कर्नाटक मंत्री अजय सिंह बोले — सिद्धारमैया की मूर्ति बिना अनुमति लगाई थी, हटाना नियमानुसार
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के सिंचाई मंत्री अजय सिंह ने 18 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि कलबुर्गी में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नौ फुट ऊँची मूर्ति हटाए जाने के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था — मूर्ति बिना आवश्यक अनुमति के स्थापित की गई थी और नियमों के तहत उसे हटाया गया। पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे और इस कार्रवाई के बीच किसी भी संबंध की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।
मूर्ति हटाने की पृष्ठभूमि
कलबुर्गी के हाईकोर्ट सर्कल पर सिद्धारमैया के समर्थकों ने रातोंरात यह नौ फुट ऊँची मूर्ति स्थापित की थी। जैसे ही अधिकारियों को पता चला कि जिला प्रशासन या कलबुर्गी सिटी कॉरपोरेशन से कोई अनुमति नहीं ली गई है, गुरुवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मूर्ति हटा दी गई। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं था — लगभग तीन वर्ष पहले भी इसी स्थान पर सिद्धारमैया की एक मूर्ति लगाई गई थी, जिसे उस समय भी अधिकारियों ने हटा दिया था।
मंत्री अजय सिंह का बयान
मंत्री अजय सिंह ने कहा, 'किसी भी मूर्ति को लगाने के लिए नियम होते हैं। सिद्धारमैया की मूर्ति इसी वजह से हटाई गई थी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे और मूर्ति हटाने के बीच कोई संबंध नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि न तो सिद्धारमैया और न ही शिवकुमार को मूर्ति लगाने के बारे में पहले से जानकारी थी।
गौरतलब है कि अजय सिंह कलबुर्गी जिले से ही आते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने कहा, 'शिवकुमार ने बार-बार कहा है कि सिद्धारमैया उनके नेता हैं। इस मामले को लेकर कोई भ्रम नहीं है।'
कौन थे मूर्ति लगाने वाले
अधिकारियों के अनुसार, मूर्ति स्थापित करने में कुरुबा समुदाय के सदस्यों सहित लगभग 8 से 10 लोग शामिल थे। कथित तौर पर यह समूह लंबे समय से माँग करता रहा है कि हाईकोर्ट सर्कल का नामकरण सिद्धारमैया के नाम पर किया जाए। यही समूह कथित तौर पर करीब तीन वर्ष पहले भी इसी स्थान पर मूर्ति लगाने में शामिल था।
राजनीतिक अटकलों का आधार
यह ताजा मूर्ति उस मार्ग पर लगाई गई थी जिससे मुख्यमंत्री शिवकुमार अपने कलबुर्गी दौरे और गनागापुरा मंदिर की यात्रा के दौरान गुजरे थे, जिससे कार्रवाई के समय को लेकर अटकलें उठने लगीं। हालाँकि अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह प्रशासनिक थी और मूर्ति हटाने के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया था।
आगे क्या
यह घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर छुपी प्रतिस्पर्धा की चर्चाएँ समय-समय पर उठती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति मूर्ति लगाने वालों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का निर्णय प्रशासन स्तर पर लिया जाएगा।