उज्जैन सीवर हादसा: एनएचआरसी ने लिया स्वतः संज्ञान, मध्य प्रदेश सरकार से 2 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में सीवर चैंबर की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से एक मजदूर की मौत और दो अन्य के घायल होने की घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और उज्जैन के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
घटना का पूरा घटनाक्रम
यह दुखद हादसा 7 जुलाई को उज्जैन के भैरवगढ़ रोड पर पिपली नाका के समीप एक सीवरेज परियोजना स्थल पर हुआ। सीवर चैंबर में उतरे दो कर्मचारियों का दम घुटने लगा। उन्हें बचाने के प्रयास में तीसरा कर्मचारी भी चैंबर में उतरा, लेकिन वह भी बेहोश हो गया।
चैंबर के भीतर फँसे तीनों मजदूरों को देखकर स्थानीय नागरिकों ने तत्काल अधिकारियों को सूचित किया। इसके बाद पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों ने संयुक्त बचाव अभियान चलाकर तीनों को अस्पताल पहुँचाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाज के दौरान एक कर्मचारी की मौत हो गई, जबकि दो अन्य का उपचार जारी है।
एनएचआरसी की प्रतिक्रिया और नोटिस
देश की शीर्ष मानवाधिकार संस्था एनएचआरसी ने इस घटना को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला बताया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि माँगी गई रिपोर्ट में जाँच की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ मृतक कर्मचारी और घायल कर्मचारियों के परिजनों को दिए गए मुआवजे का पूरा विवरण भी शामिल होना चाहिए।
जाँच का दायरा
पुलिस को संदेह है कि कर्मचारी सीवर चैंबर के भीतर जमा जहरीली गैसों की चपेट में आए, हालाँकि मौत का सटीक कारण जाँच के जरिए निर्धारित किया जा रहा है। अधिकारियों ने जाँच शुरू कर दी है और इस बात की पड़ताल की जा रही है कि मजदूरों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं, तथा सीवरेज कार्य के दौरान मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) का पालन हुआ या नहीं।
जाँच के तहत ठेकेदार, साइट सुपरवाइजर और घटनास्थल पर मौजूद अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाने की संभावना है।
सफाई कर्मचारियों की सुरक्षा का सवाल
गौरतलब है कि देशभर में सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान मजदूरों की मौत की घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हाथ से मैला उठाने की प्रथा पर प्रतिबंध और सुरक्षित यांत्रिक सफाई को लेकर कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, फिर भी जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन पर सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि बिना उचित सुरक्षा उपकरण के सीवर में उतरने की बाध्यता ठेकेदारों की लापरवाही और प्रशासनिक निगरानी की विफलता को दर्शाती है।
आगे क्या होगा
एनएचआरसी के नोटिस के जवाब में मध्य प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। आयोग की प्रतिक्रिया के आधार पर मुआवजे और जवाबदेही को लेकर आगे की कार्रवाई तय होगी।