोजक (पब्लिक प्रॉसिक्यूटर) की नियुक्ति का निर्देश दिया है। कोर्ट ने साथ ही आरोपियों दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई 3 अगस्त 2026 तक के लिए स्थगित कर दी है।

मुख्य घटनाक्रम

यह फास्ट ट्रैक कोर्ट में इस मामले की पहली सुनवाई थी। कोर्ट ने संबंधित डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन को निर्देश दिया कि वे नीट-यूजी पेपर लीक प्रकरण में राज्य CBI की ओर से पैरवी के लिए एक अभियोजक तत्काल नियुक्त करें। उल्लेखनीय है कि इस सुनवाई में CBI की तरफ से कोई वकील कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते जमानत याचिका पर विचार संभव नहीं हो सका। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता एपी सिंह पेश हुए।

आरोपियों की स्थिति

दिनेश बिवाल और विकास बिवाल उन 13 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें CBI ने परीक्षा की निर्धारित तिथि से पूर्व नीट-यूजी प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। सभी आरोपी 6 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में हैं। इस मामले में 12 मई को एक सरकारी अधिकारी की शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई थी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन

23 जुलाई 2026 को राऊज एवेन्यू कोर्ट परिसर में 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम-2024' और इससे संबंधित अपराधों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया गया। इस अधिनियम से जुड़े सभी लंबित मामले अब इस विशेष अदालत में स्थानांतरित किए जाएँगे। यह कदम परीक्षा-धोखाधड़ी के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।

सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणियाँ

इसी बीच, जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर दायर याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। एक अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि पुलिस अधिकारियों को कथित तौर पर मारपीट का सामना करना पड़ा था। इस पर न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का जीवन महत्वपूर्ण है, चाहे वह किसी भी पद पर हो।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा, 'एक प्रोटोकॉल होना चाहिए। उचित स्थान होना चाहिए और कोई अनावश्यक प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। लेकिन यदि असामाजिक तत्व मौजूद हों, तो उनसे निपटा जा सकता है। यह केवल दिल्ली का नहीं, बल्कि राष्ट्रव्यापी प्रोटोकॉल की एकरूपता का प्रश्न है।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह संवैधानिक रूप से संरक्षित है और किसी आंदोलन की आड़ में पुलिस की अतिरिक्त बल-प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश दिया कि जंतर-मंतर से जुड़ी सभी याचिकाओं पर 28 जुलाई 2026 को सुनवाई होगी।

आगे क्या होगा

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को निर्धारित है, जिसमें दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई होने की संभावना है — बशर्ते CBI की ओर से अभियोजक उपस्थित हो। सभी 13 आरोपियों की न्यायिक हिरासत 6 अगस्त तक है, और इस मामले की प्रगति देश भर के लाखों मेडिकल प्रवेश परीक्षार्थियों की निगाह में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह अदालत में भी नहीं पहुँची। 'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम-2024' के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन एक सकारात्मक कदम है, लेकिन त्वरित न्याय तभी संभव है जब अभियोजन पक्ष भी उतनी ही तत्परता दिखाए। यह मामला केवल 13 आरोपियों तक सीमित नहीं — यह उस व्यापक तंत्र की परीक्षा है जो देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता की रक्षा करने में विफल रहा।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने क्या आदेश दिया?
राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 27 जुलाई 2026 को डायरेक्टर ऑफ प्रॉसिक्यूशन को निर्देश दिया कि वे CBI का पक्ष रखने के लिए एक पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करें। CBI की ओर से कोई वकील उपस्थित न होने के कारण यह आदेश जारी करना पड़ा।
दिनेश बिवाल और विकास बिवाल कौन हैं और उन पर क्या आरोप हैं?
दिनेश बिवाल और विकास बिवाल उन 13 आरोपियों में शामिल हैं जिन्हें CBI ने नीट-यूजी 2026 का प्रश्नपत्र परीक्षा तिथि से पहले कथित तौर पर लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।
नीट पेपर लीक मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले में अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को राऊज एवेन्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। सभी 13 आरोपी 6 अगस्त 2026 तक न्यायिक हिरासत में हैं।
'लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम-2024' के तहत फास्ट ट्रैक कोर्ट क्यों बनाई गई?
23 जुलाई 2026 को राऊज एवेन्यू कोर्ट परिसर में यह विशेष अदालत इसलिए गठित की गई ताकि परीक्षा-धोखाधड़ी के मामलों का त्वरित निपटारा हो सके। इस अधिनियम से जुड़े सभी मामले अब इसी फास्ट ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित किए जाएँगे।
सर्वोच्च न्यायालय ने जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई पर क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार पूरी तरह संवैधानिक रूप से गारंटीकृत है और किसी आंदोलन की आड़ में पुलिस की अतिरिक्त बल-प्रयोग को उचित नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने देशभर में विरोध-प्रदर्शन के लिए एकसमान प्रोटोकॉल की आवश्यकता भी रेखांकित की।
राष्ट्र प्रेस
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