बाढ़ प्रभावित बिहार: सीएम सम्राट चौधरी ने ₹2.70 लाख का वेतन राहत कोष में दिया, BJP नेताओं ने भी योगदान किया
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 19 सितंबर 2026 को बाढ़ प्रभावित राज्य के लिए अपने एक माह के वेतन की राशि ₹2.70 लाख का चेक मुख्यमंत्री राहत कोष में प्रदान किया। बाढ़ से 15 जिले प्रभावित होने की स्थिति के बीच यह कदम राहत एवं सहायता कार्यों को गति देने के उद्देश्य से उठाया गया है। यह चेक लोक सेवक आवास स्थित 'संकल्प' में मुख्यमंत्री के सचिव लोकेश कुमार सिंह को सौंपा गया।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री चौधरी ने राज्य में बाढ़ और आपदा की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए समाज के समृद्ध एवं सक्षम लोगों से मुख्यमंत्री राहत कोष में अधिक से अधिक योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि राहत कोष आपदा की स्थिति में जरूरतमंद और प्रभावित परिवारों की सहायता का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
चौधरी ने स्पष्ट किया कि समाज के सक्षम लोगों की सक्रिय सहभागिता से राहत एवं सहायता के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने आमजन से भी आगे बढ़कर बाढ़ प्रभावित परिवारों की मदद का आह्वान किया।
BJP नेताओं का योगदान
इससे एक दिन पूर्व शुक्रवार को बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में ₹51 लाख का चेक सौंपा। सरावगी ने यह भी घोषणा की कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सभी विधायक, विधान पार्षद और सांसद अपने एक-एक माह के वेतन की राशि राहत कोष में देंगे।
इसी कड़ी में BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद नितिन नवीन ने भी अपने तीन महीने के वेतन की राशि ₹6,35,000 राहत कोष में अंशदान की है। इस प्रकार राजनीतिक स्तर पर मुख्यमंत्री राहत कोष में सहयोग की एक व्यापक श्रृंखला बनती दिख रही है।
बाढ़ की स्थिति और सरकारी राहत कार्य
राज्य के 15 जिले बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। प्रशासनिक मशीनरी को राहत और बचाव कार्यों में सक्रिय रखते हुए प्रभावित परिवारों तक जरूरी सुविधाएं पहुँचाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की ओर से प्रभावित इलाकों में राहत शिविरों के संचालन एवं आवश्यक सामग्री वितरण का कार्य जारी है।
सामूहिक भागीदारी की अपील
मुख्यमंत्री चौधरी ने इस संकट की घड़ी में सरकार के साथ समाज की सामूहिक भागीदारी को अनिवार्य बताया। उन्होंने भरोसा जताया कि राज्य के सक्षम नागरिक मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देकर बाढ़ प्रभावित परिवारों की सहायता के प्रयासों को मजबूत बनाएंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में मानसून की तीव्रता के कारण बाढ़ की स्थिति हर वर्ष गंभीर रूप लेती है और राहत तंत्र पर भारी दबाव पड़ता है। सामूहिक राजनीतिक इच्छाशक्ति और जन-सहयोग राहत कार्यों की दिशा तय करेंगे।