बिहार बाढ़: एनडीए नेताओं की एक माह की सैलरी दान पर राजीव रंजन बोले — 'मिसाल कायम करने वाला कदम'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में भीषण बाढ़ के बीच एनडीए नेताओं द्वारा अपनी एक माह की सैलरी मुख्यमंत्री राहत कोष में दान करने के निर्णय को राजीव रंजन ने 20 सितंबर 2026 को पटना में सराहनीय बताया और कहा कि यह जन-प्रतिनिधियों द्वारा संकट की घड़ी में एक उल्लेखनीय मिसाल पेश करने का कदम है। बाढ़ राहत एवं पुनर्वास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने की इस पहल को उन्होंने व्यापक जन-भागीदारी की दिशा में एक सकारात्मक संकेत बताया।
राजीव रंजन का बयान: राहत के लिए जन-प्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका
राजीव रंजन ने कहा, 'इतनी भयानक बाढ़ के बीच, लोगों की मुश्किलों को कम करने और स्थिति को जितना हो सके काबू में करने की कोशिशें की जा रही हैं। राहत और पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। ऐसे हालात में केंद्र की मदद, राज्य सरकार के संसाधन और फिर आम लोगों की भागीदारी होती है। अब जन-प्रतिनिधियों ने इस बड़े अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने का फैसला किया है, और यह एक स्वागत योग्य कदम है।'
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार के कई ज़िले बाढ़ की चपेट में हैं और राहत अभियानों पर सरकारी संसाधनों का भारी दबाव है। केंद्र एवं राज्य सरकार की सहायता के साथ-साथ जन-प्रतिनिधियों की व्यक्तिगत भागीदारी को राजीव रंजन ने तीन-स्तरीय राहत ढाँचे की एक कड़ी बताया।
जेडीयू के भीतर मतभेद: 'एनडीए एकजुट रहेगा'
जनता दल यूनाइटेड (JDU) विधायक अनंत सिंह और जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता एवं एमएलसी नीरज कुमार के बीच चल रहे मतभेदों पर सवाल पूछे जाने पर राजीव रंजन ने इसे चुनाव से पहले की सामान्य खींचतान करार दिया।
उन्होंने कहा, 'अभी चुनाव की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। कभी-कभी मतभेद हो जाते हैं। लेकिन एनडीए एक बड़ा परिवार है और इसके सर्वमान्य नेता नीतीश कुमार हैं। बिहार में हमारी कोशिश ज़्यादा से ज़्यादा सीटें जीतने की है। हमें अब भी भरोसा है कि सब कुछ शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा लिया जाएगा।'
गौरतलब है कि बिहार में अगले विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की आंतरिक एकजुटता एनडीए की प्राथमिकता बनी हुई है और राजीव रंजन के इस बयान को उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा हमला
राजीव रंजन ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम में बुजुर्ग माता को कुर्सी दिलाने संबंधी संवेदनशील क्षण का मज़ाक उड़ाया गया, जो भारतीय जनमानस को स्वीकार्य नहीं है।
राजीव रंजन के अनुसार, 'राहुल गांधी 'सेल्फ-गोल' करने की कला में माहिर हो गए हैं। एक माँ के प्रति आम लोगों के सम्मान और श्रद्धा को समझे बिना ऐसी बातें कहना गलत है। अब तक उन्होंने जितने भी 'गूंज' कार्यक्रम किए हैं, वे बेमतलब साबित हुए हैं।'
आगे क्या होगा
बिहार में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और राहत एवं पुनर्वास कार्य जारी हैं। एनडीए नेताओं की सैलरी दान की पहल से मुख्यमंत्री राहत कोष को अतिरिक्त संसाधन मिलने की उम्मीद है, जिससे प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाना अधिक प्रभावी हो सकेगा। आगामी दिनों में गठबंधन के भीतर के मतभेदों के सुलझने और चुनाव अधिसूचना की दिशा पर सभी की नज़र रहेगी।