नोएडा सीवर हादसा: NHRC ने लिया स्वतः संज्ञान, नोएडा प्राधिकरण और पुलिस आयुक्त से 2 हफ्ते में माँगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गौतमबुद्ध नगर, उत्तर प्रदेश में सीवर लाइन सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक सफाई कर्मी की मौत के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है। आयोग ने नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष तथा गौतमबुद्ध नगर के पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
मुख्य घटनाक्रम
नोएडा प्राधिकरण द्वारा संचालित सीवर सफाई अभियान के दौरान सीवर लाइन में मौजूद जहरीली गैसों के संपर्क में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। इस घटना की सूचना मिलते ही NHRC ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। यह घटना 17 जुलाई को सामने आई।
आयोग ने क्या माँगा
NHRC के नोटिस में घटना के सभी पहलुओं की जानकारी माँगी गई है। आयोग ने स्पष्ट रूप से पूछा है कि सीवर सफाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, और सफाई कर्मियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। इसके अलावा आयोग ने यह भी जानना चाहा है कि घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों या एजेंसियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है तथा पीड़ित के परिवार को क्या सहायता और मुआवजा दिया गया है।
सुरक्षा मानकों पर सवाल
गौरतलब है कि सीवर और मैनहोल सफाई के दौरान होने वाले हादसे कोई नई बात नहीं है — देश भर में ऐसी घटनाएँ पहले भी सामने आती रही हैं। जहरीली गैसों के कारण सफाई कर्मियों की मौत की घटनाएँ बार-बार सुरक्षा मानकों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग और असुरक्षित सीवर सफाई को लेकर कानूनी और नीतिगत बहस जारी है।
सरकार की जवाबदेही
NHRC ने इस मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया है। आयोग का यह कदम दर्शाता है कि राज्य की एजेंसियों द्वारा संचालित सफाई अभियानों में भी सुरक्षा की अनदेखी को मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में रखा जाएगा। नोएडा प्राधिकरण और पुलिस आयुक्त दोनों को अब दो सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखना होगा।
आगे क्या होगा
दोनों अधिकारियों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद NHRC मामले की आगे समीक्षा करेगा और आवश्यकता पड़ने पर उचित निर्देश या अनुशंसाएँ जारी कर सकता है। पीड़ित परिवार को मुआवजे और पुनर्वास की स्थिति भी रिपोर्ट के आधार पर तय होगी।