'श्री रामभूमि' की शूटिंग के बीच अनुपम खेर पहुंचे यतीन्द्र मिश्र के ऐतिहासिक निवास, साहित्य-संस्कृति पर हुई चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अनुपम खेर इन दिनों अयोध्या में अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म 'श्री रामभूमि' की शूटिंग में जुटे हुए हैं। शूटिंग के दौरान उन्होंने प्रसिद्ध लेखक एवं गीतकार स्वर्गीय राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा के सुपुत्र यतीन्द्र मिश्र और उनकी बहन मंजरी से उनके ऐतिहासिक निवास पर मुलाकात की। खेर ने इस भेंट की तस्वीरें और अपनी भावनाएं इंस्टाग्राम पर साझा कीं।
मुलाकात का विवरण
अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर लिखा, 'अयोध्या में शूटिंग के दौरान अपने प्रिय मित्र एवं लेखक/गीतकार राजा बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा जी के सुपुत्र श्री यतीन्द्र मिश्र और उनकी बहन मंजरी जी से उनके ऐतिहासिक निवास पर मिलना एक बेहद सुखद अनुभव रहा।' उन्होंने आगे जोड़ा कि गुलजार साहब पर लिखी दो खूबसूरत पुस्तकें उपहार में पाकर मन प्रसन्न हो गया।
खेर ने मंजरी जी की आत्मीय मेहमाननवाजी और उनके हाथों के स्वादिष्ट भोजन का भी विशेष उल्लेख किया। उन्होंने लिखा कि साहित्य, संस्कृति, अयोध्या की विरासत और जीवन पर हुई लंबी, दिलचस्प बातचीत ने शाम को एक अलग ही अर्थ दे दिया।
फिल्म 'श्री रामभूमि' के बारे में
आगामी फिल्म 'श्री रामभूमि' राम मंदिर आंदोलन के इतिहास पर आधारित है। इसका निर्देशन कामाख्या नारायण सिंह कर रहे हैं। फिल्म में अनुपम खेर, विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत नेता एवं राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख सूत्रधार अशोक सिंघल की भूमिका में नज़र आएंगे।
यह फिल्म राम मंदिर निर्माण से जुड़े दशकों के संघर्ष, कानूनी लड़ाई और आस्था की दीर्घ यात्रा को रुपहले पर्दे पर जीवंत करेगी। फिल्म का पहला शेड्यूल अयोध्या में आरंभ हो चुका है, जहाँ अनुपम खेर ने रामलला के दर्शन करने के पश्चात शूटिंग का शुभारंभ किया।
फिल्म की स्टारकास्ट और निर्माण
अनुपम खेर के अतिरिक्त फिल्म में ऋत्विक भौमिक और अमृता खानविलकर भी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म ज़ी स्टूडियो के बैनर तले निर्मित हो रही है।
यतीन्द्र मिश्र की साहित्यिक पहचान
यतीन्द्र मिश्र हिंदी साहित्य जगत में एक सुपरिचित नाम हैं और गुलजार साहब पर उनके शोधपरक लेखन को व्यापक सराहना मिली है। अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत से उनका गहरा जुड़ाव रहा है। यह मुलाकात इस बात का प्रमाण है कि 'श्री रामभूमि' की शूटिंग केवल एक फिल्मी परियोजना नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और साहित्यिक संवाद का भी माध्यम बन रही है।