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नीट-यूजी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NTA, CBI और केंद्र को नोटिस जारी किया, 29 मई को अगली सुनवाई

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नीट-यूजी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने NTA, CBI और केंद्र को नोटिस जारी किया, 29 मई को अगली सुनवाई

सारांश

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद एक बार फिर सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज़ पर है। FAIMA और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की याचिका पर कोर्ट ने NTA, CBI और केंद्र को नोटिस जारी किया और NTA की लापरवाही पर कड़ी नाराज़गी जताई। 11 गिरफ्तारियों के बाद भी लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मार्च 2026 को NTA , CBI और केंद्र सरकार को नीट-यूजी 2026 विवाद पर नोटिस जारी किया।
FAIMA और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में हाई-पावर्ड कमेटी बनाकर न्यायिक निगरानी में पुनर्परीक्षा कराने की माँग की।
कोर्ट ने NTA पर कड़ी टिप्पणी की — कहा कि पिछले फैसले और सिफारिशों के बावजूद NTA ने सबक नहीं सीखा।
मॉनिटरिंग कमेटी अध्यक्ष के.
राधाकृष्णन और NTA को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया।
नीट पेपर लीक मामले में अब तक 11 लोग गिरफ्तार ; जाँच CBI के हाथ में।
अगली सुनवाई 29 मई 2026 को निर्धारित।

सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मार्च 2026 को नीट-यूजी 2026 परीक्षा विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट द्वारा दायर इन याचिकाओं में नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा को न्यायिक निगरानी में कराने की माँग की गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को निर्धारित की गई है।

याचिका में क्या माँगें हैं

याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक 'हाई-पावर्ड कमेटी' गठित की जाए, जिसकी अध्यक्षता सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। इस समिति में एक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और एक फॉरेंसिक वैज्ञानिक को भी शामिल किए जाने की माँग की गई है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि जब तक नई स्वतंत्र परीक्षा संस्था (NEIC) औपचारिक रूप से अस्तित्व में नहीं आ जाती, तब तक इसी न्यायिक समिति की देखरेख में पुनर्परीक्षा आयोजित की जाए। इसके अतिरिक्त, सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक करने की माँग भी की गई है, ताकि किसी भी असामान्य पैटर्न या गड़बड़ी की पारदर्शी जाँच हो सके।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने NTA पर कड़ी नाराज़गी जताई। न्यायालय ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि NTA ने अब तक सबक नहीं सीखा। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि इस मामले में पहले भी फैसला आ चुका है, आयोग ने सिफारिशें दी हैं, और सरकार ने उन्हें स्वीकार भी किया — फिर भी स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

न्यायालय ने NTA को निर्देश दिया कि वह मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर अब तक की प्रगति का ब्यौरा देते हुए एक हलफनामा (एफिडेविट) दाखिल करे। साथ ही, मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन को भी हाई-पावर कमेटी के निर्देशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों पर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया गया।

नीट विवाद की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को देशभर में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आयोजित की गई थी। बाद में यह परीक्षा रद्द कर दी गई, जब यह आरोप सामने आए कि कुछ व्यक्तियों ने कथित तौर पर परीक्षा से पूर्व प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें धन के बदले अभ्यर्थियों में वितरित किया। यह ऐसे समय में आया है जब पिछले वर्षों में भी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएँ सामने आती रही हैं, जिससे NTA की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

अब तक इस मामले में जाँच एजेंसियों ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया है और पूरे मामले की जाँच CBI कर रही है।

आगे क्या होगा

मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में होगी, जिसमें NTA और CBI के हलफनामों पर विचार किया जाएगा। लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए यह सुनवाई अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। NEIC के गठन और न्यायिक निगरानी समिति के स्वरूप पर सरकार का रुख इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

सिफारिशें लागू करने के निर्देश दिए थे, फिर भी संस्थागत सुधार की रफ्तार कछुए की चाल से चली। असली सवाल यह है कि NEIC के गठन में देरी क्यों हो रही है, और जब तक वह नहीं बनती, तब तक NTA के भरोसे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य सौंपना कितना उचित है। सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक न करना पारदर्शिता की कमी का सबसे बड़ा प्रमाण है — जो संस्था छुपाती है, वह जवाबदेही से भी बचती है। 29 मई की सुनवाई केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि भारत की परीक्षा-प्रणाली की विश्वसनीयता की अग्निपरीक्षा है।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीट-यूजी 2026 विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कदम उठाया?
सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मार्च 2026 को NTA, CBI और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब माँगा है। साथ ही NTA और मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष के. राधाकृष्णन को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामला क्या है?
नीट-यूजी परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी, लेकिन आरोप लगे कि कुछ व्यक्तियों ने कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र प्राप्त कर उन्हें धन के बदले अभ्यर्थियों में बाँटा। इसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई और CBI जाँच में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
FAIMA और यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट ने सुप्रीम कोर्ट में क्या माँगें रखी हैं?
दोनों संगठनों ने माँग की है कि नीट-यूजी 2026 की पुनर्परीक्षा एक हाई-पावर्ड कमेटी की निगरानी में हो, जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट जज करें और जिसमें साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ व फॉरेंसिक वैज्ञानिक भी शामिल हों। इसके अलावा सेंटर-वाइज परिणाम सार्वजनिक करने की भी माँग है।
NEIC क्या है और इसका नीट से क्या संबंध है?
NEIC यानी नेशनल एग्ज़ामिनेशन इम्प्लीमेंटेशन कमीशन — एक प्रस्तावित स्वतंत्र परीक्षा संस्था है जो NTA की जगह लेगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि जब तक NEIC औपचारिक रूप से गठित नहीं हो जाती, तब तक न्यायिक समिति की निगरानी में ही परीक्षा कराई जाए।
नीट-यूजी 2026 मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले की अगली सुनवाई 29 मई 2026 को निर्धारित की है, जिसमें NTA और CBI के हलफनामों की समीक्षा की जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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