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बांग्लादेश गैस संकट: ढाका में बिल भरने के बाद भी घरों को नहीं मिल रही गैस, वैकल्पिक ईंधन पर मजबूर परिवार

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बांग्लादेश गैस संकट: ढाका में बिल भरने के बाद भी घरों को नहीं मिल रही गैस, वैकल्पिक ईंधन पर मजबूर परिवार

सारांश

बांग्लादेश में गैस की माँग और आपूर्ति के बीच रोज़ाना 110 करोड़ क्यूबिक फीट का गड्ढा है — और 21 जुलाई की मोहेशखाली आग ने इसे और गहरा कर दिया। ढाका के परिवार बिल भर रहे हैं, गैस पा नहीं रहे, और वैकल्पिक ईंधन पर अतिरिक्त खर्च कर रहे हैं। टेक्सटाइल उद्योग ठप, समाधान का कोई रोडमैप नहीं।

मुख्य बातें

ढाका के कई इलाकों में पिछले दो से तीन महीनों से गैस आपूर्ति न के बराबर है, जबकि उपभोक्ता टिटास गैस को हर महीने पूरा बिल दे रहे हैं।
पेट्रोबांग्ला के अनुसार, रोज़ाना गैस माँग 380 करोड़ क्यूबिक फीट है, लेकिन आपूर्ति केवल 265–270 करोड़ क्यूबिक फीट है।
21 जुलाई को मोहेशखाली में एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में आग से रोज़ाना 45 करोड़ क्यूबिक फीट की आपूर्ति प्रभावित हुई।
लालबाग की गृहिणी फारिया अहमद बोरशा के परिवार ने बताया कि वे 1,080 बांग्लादेशी टका मासिक बिल दे रहे हैं, पर 3–4 महीने से गैस नहीं मिली।
टेक्सटाइल, निटवेयर और रंगाई उद्योग बुरी तरह प्रभावित; कई फैक्ट्रियाँ आंशिक या पूर्ण रूप से बंद।
CAB के उपाध्यक्ष एस.एम.
नाजेर हुसैन ने माँग की कि अधूरी सेवा के एवज में पूरा बिल नहीं लिया जाना चाहिए।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका के दर्जनों इलाकों में पिछले दो से तीन महीनों से गंभीर गैस संकट जारी है — परिवार सरकारी गैस कंपनी टिटास गैस को हर महीने पूरा बिल चुका रहे हैं, लेकिन उन्हें आपूर्ति न के बराबर मिल रही है। इस असंतुलन ने लाखों उपभोक्ताओं को बिजली, एलपीजी सिलेंडर और रेस्तरां के खाने जैसे महंगे विकल्पों की ओर धकेल दिया है, जिससे घरेलू बजट पर दोहरी मार पड़ रही है।

संकट की जड़ें और मौजूदा स्थिति

आंकड़ों के अनुसार, पेट्रोबांग्ला के अनुमान के हवाले से बताया गया है कि बांग्लादेश में रोज़ाना गैस की माँग करीब 380 करोड़ क्यूबिक फीट है, जबकि वास्तविक आपूर्ति केवल 265 से 270 करोड़ क्यूबिक फीट के बीच सिमटी हुई है। यानी माँग और आपूर्ति के बीच प्रतिदिन 110 करोड़ क्यूबिक फीट से अधिक का अंतर है।

यह ऐसे समय में और गहरा हो गया जब 21 जुलाई को मोहेशखाली स्थित एक्सेलरेट एनर्जी के फ्लोटिंग एलएनजी टर्मिनल के विद्युत तंत्र में आग लग गई, जिससे रोज़ाना करीब 45 करोड़ क्यूबिक फीट की आपूर्ति प्रभावित हुई। बाद में आंशिक बहाली हुई, लेकिन पहले से चली आ रही कमी और गहरी हो गई।

आम परिवारों की दोहरी मुसीबत

ढाका के धनमंडी इलाके के निवासियों ने बताया कि उन्हें पिछले दो महीनों से गैस नहीं मिली, फिर भी टिटास गैस का मासिक बिल बदस्तूर आ रहा है। लालबाग की गृहिणी फारिया अहमद बोरशा ने बताया कि उनके परिवार को तीन से चार महीनों से लगभग कोई गैस नहीं मिली, फिर भी वे हर महीने 1,080 बांग्लादेशी टका का बिल चुका रहे हैं।

परिवारों को खाना पकाने, पानी गर्म करने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए बिजली, एलपीजी सिलेंडर और बाहर से खाना मँगाने जैसे विकल्पों पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि यह अतिरिक्त बोझ नौकरीपेशा और मध्यमवर्गीय परिवारों पर सबसे भारी पड़ रहा है, जिनकी आय नियमित रूप से नहीं बढ़ती।

उद्योग और बिजली उत्पादन पर असर

गैस की कमी का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। टेक्सटाइल, निटवेयर, रंगाई और फिनिशिंग से जुड़ी फैक्ट्रियाँ बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। कुछ इकाइयों ने उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया है, जबकि कई अपनी सामान्य क्षमता से बहुत कम पर चल रही हैं। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले वस्त्र निर्यात क्षेत्र पर यह संकट दीर्घकालिक नुकसान कर सकता है। इसके अलावा बिजली उत्पादन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

उपभोक्ता संगठन की माँग और विशेषज्ञों की राय

कंज्यूमर्स एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश (CAB) के उपाध्यक्ष एस.एम. नाजेर हुसैन ने कहा, 'सरकार ने बिना रुकावट गैस कनेक्शन देने का वादा किया है। लेकिन आप वह सेवा दे ही नहीं रहे हैं। तो फिर पूरा बिल क्यों लिया जाना चाहिए?' उन्होंने माँग की कि जब तक पूरी आपूर्ति नहीं होती, उपभोक्ताओं से आंशिक बिल ही लिया जाए।

नाजेर ने यह भी कहा कि ईंधन संकट से निपटने के लिए सरकार के पास कोई स्पष्ट और ठोस योजना दिखाई नहीं देती। विशेषज्ञों के अनुसार, देश के भीतर घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल तत्काल समाधान का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा।

आगे क्या उम्मीद

टिटास गैस ने चेतावनी दी है कि जब तक एलएनजी आपूर्ति में ठोस सुधार नहीं होता, उसके वितरण नेटवर्क में गैस का दबाव बेहद कम बना रह सकता है। यह संकट इस बात को भी उजागर करता है कि बांग्लादेश की ऊर्जा सुरक्षा किस कदर आयातित एलएनजी पर निर्भर हो चुकी है और घरेलू बुनियादी ढाँचे की कमज़ोरियाँ किसी एक घटना से भी पूरे तंत्र को चरमराने पर मजबूर कर देती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सेवा नहीं पा रहे — और सरकार के पास इस दोहरी मार का कोई स्पष्ट निवारण तंत्र नहीं है। जब तक घरेलू उत्पादन नहीं बढ़ता और आयात निर्भरता कम नहीं होती, ऐसे संकट बार-बार आते रहेंगे — और हर बार सबसे ज़्यादा नुकसान आम नागरिक और निर्यात-आधारित उद्योग उठाएँगे।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में गैस संकट इतना गंभीर क्यों हो गया है?
बांग्लादेश में रोज़ाना गैस की माँग करीब 380 करोड़ क्यूबिक फीट है, जबकि आपूर्ति केवल 265–270 करोड़ क्यूबिक फीट है। 21 जुलाई को मोहेशखाली के एलएनजी टर्मिनल में आग लगने से स्थिति और बिगड़ गई, जिसने रोज़ाना करीब 45 करोड़ क्यूबिक फीट की आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद कर दी।
ढाका के उपभोक्ताओं को गैस न मिलने पर भी बिल क्यों देना पड़ रहा है?
सरकारी गैस कंपनी टिटास गैस का बिलिंग सिस्टम मासिक फ्लैट दर पर आधारित है, जो आपूर्ति की वास्तविक मात्रा से स्वतंत्र है। उपभोक्ता संगठन CAB ने इस व्यवस्था पर आपत्ति जताई है और माँग की है कि अधूरी सेवा के लिए आंशिक बिल ही लिया जाए।
गैस संकट से बांग्लादेश के उद्योगों पर क्या असर पड़ा है?
टेक्सटाइल, निटवेयर, रंगाई और फिनिशिंग फैक्ट्रियाँ सबसे ज़्यादा प्रभावित हुई हैं। कुछ ने उत्पादन पूरी तरह बंद कर दिया है, जबकि कई सामान्य क्षमता से बहुत कम पर काम कर रही हैं। यह बांग्लादेश के निर्यात-केंद्रित वस्त्र उद्योग के लिए दीर्घकालिक नुकसान का कारण बन सकता है।
क्या गैस संकट का कोई तत्काल समाधान है?
विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल तत्काल समाधान का कोई रास्ता नज़र नहीं आ रहा। टिटास गैस ने चेतावनी दी है कि जब तक एलएनजी आपूर्ति में ठोस सुधार नहीं होता, गैस का दबाव बेहद कम बना रहेगा। घरेलू गैस उत्पादन बढ़ाने से कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन यह दीर्घकालिक उपाय है।
मोहेशखाली एलएनजी टर्मिनल में आग से क्या हुआ?
21 जुलाई को मोहेशखाली में एक्सेलरेट एनर्जी के फ्लोटिंग एलएनजी टर्मिनल के विद्युत तंत्र में आग लगने से रोज़ाना करीब 45 करोड़ क्यूबिक फीट गैस की आपूर्ति बाधित हुई। बाद में आंशिक बहाली हुई, लेकिन इस घटना ने पहले से चली आ रही कमी को और बढ़ा दिया और घरों, उद्योगों व बिजली उत्पादन पर असर डाला।
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