बांग्लादेश गैस संकट: 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियां बंद, हजारों श्रमिक प्रभावित
सारांश
मुख्य बातें
बांग्लादेश में 21 जुलाई 2026 से शुरू हुआ गैस संकट अब देश के औद्योगिक ढाँचे को गंभीर रूप से चोट पहुँचा रहा है। गैस की भारी किल्लत के चलते सैकड़ों फैक्ट्रियों में उत्पादन ठप हो गया है, हजारों श्रमिकों को छुट्टी पर भेजा जा रहा है और निर्यात शिपमेंट में देरी का खतरा मंडरा रहा है।
संकट की जड़: एलएनजी टर्मिनल बंद
एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में गैस भंडार खत्म होने के बाद बुधवार को उसके बंद होने से स्थिति और बिगड़ गई। राष्ट्रीय ग्रिड में उपलब्ध अधिकांश गैस बिजली संयंत्रों को दी जा रही है, जिससे गैस पर निर्भर उद्योगों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल पा रही। वस्त्र, रेडीमेड गारमेंट, इस्पात, काँच और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं।
नरसिंदी में सबसे गंभीर स्थिति
नरसिंदी जिले में गैस का दबाव लगभग शून्य होने के कारण पिछले दो दिनों में 100 से अधिक टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद हो गया है। उद्योगपतियों के अनुसार सामान्यतः 15 पीएसआई रहने वाला गैस दबाव पहले घटकर 2-4 पीएसआई रह गया था और अब लगभग शून्य हो चुका है। गौरतलब है कि नरसिंदी देश के करीब 70 प्रतिशत कपड़ों की आपूर्ति करता है, जो इस संकट की व्यापकता को और गंभीर बना देता है।
गाजीपुर, नारायणगंज और सावर के गारमेंट उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित हैं। कई फैक्ट्रियाँ उत्पादन जारी रखने के लिए कर्मचारियों को अलग-अलग शिफ्ट में काम करा रही हैं, फिर भी उत्पादन में 20-25 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। गैस से चलने वाले जनरेटर अब फ्यूल ऑयल से चलाए जा रहे हैं, जिससे परिचालन लागत लगभग पाँच गुना बढ़ गई है।
भालुका और चट्टोग्राम में भी असर
मयमनसिंह के भालुका औद्योगिक क्षेत्र में 20 फैक्ट्रियों के कर्मचारियों को आंशिक रूप से छुट्टी पर भेजा गया है। यहाँ की 293 फैक्ट्रियों में से 99 गैस पर निर्भर हैं और लगभग सभी इस संकट की चपेट में हैं। टिटास गैस के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार इलाके की गैस लाइनों का दबाव 140 और 50 पीएसआई से घटकर 30-50 पीएसआई रह गया है।
चट्टोग्राम एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन, कर्णफुली ईपीजेड, बायेजिद और कालुरघाट औद्योगिक क्षेत्रों की फैक्ट्रियाँ भी बेहद कम गैस दबाव के कारण अपनी क्षमता से काफी कम उत्पादन कर रही हैं।
श्रमिकों और निर्यात पर असर
गैस संकट के कारण फैक्ट्री मालिकों को उत्पादन बंद रहने के बावजूद कर्मचारियों का वेतन देना पड़ रहा है। इसके साथ ही निर्यात आपूर्ति में देरी से समय पर शिपमेंट प्रभावित होने और महँगे हवाई माल ढुलाई का जोखिम बढ़ गया है।
बांग्लादेश निटवेयर मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मोर्शेद सरवर सोहेल ने कहा कि यह संकट केवल फैक्ट्री मालिकों तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रमिकों और देश की समग्र अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल रहा है।
आगे की राह
यह संकट ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश का रेडीमेड गारमेंट क्षेत्र वैश्विक ब्रांडों के लिए एक प्रमुख निर्माण केंद्र के रूप में स्थापित है। यदि गैस आपूर्ति शीघ्र बहाल नहीं होती, तो निर्यात अनुबंधों पर जुर्माना और दीर्घकालिक प्रतिष्ठा क्षति का खतरा बढ़ सकता है।