नीट यूजी 2026 विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, एफएआईएमए ने न्यायिक निगरानी और एनटीए पुनर्गठन की मांग की

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नीट यूजी 2026 विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, एफएआईएमए ने न्यायिक निगरानी और एनटीए पुनर्गठन की मांग की

सारांश

नीट यूजी 2026 का विवाद अब सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज तक पहुँच गया है। एफएआईएमए की याचिका में एनटीए को भंग करने, न्यायिक निगरानी में परीक्षा कराने और सीबीआई से चार हफ्तों में रिपोर्ट माँगने की माँग है — यह लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भरोसे और देश की परीक्षा प्रणाली की साख का सवाल है।

मुख्य बातें

एफएआईएमए ने 13 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में नीट यूजी 2026 को लेकर याचिका दाखिल की।
माँग की गई है कि परीक्षा न्यायिक निगरानी में हो या दोबारा कराई जाए।
एनटीए को भंग कर एक नई, पारदर्शी और स्वायत्त संस्था बनाने की माँग।
प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें; साइबर सिक्योरिटी और फॉरेंसिक विशेषज्ञ भी शामिल हों।
सीबीआई को चार हफ्तों में पेपर लीक जाँच की स्टेटस रिपोर्ट अदालत में दाखिल करने का निर्देश माँगा गया।
ऑफलाइन परीक्षा की जगह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) और सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक करने की भी माँग।

सर्वोच्च न्यायालय में नीट यूजी 2026 परीक्षा को लेकर बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआईएमए) ने 13 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं और परीक्षा को न्यायिक निगरानी में कराने समेत कई बड़े सुधारों की माँग की है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर लाखों छात्रों और अभिभावकों का भरोसा पहले से हिला हुआ है।

याचिका में क्या माँगें हैं

एफएआईएमए ने अपनी याचिका में माँग की है कि नीट यूजी 2026 की पूरी परीक्षा प्रक्रिया को या तो दोबारा कराया जाए या फिर न्यायिक निगरानी में संपन्न कराया जाए। संगठन का कहना है कि पेपर लीक, तकनीकी खामियों और पारदर्शिता की कमी जैसी शिकायतें बार-बार सामने आई हैं, जिनसे परीक्षा की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लग गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था — नेशनल एग्जामिनेशन इंडिपेंडेंट कमीशन (एनईआईसी) — अस्तित्व में नहीं आ जाती, तब तक परीक्षा की पूरी प्रक्रिया एक हाई-पावर्ड कमेटी की देखरेख में हो।

एनटीए पर सीधा निशाना

याचिका में सबसे तीखा प्रहार नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) पर किया गया है। एफएआईएमए का आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। संगठन ने माँग की है कि या तो एनटीए को पूरी तरह भंग किया जाए या फिर इसका पूर्ण पुनर्गठन कर एक नई, अधिक पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और स्वायत्त संस्था बनाई जाए। गौरतलब है कि 2024 में नीट पेपर लीक विवाद के बाद एनटीए पहले ही कड़ी आलोचना झेल चुकी है।

हाई-पावर्ड कमेटी और सीबीआई रिपोर्ट की माँग

याचिका में प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा किए जाने की माँग की गई है। इस कमेटी में एक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही याचिका में यह भी माँग की गई है कि केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) चार हफ्तों के भीतर सर्वोच्च न्यायालय में एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे, जिसमें अब तक की जाँच, पेपर लीक नेटवर्क, गिरफ्तारियाँ, आरोपियों का विवरण और आगे की कार्रवाई शामिल हो।

तकनीकी सुधार और पारदर्शिता पर जोर

एफएआईएमए ने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए डिजिटल लॉकिंग सिस्टम, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल की सिफारिश की है। संगठन ने पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा की जगह कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मॉडल अपनाने पर भी जोर दिया है। इसके अलावा याचिका में माँग की गई है कि नीट यूजी 2026 के सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक किए जाएँ, ताकि किसी भी असामान्यता या गड़बड़ी को आसानी से पहचाना जा सके।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल होने के बाद अब सभी की निगाहें अदालत की सुनवाई की तारीख पर टिकी हैं। यह मामला न केवल नीट यूजी 2026 में बैठने वाले लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है, बल्कि यह भारत की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा प्रणाली की साख और संरचनात्मक सुधार का भी सवाल बन गया है। अदालत का रुख यह तय करेगा कि क्या परीक्षा प्रक्रिया में आमूल बदलाव संभव है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन भारत के दूरदराज इलाकों में डिजिटल बुनियादी ढाँचे की कमी इसे एक जटिल समाधान बनाती है। जब तक परिणामों की जवाबदेही तय करने वाला कोई स्वतंत्र तंत्र नहीं बनता, तब तक हर साल यह विवाद नए रूप में लौटता रहेगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफएआईएमए ने सुप्रीम कोर्ट में नीट यूजी 2026 को लेकर क्या माँगें की हैं?
एफएआईएमए ने माँग की है कि नीट यूजी 2026 को न्यायिक निगरानी में कराया जाए या दोबारा आयोजित किया जाए। इसके अलावा एनटीए को भंग या पुनर्गठित करने, हाई-पावर्ड कमेटी बनाने और सीबीआई से चार हफ्तों में स्टेटस रिपोर्ट माँगने की भी माँग की गई है।
एनटीए को लेकर याचिका में क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों में एनटीए की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं और इसकी विश्वसनीयता कमज़ोर हुई है। एफएआईएमए ने माँग की है कि एनटीए को या तो पूरी तरह भंग किया जाए या इसका पुनर्गठन कर एक नई स्वायत्त और पारदर्शी संस्था बनाई जाए।
प्रस्तावित हाई-पावर्ड कमेटी में कौन शामिल होंगे?
याचिका के अनुसार इस कमेटी की अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को करनी चाहिए। इसमें एक साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक साइंटिस्ट को भी शामिल करने का सुझाव दिया गया है।
नीट यूजी 2026 में सीबीटी मॉडल क्यों माँगा जा रहा है?
एफएआईएमए का मानना है कि पारंपरिक ऑफलाइन परीक्षा में पेपर लीक और सुरक्षा खामियों का जोखिम अधिक है। कंप्यूटर आधारित टेस्ट (सीबीटी) मॉडल से डिजिटल लॉकिंग और कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के ज़रिये परीक्षा को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
नीट यूजी 2026 के सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक क्यों करने की माँग है?
याचिका में कहा गया है कि सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक होने से किसी भी परीक्षा केंद्र पर असामान्य प्रदर्शन या गड़बड़ी को आसानी से पहचाना जा सकेगा। इससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और भविष्य में धाँधली की संभावना कम होगी।
राष्ट्र प्रेस
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