नीट यूजी 2026: एनटीए ने सुप्रीम कोर्ट को बताया — 85% अनुवाद में AI, 1,000 सुरक्षित परीक्षा केंद्र बनेंगे
सारांश
मुख्य बातें
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 29 मई 2026 को सर्वोच्च न्यायालय में नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले पर विस्तृत हलफनामा दाखिल किया, जिसमें परीक्षा सुरक्षा को लेकर कई ठोस तकनीकी और प्रशासनिक उपायों की जानकारी दी गई। एजेंसी ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
नीट यूजी 2026 में पेपर लीक और अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बाद देशभर में व्यापक विरोध-प्रदर्शन हुए, जिसके चलते परीक्षा रद्द करनी पड़ी। अब 21 जून को पुनः परीक्षा प्रस्तावित है। सर्वोच्च न्यायालय में दायर कई याचिकाओं के जवाब में NTA ने यह हलफनामा प्रस्तुत किया है।
एआई और तकनीकी सुधार
एजेंसी ने हलफनामे में बताया कि मानवीय हस्तक्षेप कम करने और सुरक्षा जोखिम घटाने के उद्देश्य से अनुवाद कार्य के कम से कम 85 प्रतिशत हिस्से में AI-आधारित टूल्स का उपयोग किया जाएगा। इससे अनुवाद प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और सुरक्षित होने की उम्मीद है।
सभी परीक्षा केंद्रों पर AI-सक्षम रियल-टाइम CCTV मॉनिटरिंग लागू की जा रही है। इसके अतिरिक्त, उन्नत साइबर सुरक्षा प्रणाली और नेक्स्ट-जनरेशन फायरवॉल स्थापित किए गए हैं। परीक्षा वितरण और परिणाम प्रसंस्करण के लिए IT अवसंरचना को पूरी तरह उन्नत किया गया है।
1,000 सुरक्षित परीक्षा केंद्रों की योजना
NTA ने कोर्ट को बताया कि देशभर के प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों में कम से कम 1,000 अत्याधुनिक सुरक्षित परीक्षा केंद्र स्थापित करने की योजना है। इन केंद्रों पर क्लाउड-आधारित अवसंरचना, AI-ML और ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। पूरी योजना और क्रियान्वयन प्रक्रिया की निगरानी अंतरराष्ट्रीय सहयोग से की जाएगी।
प्रशासनिक सुधार
हलफनामे में यह भी कहा गया कि उच्च-दांव परीक्षाओं में पेपर सेटर, मॉडरेटर, अनुवादक और प्रूफरीडर के चयन के लिए रैंडमाइजेशन और रोटेशन नीति को संस्थागत रूप दिया जा रहा है। परीक्षा से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के बैकग्राउंड की सख्त जाँच की जाएगी। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में परीक्षा तंत्र में मानवीय कड़ियों को ही सुरक्षा में सेंध का प्रमुख कारण माना गया था।
आगे क्या होगा
NTA ने सर्वोच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह ऐसे समय में आया है जब लाखों मेडिकल अभ्यर्थियों का भविष्य 21 जून की पुनः परीक्षा पर टिका है और न्यायालय में मामले की सुनवाई जारी है।