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बांग्लादेश गैस संकट: 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियां बंद, हजारों श्रमिक प्रभावित

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बांग्लादेश गैस संकट: 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियां बंद, हजारों श्रमिक प्रभावित

सारांश

बांग्लादेश में 21 जुलाई से चला आ रहा गैस संकट अब औद्योगिक तबाही का रूप ले रहा है। नरसिंदी में 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियाँ ठप, परिचालन लागत पाँच गुना उछली और निर्यात शिपमेंट खतरे में — देश के 70% कपड़ा उत्पादन का केंद्र संकट की चपेट में है।

मुख्य बातें

21 जुलाई 2026 से शुरू हुआ बांग्लादेश का गैस संकट अब औद्योगिक क्षेत्रों में गंभीर रूप ले चुका है।
एक्सेलरेट एनर्जी का एलएनजी टर्मिनल बंद होने से संकट और गहराया; राष्ट्रीय ग्रिड की अधिकांश गैस बिजली संयंत्रों को दी जा रही है।
नरसिंदी में गैस दबाव शून्य होने से 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद; यह क्षेत्र देश के 70% कपड़ों की आपूर्ति करता है।
गैस जनरेटर फ्यूल ऑयल पर चलाने से परिचालन लागत पाँच गुना बढ़ी; उत्पादन में 20-25% तक गिरावट।
मयमनसिंह के भालुका क्षेत्र की 99 गैस-निर्भर फैक्ट्रियाँ प्रभावित; 20 फैक्ट्रियों के कर्मचारी आंशिक छुट्टी पर।
निर्यात शिपमेंट में देरी और महँगी हवाई माल ढुलाई का जोखिम बढ़ा।

बांग्लादेश में 21 जुलाई 2026 से शुरू हुआ गैस संकट अब देश के औद्योगिक ढाँचे को गंभीर रूप से चोट पहुँचा रहा है। गैस की भारी किल्लत के चलते सैकड़ों फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, हजारों श्रमिकों को छुट्टी पर भेजा जा रहा है और निर्यात शिपमेंट में देरी का खतरा मंडरा रहा है।

संकट की जड़: एलएनजी टर्मिनल बंद

एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में गैस भंडार खत्म होने के बाद बुधवार को उसके बंद होने से स्थिति और बिगड़ गई। राष्ट्रीय ग्रिड में उपलब्ध अधिकांश गैस बिजली संयंत्रों को दी जा रही है, जिससे गैस पर निर्भर उद्योगों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही। वस्त्र, रेडीमेड गारमेंट, इस्पात, काँच और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं।

नरसिंदी में सबसे गंभीर स्थिति

नरसिंदी जिले में गैस का दबाव लगभग शून्य होने के कारण पिछले दो दिनों में 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद हो गया है। उद्योगपतियों के अनुसार सामान्यतः 15 पीएसआई रहने वाला गैस दबाव पहले घटकर 2-4 पीएसआई रह गया था और अब लगभग शून्य हो चुका है। गौरतलब है कि नरसिंदी देश के करीब 70 प्रतिशत कपड़ों की आपूर्ति करता है, जो इस संकट की व्यापकता को और गंभीर बना देता है।

गाजीपुर, नारायणगंज और सावर के गारमेंट उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हैं। कई फैक्ट्रियाँ उत्पादन जारी रखने के लिए कर्मचारियों को अलग-अलग शिफ्ट में काम करा रही हैं, फिर भी उत्पादन में 20-25 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। गैस से चलने वाले जनरेटर अब फ्यूल ऑयल से चलाए जा रहे हैं, जिससे परिचालन लागत लगभग पाँच गुना बढ़ गई है।

भालुका और चट्टोग्राम में भी असर

मयमनसिंह के भालुका औद्योगिक क्षेत्र में 20 फैक्ट्रियों के कर्मचारियों को आंशिक रूप से छुट्टी पर भेजा गया है। यहाँ की 293 फैक्ट्रियों में से 99 गैस पर निर्भर हैं और लगभग सभी इस संकट की चपेट में हैं। टिटास गैस के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार इलाके की गैस लाइनों का दबाव 140 और 50 पीएसआई से घटकर 30-50 पीएसआई रह गया है।

चट्टोग्राम एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन, कर्णफुली ईपीजेड, बायेजिद और कालुरघाट औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियाँ भी बेहद कम गैस दबाव के कारण अपनी क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रही हैं।

श्रमिकों और निर्यात पर असर

गैस संकट के कारण फैक्ट्री मालिकों को उत्पादन बंद रहने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन देना पड़ रहा है। इसके साथ ही निर्यात आपूर्ति में देरी से समय पर शिपमेंट प्रभावित होने और महँगे हवाई माल ढुलाई का जोखिम बढ़ गया है।

बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोर्शेद सरवर सोहेल ने कहा कि यह संकट केवल फैक्ट्री मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमिकों और देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल रहा है।

आगे की राह

यह संकट ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र वैश्विक ब्रांडों के लिए एक प्रमुख निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित है। यदि गैस आपूर्ति शीघ्र बहाल नहीं होती, तो निर्यात अनुबंधों पर जुर्माना और दीर्घकालिक प्रतिष्ठा क्षति का खतरा बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक ऊर्जा नीति की कमज़ोरी का उजागर होना है — देश ने एलएनजी आयात पर अत्यधिक निर्भरता बना ली, लेकिन भंडारण क्षमता और वैकल्पिक आपूर्ति शृंखला नहीं बनाई। नरसिंदी जैसे क्षेत्र, जो देश के 70% कपड़ा उत्पादन के केंद्र हैं, के ठप होने से यह स्पष्ट है कि ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक नीति के बीच की खाई कितनी गहरी है। यदि यह संकट लंबा खिंचा, तो वैश्विक ब्रांड वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर सकते हैं — जो बांग्लादेश के निर्यात-आधारित विकास मॉडल के लिए दीर्घकालिक खतरा होगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बांग्लादेश में गैस संकट कब से और क्यों शुरू हुआ?
बांग्लादेश में यह गैस संकट 21 जुलाई 2026 से शुरू हुआ। एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में गैस भंडार खत्म होने के बाद उसके बंद होने से स्थिति और बिगड़ी, तथा राष्ट्रीय ग्रिड की अधिकांश गैस बिजली संयंत्रों को दी जाने लगी, जिससे उद्योगों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पाई।
गैस संकट से बांग्लादेश की कौन-सी फैक्ट्रियाँ सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं?
नरसिंदी जिले में 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियाँ बंद हो गई हैं। इसके अलावा गाजीपुर, नारायणगंज, सावर, मयमनसिंह के भालुका औद्योगिक क्षेत्र तथा चट्टोग्राम एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन की फैक्ट्रियाँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं।
गैस संकट का श्रमिकों पर क्या असर पड़ रहा है?
हजारों श्रमिकों को आंशिक या पूर्ण छुट्टी पर भेजा जा रहा है। मयमनसिंह के भालुका क्षेत्र में 20 फैक्ट्रियों के कर्मचारी आंशिक छुट्टी पर हैं, जबकि फैक्ट्री मालिकों को उत्पादन बंद रहने के बावजूद वेतन देना पड़ रहा है।
गैस की कमी से फैक्ट्रियों की परिचालन लागत पर क्या असर पड़ा?
गैस जनरेटर बंद होने पर फैक्ट्रियाँ फ्यूल ऑयल का उपयोग कर रही हैं, जिससे परिचालन लागत लगभग पाँच गुना बढ़ गई है। साथ ही उत्पादन में 20-25 प्रतिशत तक की गिरावट आई है और निर्यात शिपमेंट में देरी से महँगी हवाई माल ढुलाई का जोखिम भी बढ़ गया है।
बांग्लादेश के निर्यात पर इस संकट का दीर्घकालिक असर क्या हो सकता है?
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोर्शेद सरवर सोहेल के अनुसार यह संकट श्रमिकों और देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर डाल रहा है। समय पर शिपमेंट न होने से निर्यात अनुबंधों पर जुर्माना और वैश्विक ब्रांडों का भरोसा कमज़ोर होने का खतरा है।
राष्ट्र प्रेस
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