बिहार बाढ़: भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने मुख्यमंत्री राहत कोष में दिए ₹6,35,000, तीन माह का वेतन दान
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 18 सितंबर 2026 को बिहार में भीषण बाढ़ से त्रस्त परिवारों की मदद के लिए एक राज्यसभा सांसद के रूप में अपने तीन महीने के वेतन की राशि ₹6,35,000 मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराई। नवीन ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारें मिलकर प्रभावित लोगों तक राहत पहुँचाने में पूरी तत्परता से जुटी हैं।
बाढ़ पीड़ितों को अब तक की सहायता
राज्य सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को ₹7,000 प्रति परिवार के हिसाब से अब तक कुल ₹550 करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की जा चुकी है। नवीन के अनुसार, इस राहत वितरण को तेज़ करने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
ज़मीन पर राहत कार्यों की स्थिति
प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर, सामुदायिक रसोई (Community Kitchen), चिकित्सा शिविर और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की गई है। बचाव अभियान में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमें पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात हैं। किसानों की फसल क्षति का आकलन भी जारी है, ताकि कृषि नुकसान के अनुरूप मुआवज़ा दिया जा सके।
केंद्र सरकार का सहयोग
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और पीड़ितों से सीधे मुलाकात कर राहत एवं बचाव कार्यों का जायज़ा लिया। नवीन ने इसे केंद्र और राज्य के बीच समन्वय का सकारात्मक संकेत बताया। गौरतलब है कि बिहार में हर वर्ष मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति गंभीर हो जाती है, और कोसी, गंडक व बागमती नदियाँ उत्तर बिहार के ज़िलों को बार-बार प्रभावित करती हैं।
नितिन नवीन का व्यक्तिगत अंशदान
नवीन ने कहा कि संकट की इस घड़ी में सांसद के रूप में जनता के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाना उनका कर्तव्य है। उनके द्वारा दिए गए ₹6,35,000 मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा हुए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब सत्ता पक्ष पर बाढ़ राहत की पारदर्शिता को लेकर विपक्षी दलों की नज़र बनी हुई है।
आगे क्या होगा
नवीन ने आश्वस्त किया कि फसल क्षति के आकलन के बाद किसानों को अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी। राहत सामग्री और चिकित्सा सुविधाओं की आपूर्ति जारी रहेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि बाढ़ के बाद पुनर्वास और फसल ऋण माफ़ी ही दीर्घकालिक राहत का असली पैमाना होगी।