'श्री राम भूमि' का पहला शेड्यूल पूरा, अनुपम खेर बोले — 'अयोध्या अब मेरी आत्मा का हिस्सा है'
सारांश
मुख्य बातें
दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर ने आगामी फिल्म 'श्री राम भूमि' के पहले शूटिंग शेड्यूल को अयोध्या में सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 17 जुलाई 2026 को उन्होंने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें साझा करते हुए इस पावन नगरी में बिताए अनुभव को शब्दों में पिरोया। खेर ने लिखा कि अयोध्या से लौटते हुए ऐसा लग रहा है जैसे उनका एक हिस्सा वहीं छूट गया हो।
अयोध्या से भावुक विदाई
अनुपम खेर ने अपनी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, 'फिल्म 'श्री राम भूमि' के पहले शूटिंग शेड्यूल को पूरा करके अयोध्या से लौट रहा हूं, लेकिन सच कहूं तो ऐसा लग रहा है कि मेरा एक हिस्सा यहीं रह गया है। मैं अपने साथ सिर्फ खूबसूरत यादें ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म की गहरी समझ, आध्यात्मिक समृद्धि और इस बात का गर्व भी लेकर जा रहा हूं कि मैं ऐसी फिल्म का हिस्सा हूं, जो इतिहास और आस्था को पूरी ईमानदारी और सच्चाई के साथ पर्दे पर लाने की कोशिश कर रही है।'
उन्होंने अयोध्या के प्रति अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त करते हुए आगे लिखा, 'अयोध्या सिर्फ एक शहर नहीं है, यह एक अनुभूति है। यहां की हर गली, हर मोड़, हर घर, हर मंदिर और यहां की हर सांस में सिर्फ एक ही नाम गूंजता है — श्री राम।'
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन का असर
खेर ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन को अपने लिए एक परिवर्तनकारी अनुभव बताया। उन्होंने कहा, 'श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दर्शन, यहां के लोगों का स्नेह, और इस पावन भूमि की ऊर्जा ने मुझे एक अभिनेता ही नहीं, एक इंसान के रूप में भी और समृद्ध किया है। मुझे पूरा विश्वास है कि अयोध्या अब हमेशा मेरी आत्मा का हिस्सा रहेगी।'
टीम और अयोध्यावासियों का आभार
अनुपम खेर ने अपनी पोस्ट में अयोध्या के लोगों, संतों और फिल्म की पूरी यूनिट के प्रति हृदय से कृतज्ञता जताई। उन्होंने अपने मित्र यतीन्द्र और मंजरी मिश्रा को उनके प्रेम और आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही फिल्म के निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह और सिनेमैटोग्राफर असीम बजाज समेत पूरी यूनिट की सराहना की।
फिल्म और अनुपम खेर की भूमिका
'श्री राम भूमि' उत्तर प्रदेश के अयोध्या में निर्मित राम मंदिर और उससे जुड़े दशकों लंबे ऐतिहासिक घटनाक्रम पर आधारित है। इस फिल्म में अनुपम खेर, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के दिवंगत वरिष्ठ नेता अशोक सिंघल की भूमिका निभा रहे हैं, जिन्हें राम मंदिर आंदोलन के सबसे प्रमुख चेहरों में गिना जाता है। फिल्म में ऋत्विक भौमिक और अमृता खानविलकर भी अहम किरदारों में नज़र आएंगे। यह फिल्म आस्था, इतिहास और राष्ट्रीय स्मृति के संगम को सिनेमाई रूप देने का प्रयास है।