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नीट-यूजी री-एग्जाम को चुनौती देने वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, जुलाई में होगी सुनवाई

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नीट-यूजी री-एग्जाम को चुनौती देने वाली PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, जुलाई में होगी सुनवाई

सारांश

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी री-एग्जाम को चुनौती देने वाली PIL पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। CJI सूर्यकांत ने मामला जुलाई में जस्टिस नरसिम्हा पीठ को सौंपा। 22 लाख छात्रों की परीक्षा 21 जून को पेन-पेपर मोड में होगी, वायु सेना लॉजिस्टिक्स में सहयोग दे रही है।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 17 जून 2026 को नीट-यूजी री-एग्जाम को चुनौती देने वाली PIL पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
CJI सूर्यकांत ने मामले को जुलाई में जस्टिस पी.एस.
नरसिम्हा की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
याचिका में तर्क दिया गया कि CBI जाँच के अनुसार गड़बड़ी स्थानीय स्तर पर सीमित थी, पूरी परीक्षा दूषित नहीं थी।
22 लाख उम्मीदवारों के लिए री-एग्जाम 21 जून को पेन-पेपर प्रारूप में होगी; एडमिट कार्ड जारी।
NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा — री-एग्जाम के लिए कोई पेपर लीक नहीं; भारतीय वायु सेना लॉजिस्टिक्स में सहयोग दे रही है।
PIL में AI-आधारित निगरानी , बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन और स्वतंत्र निगरानी सहित व्यापक परीक्षा सुधारों की माँग भी की गई है।

सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 17 जून 2026 को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के उस निर्णय को चुनौती देने वाली जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसके तहत 3 मई को आयोजित नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर लगभग 22 लाख उम्मीदवारों के लिए पूरे देश में दोबारा परीक्षा कराने का आदेश दिया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि नीट-यूजी से जुड़े मामलों की सुनवाई पहले से ही जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है और मौजूदा याचिका को भी जुलाई में उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।

याचिका में क्या है मांग

याचिकाकर्ता की दलील है कि NTA ने पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितता के आरोपों के बाद पूरी परीक्षा रद्द कर दी, जबकि CBI की जाँच के अनुसार गड़बड़ी कुछ संगठित नेटवर्क के ज़रिये स्थानीय स्तर पर हुई थी — न कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित थी। याचिका में तर्क दिया गया है कि जिन 22 लाख छात्रों का कथित गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं था, उन्हें दोबारा राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा की कठिनाइयों से गुज़रने के लिए मजबूर करना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।

याचिका में यह भी कहा गया कि इस फैसले से लाखों छात्रों को भारी शैक्षणिक, मानसिक और आर्थिक परेशानी उठानी पड़ी और देशभर में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया बाधित हुई। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि धोखाधड़ी में शामिल लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जरूरी है, लेकिन "परीक्षा संस्था की संस्थागत और प्रशासनिक नाकामियों की वजह से लाखों असली उम्मीदवारों के जायज हितों की बलि नहीं दी जा सकती।"

सुधारों की माँग

दोबारा परीक्षा को चुनौती देने के साथ-साथ PIL में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में संस्थागत, ढाँचागत और तकनीकी सुधारों की माँग भी की गई है। इनमें स्वतंत्र निगरानी व्यवस्था, बेहतर सुरक्षा उपाय और एन्क्रिप्टेड डिजिटल प्रश्न डिलीवरी, बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन तथा AI-आधारित निगरानी जैसी प्रौद्योगिकी-केंद्रित परीक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं।

कोर्ट का पहले का रुख

गौरतलब है कि इसी महीने जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने NTA को 21 जून की री-एग्जाम कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (CBT) मोड में कराने का निर्देश देने से भी इनकार किया था। पीठ ने कहा था कि जब अधिकारी पहले से ही परीक्षा की तैयारी में जुटे हों, तब ऐसा आदेश उचित नहीं होगा। 21 जून को री-टेस्ट उसी पेन-एंड-पेपर प्रारूप में आयोजित होगा और एडमिट कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं।

NTA का आश्वासन और सुरक्षा इंतज़ाम

NTA के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने मंगलवार को उम्मीदवारों को भरोसा दिलाया कि री-एग्जाम पूरी तरह सुरक्षित और निर्बाध तरीके से संपन्न होगी। एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि "री-एग्जाम के लिए कोई पेपर लीक नहीं हुआ है" और उम्मीदवारों को टेलीग्राम चैनलों पर मोटी रकम लेकर 'लीक पेपर' बेचने का दावा करने वाले ठगों से सावधान रहने की चेतावनी दी। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय वायु सेना लॉजिस्टिक्स में सहयोग कर रही है, जिससे प्रश्न-पत्रों को सुरक्षित रूप से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाने में लगने वाला समय कम होगा। यह री-टेस्ट मूल परीक्षा रद्द होने के 37 दिनों के भीतर आयोजित हो रहा है।

आगे क्या होगा

मौजूदा PIL सहित नीट-यूजी से संबंधित सभी याचिकाएँ अब जुलाई 2026 में जस्टिस नरसिम्हा की पीठ के समक्ष एक साथ सुनी जाएँगी। यह ऐसे समय में आया है जब NTA के कामकाज में सुधार की माँग करने वाली कई अन्य याचिकाएँ भी उसी पीठ के पास लंबित हैं। न्यायालय का अगला कदम यह तय करेगा कि क्या री-एग्जाम की वैधता पर और गहरी जाँच होगी या मामला प्रशासनिक सुधारों तक सीमित रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कोर्ट ने प्रक्रियागत आधार पर तत्काल राहत देने से परहेज किया। असली सवाल यह है कि NTA की संस्थागत विफलताओं की जवाबदेही तय किए बिना केवल री-एग्जाम कराना पर्याप्त है या नहीं — और जुलाई की सुनवाई तक वह परीक्षा हो चुकी होगी, जिससे न्यायिक हस्तक्षेप की प्रासंगिकता ही सीमित हो जाएगी।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने नीट-यूजी री-एग्जाम PIL पर तत्काल सुनवाई क्यों नहीं की?
CJI सूर्यकांत ने कहा कि नीट-यूजी 2026 से जुड़ी याचिकाओं पर पहले से ही जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ सुनवाई कर रही है। मौजूदा PIL को भी जुलाई में उसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा।
नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा कब और किस प्रारूप में होगी?
री-एग्जाम 21 जून 2026 को उसी पेन-एंड-पेपर प्रारूप में आयोजित होगी। एडमिट कार्ड पहले ही जारी किए जा चुके हैं और भारतीय वायु सेना प्रश्न-पत्रों की सुरक्षित डिलीवरी में लॉजिस्टिक्स सहयोग दे रही है।
PIL में 22 लाख छात्रों के लिए क्या तर्क दिया गया है?
याचिका में कहा गया है कि CBI जाँच के अनुसार गड़बड़ी स्थानीय और संगठित नेटवर्क तक सीमित थी, पूरी परीक्षा प्रक्रिया दूषित नहीं थी। इसलिए जिन 22 लाख छात्रों का कथित धोखाधड़ी से कोई संबंध नहीं था, उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए मजबूर करना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
क्या नीट री-एग्जाम के लिए पेपर लीक का कोई खतरा है?
NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया है कि री-एग्जाम के लिए कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। उन्होंने छात्रों और अभिभावकों को टेलीग्राम चैनलों पर 'लीक पेपर' बेचने का दावा करने वाले ठगों से सावधान रहने की चेतावनी दी है।
नीट-यूजी 2026 से जुड़ी याचिकाओं पर अगली सुनवाई कब होगी?
मौजूदा PIL सहित नीट-यूजी से संबंधित सभी याचिकाएँ जुलाई 2026 में जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की पीठ के समक्ष एक साथ सूचीबद्ध की जाएँगी। NTA के कामकाज में सुधार की माँग करने वाली अन्य याचिकाएँ भी उसी पीठ के पास लंबित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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