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बांग्लादेश में सीएनजी संकट: ढाका में परिवहन ठप, रसोई गैस भी गायब

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बांग्लादेश में सीएनजी संकट: ढाका में परिवहन ठप, रसोई गैस भी गायब

सारांश

बांग्लादेश में 21 जुलाई को कॉक्स बाज़ार एफएसआरयू में लगी आग ने पूरे देश की गैस आपूर्ति को झकझोर दिया है। ढाका की सड़कों पर ऑटो-रिक्शा गायब हैं, किराए तिगुने हो गए हैं और घरों में चूल्हे नहीं जल रहे — यह संकट सिर्फ ईंधन का नहीं, बांग्लादेश की ऊर्जा-निर्भरता की कमज़ोर कड़ी का खुलासा है।

मुख्य बातें

21 जुलाई को कॉक्स बाज़ार स्थित एफएसआरयू में लगी आग से बांग्लादेश की गैस आपूर्ति घटकर 2,150 एमएमसीएफडी से नीचे आई, जबकि राष्ट्रीय मांग 3,800 एमएमसीएफडी है।
ढाका में सीएनजी ऑटो-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन वाहनों की भारी कमी से छात्र, कर्मचारी और मरीज सबसे अधिक प्रभावित।
कॉन्ट्रैक्ट किराया सामान्य से दोगुना से तिगुना तक बढ़ा; मीटर से किराया लेना बंद।
परिवहन मालिकों के आधे से ज्यादा वाहन गैस संकट के कारण सड़क से बाहर।
मीरपुर, बद्दा, मोहम्मदपुर सहित कई इलाकों में घरेलू गैस का दबाव शून्य; निम्न आय परिवार लकड़ी के चूल्हे पर निर्भर।

बांग्लादेश में गहराते सीएनजी संकट ने ढाका समेत कई शहरों में आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है — सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन नदारद है, किराए दोगुने-तिगुने हो गए हैं और घरों की रसोई में गैस का दबाव लगभग शून्य हो गया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस संकट की जड़ 21 जुलाई को कॉक्स बाज़ार में एक फ्लोटिंग स्टोरेज एवं रीगैसिफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) में लगी आग है, जिसने देश की गैस आपूर्ति व्यवस्था को गंभीर रूप से बाधित कर दिया।

संकट की जड़: कॉक्स बाज़ार में एफएसआरयू में आग

रिपोर्टों के अनुसार, 21 जुलाई को कॉक्स बाज़ार स्थित एफएसआरयू के दो बॉयलरों में से एक में आग लग गई, जिसके कारण उस केंद्र को पूरी तरह बंद करना पड़ा। इस घटना के बाद बांग्लादेश की राष्ट्रीय गैस आपूर्ति घटकर 2,150 मिलियन क्यूबिक फीट प्रतिदिन (एमएमसीएफडी) से भी नीचे आ गई है। गौरतलब है कि पिछले एक वर्ष में औसत आपूर्ति 2,700 एमएमसीएफडी थी, जबकि देश की राष्ट्रीय दैनिक मांग लगभग 3,800 एमएमसीएफडी है — यानी आपूर्ति और मांग के बीच की खाई अब और चौड़ी हो गई है।

परिवहन सेवाओं पर असर: घंटों की कतार, फिर भी खाली हाथ

द ढाका ट्रिब्यून ने कई वाहन चालकों के हवाले से बताया कि वे गैस भरवाने के लिए रात देर तक लाइन में लगते हैं और अगली सुबह या दोपहर तक प्रतीक्षा करते हैं, फिर भी पर्याप्त गैस नहीं मिल पाती। इस कारण सीएनजी चालित ऑटो-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन वाहनों की संख्या सड़कों पर बेहद कम हो गई है। बनश्री ई-ब्लॉक एवेन्यू रोड पर खड़े एक यात्री ने ढाका ट्रिब्यून से कहा, 'अन्य दिनों में मैं यहाँ खड़े होकर आसानी से सीएनजी लेता था। लेकिन आज 1 घंटे से ज्यादा इंतजार के बाद भी मुझे एक भी खाली वाहन नहीं मिला।'

परिवहन मालिकों ने बताया कि गैस आपूर्ति की कमी के कारण उनके आधे से ज्यादा वाहन सड़क पर नहीं उतर पा रहे, जिससे मालिकों और चालकों — दोनों को वित्तीय नुकसान हो रहा है। छात्रों, कार्यालय जाने वालों और मरीजों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुँचने में गंभीर कठिनाइयाँ हो रही हैं।

किराए में मनमानी बढ़ोतरी

यात्रियों ने बताया कि सार्वजनिक परिवहन की किल्लत का फायदा उठाकर कई चालक मनमाना किराया वसूल रहे हैं। सीएनजी ऑटो-रिक्शा मीटर के अनुसार किराया नहीं ले रहे, बल्कि कॉन्ट्रैक्ट किराया सामान्य से दोगुना और कुछ मामलों में तीन गुना तक हो गया है। यह ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश पहले से ही महँगाई के दबाव से जूझ रहा है।

घरेलू रसोई पर संकट की मार

गैस आपूर्ति बाधित होने का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं है — मीरपुर, बद्दा, कलाबागान, काफरुल, मोहम्मदपुर, काजीपाड़ा, वेस्ट तेजतुरी बाज़ार और रामपुरा सहित ढाका के कई इलाकों के निवासियों ने बताया कि कई दिनों से गैस के चूल्हे नहीं जल रहे या उपयोग के लायक नहीं हैं।

निम्न आय वर्ग के कई परिवार अस्थायी मिट्टी के चूल्हे बनाकर लकड़ी से खाना पकाने पर मजबूर हो गए हैं। जो परिवार खर्च उठा सकते हैं, उन्होंने महँगे इलेक्ट्रिक कुकर या एलपीजी सिलेंडर का सहारा लिया है — जिससे उनका मासिक घरेलू बजट और बिगड़ गया है।

आगे क्या

फिलहाल क्षतिग्रस्त एफएसआरयू की मरम्मत की समयसीमा स्पष्ट नहीं है और आपूर्ति बहाली को लेकर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है। यदि मरम्मत में और देरी हुई, तो आपूर्ति-मांग का यह अंतर बांग्लादेश के औद्योगिक उत्पादन और आम नागरिकों की दैनिक ज़िंदगी दोनों पर दीर्घकालिक असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह ऊर्जा विविधीकरण की अनुपस्थिति का प्रमाण है। आलोचकों का कहना है कि बांग्लादेश दशकों से आयातित एलएनजी पर अत्यधिक निर्भर रहा है और घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने में पिछड़ा है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इस संकट की सबसे बड़ी मार निम्न आय वर्ग पर पड़ी है — जो न महँगे एलपीजी सिलेंडर खरीद सकते हैं, न तिगुना किराया दे सकते हैं।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में सीएनजी संकट क्यों आया?
रिपोर्टों के अनुसार, 21 जुलाई को कॉक्स बाज़ार स्थित एक फ्लोटिंग स्टोरेज एवं रीगैसिफिकेशन यूनिट (एफएसआरयू) में आग लगने से उसके दो बॉयलरों में से एक क्षतिग्रस्त हो गया और केंद्र को बंद करना पड़ा। इससे बांग्लादेश की गैस आपूर्ति 2,150 एमएमसीएफडी से नीचे आ गई, जो राष्ट्रीय मांग 3,800 एमएमसीएफडी से बहुत कम है।
ढाका में परिवहन पर क्या असर पड़ा है?
ढाका में सीएनजी चालित ऑटो-रिक्शा और सार्वजनिक परिवहन वाहनों की भारी कमी हो गई है। परिवहन मालिकों के आधे से ज्यादा वाहन गैस न मिलने के कारण नहीं चल पा रहे, और जो वाहन चल रहे हैं वे मीटर से किराया नहीं ले रहे — कॉन्ट्रैक्ट किराया दोगुना से तिगुना तक बढ़ गया है।
घरेलू रसोई पर इस संकट का क्या प्रभाव है?
मीरपुर, बद्दा, कलाबागान, मोहम्मदपुर समेत ढाका के कई इलाकों में घरेलू गैस का दबाव लगभग शून्य हो गया है। निम्न आय वर्ग के परिवार लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने को मजबूर हैं, जबकि जो परिवार खर्च उठा सकते हैं वे महँगे एलपीजी सिलेंडर या इलेक्ट्रिक कुकर का उपयोग कर रहे हैं।
बांग्लादेश में गैस की सामान्य आपूर्ति कितनी थी और अब कितनी है?
पिछले एक वर्ष में बांग्लादेश में औसत गैस आपूर्ति 2,700 एमएमसीएफडी थी, जो अब घटकर 2,150 एमएमसीएफडी से नीचे आ गई है। राष्ट्रीय दैनिक मांग लगभग 3,800 एमएमसीएफडी है, यानी मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर अब और गहरा हो गया है।
यह संकट कब तक हल होने की उम्मीद है?
फिलहाल क्षतिग्रस्त एफएसआरयू की मरम्मत की कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। अधिकारियों की ओर से आपूर्ति बहाली को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है, जिससे संकट के और लंबा खिंचने की आशंका है।
राष्ट्र प्रेस
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