नीट-यूजी री-एग्जाम को चुनौती देने वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, जुलाई में होगी सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 17 जून 2026 को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के उस निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसके तहत 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर लगभग 22 लाख उम्मीदवारों के लिए पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि नीट-यूजी से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले से ही जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है और मौजूदा याचिका को भी जुलाई में उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका में क्या है मांग
याचिकाकर्ता की दलील है कि NTA ने पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता के आरोपों के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी, जबकि CBI की जाँच के अनुसार गड़बड़ी कुछ संगठित नेटवर्क के ज़रिये स्थानीय स्तर पर हुई थी — न कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी। याचिका में तर्क दिया गया है कि जिन 22 लाख छात्रों का कथित गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं था, उन्हें दोबारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा की कठिनाइयों से गुज़रने के लिए मजबूर करना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
याचिका में यह भी कहा गया कि इस फैसले से लाखों छात्रों को भारी शैक्षणिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी और देशभर में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया बाधित हुई। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी में शामिल लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन "परीक्षा संस्था की संस्थागत और प्रशासनिक नाकामियों की वजह से लाखों असली उम्मीदवारों के जायज हितों की बलि नहीं दी जा सकती।"
सुधारों की माँग
दोबारा परीक्षा को चुनौती देने के साथ-साथ PIL में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्थागत, ढाँचागत और तकनीकी सुधारों की माँग भी की गई है। इनमें स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था, बेहतर सुरक्षा उपाय और एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्न डिलीवरी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन तथा AI-आधारित निगरानी जैसी प्रौद्योगिकी-केंद्रित परीक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं।
कोर्ट का पहले का रुख
गौरतलब है कि इसी महीने जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने NTA को 21 जून की री-एग्जाम कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने का निर्देश देने से भी इनकार किया था। पीठ ने कहा था कि जब अधिकारी पहले से ही परीक्षा की तैयारी में जुटे हों, तब ऐसा आदेश उचित नहीं होगा। 21 जून को री-टेस्ट उसी पेन-एंड-पेपर प्रारूप में आयोजित होगा और एडमिट कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
NTA का आश्वासन और सुरक्षा इंतज़ाम
NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंगलवार को उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया कि री-एग्जाम पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध तरीके से संपन्न होगी। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि "री-एग्जाम के लिए कोई पेपर लीक नहीं हुआ है" और उम्मीदवारों को टेलीग्राम चैनलों पर मोटी रकम लेकर 'लीक पेपर' बेचने का दावा करने वाले ठगों से सावधान रहने की चेतावनी दी। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय वायु सेना लॉजिस्टिक्स में सहयोग कर रही है, जिससे प्रश्न-पत्रों को सुरक्षित रूप से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाने में लगने वाला समय कम होगा। यह री-टेस्ट मूल परीक्षा रद्द होने के 37 दिनों के भीतर आयोजित हो रहा है।
आगे क्या होगा
मौजूदा PIL सहित नीट-यूजी से संबंधित सभी याचिकाएँ अब जुलाई 2026 में जस्टिस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष एक साथ सुनी जाएँगी। यह ऐसे समय में आया है जब NTA के कामकाज में सुधार की माँग करने वाली कई अन्य याचिकाएँ भी उसी पीठ के पास लंबित हैं। न्यायालय का अगला कदम यह तय करेगा कि क्या री-एग्जाम की वैधता पर और गहरी जाँच होगी या मामला प्रशासनिक सुधारों तक सीमित रहेगा।