राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा, बोले — 'जहां सम्मान नहीं, वहां रहना व्यर्थ'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने 17 जुलाई 2026 को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। पटना में मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में उनकी गरिमा को ठेस पहुँचने के कारण यह कदम उठाया गया और इस्तीफा वापस लेने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।
इस्तीफे की वजह
तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए लंबे समय तक पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया। उनके अनुसार, जब किसी समर्पित कार्यकर्ता के सम्मान को ठेस पहुँचती है, तो इससे न केवल वह व्यक्ति बल्कि पार्टी के अन्य कार्यकर्ता और नेता भी आहत होते हैं। उन्होंने कहा, 'जहां सम्मान नहीं होता, वहां रहने का कोई मतलब नहीं है।'
नेतृत्व को पहले भी कराया था अवगत
तिवारी ने बताया कि इस मसले पर उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को अपनी बात से अवगत कराया था। उन्होंने राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से भी इस संबंध में बातचीत की थी, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। कई मौकों पर चिंताएँ साझा करने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उनके पास इस्तीफे के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
वरिष्ठ नेता सिद्दीकी से रिश्ता
राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर तिवारी ने कहा कि उनके साथ उनके व्यक्तिगत और पुराने संबंध हैं — राजनीति से पहले के। उन्होंने बताया कि सिद्दीकी परिवार की तरह हैं और वे भी इस पूरे घटनाक्रम से दुखी हैं। सिद्दीकी का मानना है कि उनके जैसे मुखर और प्रखर वक्ता का पार्टी से अलग होना चिंता की बात है।
अनुशासनहीनता के आरोपों को किया खारिज
तिवारी ने किसी भी गलती या अनुशासनहीनता के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि अगर उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुँचाया होता, पार्टी की छवि खराब की होती या अनुशासन तोड़ा होता, तो बात अलग होती। उनका रिकॉर्ड, उनके अनुसार, एक खुली किताब की तरह है।
आगे की राह
तिवारी ने स्पष्ट किया कि वे अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग हैं। राजद के लिए यह झटका ऐसे समय में आया है जब पार्टी बिहार में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। एक वरिष्ठ प्रवक्ता का इस तरह पार्टी छोड़ना आंतरिक असंतोष के संकेत देता है जिस पर नेतृत्व को ध्यान देना होगा।