नीट यूजी 2026 रद्द: सलीम इंजीनियर ने एनटीए और सरकार को ठहराया जिम्मेदार, स्वतंत्र जांच की मांग

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नीट यूजी 2026 रद्द: सलीम इंजीनियर ने एनटीए और सरकार को ठहराया जिम्मेदार, स्वतंत्र जांच की मांग

सारांश

नीट यूजी 2026 में 'गेस पेपर' लीक के बाद परीक्षा रद्द — मरकजी तालीमी बोर्ड के प्रमुख सलीम इंजीनियर ने एनटीए और सरकार को सीधे जिम्मेदार ठहराया, सीबीआई जांच में पूर्ण पारदर्शिता और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें तत्काल लागू करने की मांग की।

मुख्य बातें

नीट यूजी 2026 परीक्षा अनियमितताओं के कारण एनटीए ने रद्द कर पुनः आयोजन का निर्णय लिया।
सलीम इंजीनियर ने 12 मई 2026 को एनटीए और शिक्षा मंत्रालय को सीधे जिम्मेदार ठहराया।
परीक्षा में 20 लाख से अधिक छात्र शामिल होते हैं; 'गेस पेपर' लीक से संगठित कदाचार का संकेत।
सरकार ने मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा।
पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ.
राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्च-स्तरीय समिति की सिफारिशें तत्काल लागू करने की मांग।

जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के अंतर्गत मरकजी तालीमी बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर सलीम इंजीनियर ने नीट यूजी 2026 परीक्षा में सामने आई अनियमितताओं की कड़ी भर्त्सना की है, जिनके चलते नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को परीक्षा रद्द कर पुनः आयोजन का निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने 12 मई 2026 को जारी एक बयान में कहा कि इस विफलता के लिए सरकार और एनटीए सीधे तौर पर जवाबदेह हैं, क्योंकि इससे 20 लाख से अधिक आकांक्षी छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है।

मुख्य घटनाक्रम

प्रो. सलीम इंजीनियर ने अपने बयान में कहा कि अनौपचारिक नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ऐसे अत्यंत सटीक 'गेस पेपर्स' की बिक्री और व्यापक सर्कुलेशन, संगठित कदाचार की ओर स्पष्ट इशारा करता है। उन्होंने कहा,

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट यूजी 2026 परीक्षा क्यों रद्द की गई?
नीट यूजी 2026 परीक्षा में 'गेस पेपर' लीक की अनियमितताएँ सामने आने के बाद एनटीए ने इसे रद्द कर पुनः आयोजन का निर्णय लिया। ये 'गेस पेपर' डिजिटल प्लेटफॉर्म और अनौपचारिक नेटवर्क के जरिए बड़े पैमाने पर सर्कुलेट हुए और इनमें वास्तविक परीक्षा से मेल खाने वाले सवाल शामिल थे।
सीबीआई जांच में क्या होगा?
सरकार ने नीट यूजी 2026 अनियमितताओं की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी है। प्रो. सलीम इंजीनियर ने माँग की है कि जांच पूरी तरह स्वतंत्र, गहन और पारदर्शी हो, और दोषी व्यक्तियों तथा नेटवर्क के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें क्या हैं?
शिक्षा मंत्रालय द्वारा पूर्व इसरो अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित उच्च-स्तरीय समिति ने प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितताओं पर चिंता जताते हुए एक 'सुरक्षित, छेड़छाड़-मुक्त और पारदर्शी' परीक्षा प्रणाली की सिफारिश की थी। प्रो. इंजीनियर ने सरकार से इन सिफारिशों को तत्काल लागू करने की मांग की है।
नीट यूजी 2026 रद्द होने से छात्रों पर क्या असर पड़ा?
परीक्षा रद्द होने से 20 लाख से अधिक नीट उम्मीदवारों और उनके परिवारों के लिए भारी मानसिक कष्ट और अनिश्चितता पैदा हो गई है। मेडिकल प्रवेश में देरी से उनके शैक्षणिक और करियर योजनाओं पर सीधा प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
मरकजी तालीमी बोर्ड ने क्या माँगें रखी हैं?
मरकजी तालीमी बोर्ड ने स्वतंत्र और पारदर्शी जांच, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई, एनटीए और शिक्षा मंत्रालय के जिम्मेदार अधिकारियों के इस्तीफे, और राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को तत्काल लागू करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस