नीट-यूजी 2026 पेपर लीक: सुप्रीम कोर्ट में 19 अगस्त को अगली सुनवाई, केंद्र के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब तलब
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली — नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के हलफनामे पर याचिकाकर्ताओं से जवाब माँगा है और अगली सुनवाई की तारीख 19 अगस्त तय की है। इसी मामले में राउज एवेन्यू की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने भी सुनवाई में किसी भी तरह की देरी न होने देने के कड़े निर्देश दिए। यह मामला लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों की परीक्षा प्रणाली में आस्था से सीधे जुड़ा है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की सख्त टिप्पणी
राउज एवेन्यू कोर्ट के फास्ट ट्रैक जज अजय गुप्ता ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि 'इस केस में हर एक मिनट बहुत कीमती है।' उन्होंने सभी वकीलों को निर्देश दिया कि वे सुबह 10 बजे तक कोर्ट में उपस्थित हों। साथ ही, जज ने यह भी आदेश दिया कि न्यायिक हिरासत में जेल में बंद आरोपियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समय पर पेश किया जाए, ताकि सुनवाई बाधित न हो।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। पीठ ने केंद्र सरकार के हलफनामे का संज्ञान लेते हुए कहा कि 'हलफनामे में कई ऐसी बातें हैं जिन पर विचार और चर्चा की जाएगी।' अब याचिकाकर्ताओं को इस हलफनामे पर अपना पक्ष रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को निर्धारित की गई है।
याचिकाकर्ताओं की माँगें
याचिकाओं में परीक्षा संचालन करने वाली संस्था राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अदालत केंद्र सरकार को निर्देश दे कि NTA को या तो पूरी तरह बदला जाए या उसकी जगह एक नई, तकनीकी रूप से सक्षम, अधिक सुरक्षित और स्वतंत्र संस्था स्थापित की जाए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार का जवाब और नए कानूनी प्रावधान
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा है कि परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। सरकार के अनुसार, 2026 में बने नए कानून के तहत पेपर लीक या नकल जैसे अपराधों में 10 साल तक की कैद और ₹5 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह प्रावधान परीक्षा धोखाधड़ी के खिलाफ अब तक की सबसे कड़ी कानूनी व्यवस्था मानी जा रही है।
नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में टास्क फोर्स
इसके अतिरिक्त, इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स मौजूदा परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव तैयार करेगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में लाखों मेडिकल अभ्यर्थी और उनके परिवार परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर गहरी चिंता में हैं। अब सभी की निगाहें 19 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं, जब याचिकाकर्ता केंद्र के हलफनामे पर अपना जवाब पेश करेंगे।