क्या एनएचआरसी ने इंदौर की दूषित पानी त्रासदी पर स्वतः संज्ञान लिया?
सारांश
Key Takeaways
- एनएचआरसी ने इंदौर दूषित पानी मामले पर कार्रवाई की।
- कम से कम 7 लोगों की जान गई।
- मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी गई।
- मुख्यमंत्री ने 2 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की।
- जांच समिति का गठन किया गया।
नई दिल्ली/इंदौर, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से कम से कम 7 लोगों की मृत्यु और 40 से अधिक लोगों के बीमार पड़ने की मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वतः संज्ञान लिया है।
आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानते हुए मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि क्षेत्र के निवासी कई दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति की शिकायत कर रहे थे, लेकिन स्थानीय अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मुख्य पाइपलाइन एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से गुजरती है, जहां रिसाव के कारण सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल गया। इसके अलावा, कई जल वितरण लाइनें टूटी हुई पाई गईं, जिससे दूषित पानी सीधे घरों तक पहुंच रहा था।
एनएचआरसी ने कहा कि यदि ये तथ्य सही साबित हुए तो यह जीवन के अधिकार (अनुच्छेद 21) का स्पष्ट उल्लंघन है। आयोग ने इस पर गंभीर चिंता जताई है और राज्य सरकार से पूरी जांच, दोषियों पर कार्रवाई तथा पीड़ित परिवारों को राहत की जानकारी मांगी है।
इस घटना में मौतों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे हैं। सरकारी आंकड़ों में 4-7 मौतें बताई जा रही हैं, जबकि स्थानीय निवासी और कुछ रिपोर्ट्स में 10-13 तक का दावा किया गया है, जिसमें एक 6 महीने का मासूम बच्चा भी शामिल है। 100 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं, जहां डायरिया, उल्टी और अन्य जलजनित बीमारियों के लक्षण पाए गए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले पर संज्ञान लेते हुए पीड़ित परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता और इलाज का पूरा खर्च वहन करने की घोषणा की है। एक जांच समिति गठित की गई है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने भी सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।