नीट पेपर लीक 2026: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीटी मोड की मांग ठुकराई, तीन आरोपी 15 जून तक न्यायिक हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने 2 जून 2026 को नीट-यूजी 2026 की 21 जून को प्रस्तावित परीक्षा को कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मोड में कराने की मांग पर तत्काल कोई आदेश देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले की सुनवाई जुलाई में पेपर लीक से जुड़ी पहले से लंबित याचिकाओं के साथ की जाएगी। वहीं, दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पेपर लीक मामले के तीन आरोपियों को 15 जून 2026 तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर नीट-यूजी की पुनः परीक्षा सीबीटी मोड में कराने की मांग की थी। सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने स्पष्ट किया कि उनकी एकमात्र माँग परीक्षा को सीबीटी प्रारूप में आयोजित कराने की है। इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी की कि न्यायालय इससे पहले भी इसी प्रकार की याचिकाओं को अस्वीकार कर चुका है।
जब वकील ने पुनः अपनी दलील दोहराई, तो खंडपीठ ने संकेत दिया कि वह इस विषय पर तत्काल सुनवाई नहीं करेगी। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, 'हम इसे छुट्टियों के बाद देखेंगे।' इस प्रकार, 21 जून की परीक्षा से पहले राहत मिलने की संभावना प्रभावी रूप से समाप्त हो गई।
तीन आरोपी न्यायिक हिरासत में
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को तीनों आरोपियों — डॉक्टर मनोज शिरूरे, तेजस हर्षद कुमार शाह और मनीषा संजय हवलदार — की पुलिस हिरासत समाप्त होने पर उन्हें राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया। सीबीआई ने अदालत से तीनों को न्यायिक हिरासत में भेजने की माँग की, जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने 15 जून 2026 तक की न्यायिक हिरासत का आदेश दिया।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब नीट-यूजी 2025 के पेपर लीक विवाद की जाँच अभी भी जारी है। गौरतलब है कि नीट परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप पिछले कई वर्षों से लगातार सामने आ रहे हैं, और सर्वोच्च न्यायालय पहले भी इस मामले में कई याचिकाएँ सुन चुका है। सीबीटी मोड की माँग इस तर्क पर आधारित है कि डिजिटल प्रारूप में पेपर लीक की संभावना कम होती है।
आगे क्या होगा
21 जून 2026 को नीट-यूजी परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पेन-पेपर मोड में ही आयोजित होने की संभावना है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय ने जुलाई तक सुनवाई टाल दी है। पेपर लीक मामले में सीबीआई की जाँच जारी है और 15 जून को तीनों आरोपियों को पुनः अदालत में पेश किया जाएगा। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले पर देशभर की निगाहें टिकी हैं।