17 जुलाई 2026
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राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा, बोले — 'जहां सम्मान नहीं, वहां रहना व्यर्थ'

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राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा, बोले — 'जहां सम्मान नहीं, वहां रहना व्यर्थ'

सारांश

राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने 17 जुलाई को सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। तेजस्वी यादव से बात करने के बावजूद सुनवाई न होने पर उन्होंने यह कदम उठाया। उनका कहना है — 'जहां सम्मान नहीं, वहां रहने का मतलब नहीं।' राजद के लिए यह बिहार में नाजुक वक्त पर बड़ा झटका है।

मुख्य बातें

मृत्युंजय तिवारी ने 17 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सभी पदों से इस्तीफा दिया।
इस्तीफे की वजह पार्टी में गरिमा को ठेस पहुँचना बताया; कहा — इस्तीफा वापस लेने का कोई सवाल नहीं।
राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से बातचीत की थी, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी ने इस घटनाक्रम पर दुख जताया; कहा — ऐसे प्रखर वक्ता का जाना पार्टी के लिए चिंताजनक।
तिवारी ने अनुशासनहीनता के किसी भी आरोप को सिरे से नकारा।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने 17 जुलाई 2026 को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। पटना में मीडिया से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में उनकी गरिमा को ठेस पहुँचने के कारण यह कदम उठाया गया और इस्तीफा वापस लेने का कोई प्रश्न ही नहीं उठता।

इस्तीफे की वजह

तिवारी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए लंबे समय तक पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ काम किया। उनके अनुसार, जब किसी समर्पित कार्यकर्ता के सम्मान को ठेस पहुँचती है, तो इससे न केवल वह व्यक्ति बल्कि पार्टी के अन्य कार्यकर्ता और नेता भी आहत होते हैं। उन्होंने कहा, 'जहां सम्मान नहीं होता, वहां रहने का कोई मतलब नहीं है।'

नेतृत्व को पहले भी कराया था अवगत

तिवारी ने बताया कि इस मसले पर उन्होंने पहले भी पार्टी नेतृत्व को अपनी बात से अवगत कराया था। उन्होंने राजद नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से भी इस संबंध में बातचीत की थी, लेकिन उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया गया। कई मौकों पर चिंताएँ साझा करने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो उनके पास इस्तीफे के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।

वरिष्ठ नेता सिद्दीकी से रिश्ता

राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात को लेकर पूछे गए सवाल पर तिवारी ने कहा कि उनके साथ उनके व्यक्तिगत और पुराने संबंध हैं — राजनीति से पहले के। उन्होंने बताया कि सिद्दीकी परिवार की तरह हैं और वे भी इस पूरे घटनाक्रम से दुखी हैं। सिद्दीकी का मानना है कि उनके जैसे मुखर और प्रखर वक्ता का पार्टी से अलग होना चिंता की बात है।

अनुशासनहीनता के आरोपों को किया खारिज

तिवारी ने किसी भी गलती या अनुशासनहीनता के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि अगर उन्होंने पार्टी को नुकसान पहुँचाया होता, पार्टी की छवि खराब की होती या अनुशासन तोड़ा होता, तो बात अलग होती। उनका रिकॉर्ड, उनके अनुसार, एक खुली किताब की तरह है।

आगे की राह

तिवारी ने स्पष्ट किया कि वे अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग हैं। राजद के लिए यह झटका ऐसे समय में आया है जब पार्टी बिहार में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में है। एक वरिष्ठ प्रवक्ता का इस तरह पार्टी छोड़ना आंतरिक असंतोष के संकेत देता है जिस पर नेतृत्व को ध्यान देना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो खुद में एक संदेश है। बिहार में अगले चुनावी चक्र को देखते हुए, वरिष्ठ और मुखर चेहरों का इस तरह बाहर जाना राजद की संगठनात्मक एकजुटता पर प्रश्नचिह्न लगाता है। जब तक पार्टी आंतरिक शिकायत निवारण का कोई पारदर्शी तंत्र नहीं बनाती, ऐसे इस्तीफे थमने के बजाय बढ़ते ही रहेंगे।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मृत्युंजय तिवारी ने राजद से इस्तीफा क्यों दिया?
मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि पार्टी में उनकी गरिमा को ठेस पहुँची और बार-बार नेतृत्व को अवगत कराने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने तेजस्वी यादव से भी बात की थी, लेकिन समाधान नहीं निकला, जिसके बाद इस्तीफा ही एकमात्र विकल्प बचा।
क्या मृत्युंजय तिवारी अपना इस्तीफा वापस लेंगे?
नहीं। तिवारी ने स्पष्ट किया कि वे अपने निर्णय पर पूरी तरह अडिग हैं और इस्तीफा वापस लेने का कोई सवाल नहीं है।
राजद के वरिष्ठ नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
तिवारी के अनुसार, अब्दुल बारी सिद्दीकी इस पूरे घटनाक्रम से दुखी हैं। सिद्दीकी का मानना है कि तिवारी जैसे मुखर और प्रखर वक्ता का पार्टी से अलग होना चिंता की बात है।
राजद के लिए यह इस्तीफा कितना बड़ा झटका है?
मृत्युंजय तिवारी पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता थे और पार्टी की सार्वजनिक छवि का अहम हिस्सा। बिहार में राजनीतिक सक्रियता के इस दौर में एक अनुभवी प्रवक्ता का जाना पार्टी के संगठनात्मक ढाँचे और एकजुटता पर सवाल उठाता है।
क्या तिवारी पर अनुशासनहीनता का कोई आरोप था?
तिवारी ने ऐसे किसी भी आरोप को सिरे से नकारा। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के हित में ईमानदारी और निष्ठा से काम किया और उनका रिकॉर्ड एक खुली किताब की तरह है।
राष्ट्र प्रेस
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