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कर्नाटक मंत्री अजय सिंह बोले — सिद्धारमैया की मूर्ति बिना अनुमति लगाई थी, हटाना नियमानुसार

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कर्नाटक मंत्री अजय सिंह बोले — सिद्धारमैया की मूर्ति बिना अनुमति लगाई थी, हटाना नियमानुसार

सारांश

कलबुर्गी में सिद्धारमैया की 9 फुट ऊँची मूर्ति रातोंरात लगाने के बाद प्रशासन ने उसे हटा दिया। मंत्री अजय सिंह ने साफ किया — न अनुमति थी, न राजनीति; लेकिन मूर्ति उसी रास्ते पर थी जहाँ से CM शिवकुमार का काफिला गुजरा, जिससे अटकलें तेज हो गईं।

मुख्य बातें

कलबुर्गी के हाईकोर्ट सर्कल पर रातोंरात स्थापित सिद्धारमैया की 9 फुट ऊँची मूर्ति को कलबुर्गी सिटी कॉरपोरेशन ने गुरुवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच हटाया।
मूर्ति हटाने का कारण जिला प्रशासन या सिटी कॉरपोरेशन से आवश्यक अनुमति का अभाव बताया गया।
सिंचाई मंत्री अजय सिंह ने कहा — मूर्ति हटाने और मुख्यमंत्री डी.के.
शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे के बीच कोई राजनीतिक संबंध नहीं ।
मूर्ति स्थापित करने में कुरुबा समुदाय के लगभग 8 से 10 लोग शामिल थे; समूह हाईकोर्ट सर्कल का नामकरण सिद्धारमैया के नाम पर करने की माँग करता रहा है।
करीब तीन वर्ष पहले भी इसी स्थान पर इसी समूह ने मूर्ति लगाई थी, जिसे तब भी अधिकारियों ने हटा दिया था।

कर्नाटक के सिंचाई मंत्री अजय सिंह ने 18 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि कलबुर्गी में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की नौ फुट ऊँची मूर्ति हटाए जाने के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं था — मूर्ति बिना आवश्यक अनुमति के स्थापित की गई थी और नियमों के तहत उसे हटाया गया। पत्रकारों से बात करते हुए मंत्री ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे और इस कार्रवाई के बीच किसी भी संबंध की संभावना को पूरी तरह खारिज किया।

मूर्ति हटाने की पृष्ठभूमि

कलबुर्गी के हाईकोर्ट सर्कल पर सिद्धारमैया के समर्थकों ने रातोंरात यह नौ फुट ऊँची मूर्ति स्थापित की थी। जैसे ही अधिकारियों को पता चला कि जिला प्रशासन या कलबुर्गी सिटी कॉरपोरेशन से कोई अनुमति नहीं ली गई है, गुरुवार को कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच मूर्ति हटा दी गई। उल्लेखनीय है कि यह पहली बार नहीं था — लगभग तीन वर्ष पहले भी इसी स्थान पर सिद्धारमैया की एक मूर्ति लगाई गई थी, जिसे उस समय भी अधिकारियों ने हटा दिया था।

मंत्री अजय सिंह का बयान

मंत्री अजय सिंह ने कहा, 'किसी भी मूर्ति को लगाने के लिए नियम होते हैं। सिद्धारमैया की मूर्ति इसी वजह से हटाई गई थी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे और मूर्ति हटाने के बीच कोई संबंध नहीं है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि न तो सिद्धारमैया और न ही शिवकुमार को मूर्ति लगाने के बारे में पहले से जानकारी थी।

गौरतलब है कि अजय सिंह कलबुर्गी जिले से ही आते हैं और पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने कहा, 'शिवकुमार ने बार-बार कहा है कि सिद्धारमैया उनके नेता हैं। इस मामले को लेकर कोई भ्रम नहीं है।'

कौन थे मूर्ति लगाने वाले

अधिकारियों के अनुसार, मूर्ति स्थापित करने में कुरुबा समुदाय के सदस्यों सहित लगभग 8 से 10 लोग शामिल थे। कथित तौर पर यह समूह लंबे समय से माँग करता रहा है कि हाईकोर्ट सर्कल का नामकरण सिद्धारमैया के नाम पर किया जाए। यही समूह कथित तौर पर करीब तीन वर्ष पहले भी इसी स्थान पर मूर्ति लगाने में शामिल था।

राजनीतिक अटकलों का आधार

यह ताजा मूर्ति उस मार्ग पर लगाई गई थी जिससे मुख्यमंत्री शिवकुमार अपने कलबुर्गी दौरे और गनागापुरा मंदिर की यात्रा के दौरान गुजरे थे, जिससे कार्रवाई के समय को लेकर अटकलें उठने लगीं। हालाँकि अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह प्रशासनिक थी और मूर्ति हटाने के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया था।

आगे क्या

यह घटना ऐसे समय में आई है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर छुपी प्रतिस्पर्धा की चर्चाएँ समय-समय पर उठती रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि बिना अनुमति मूर्ति लगाने वालों के खिलाफ आगे की कार्रवाई का निर्णय प्रशासन स्तर पर लिया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन समय की विडंबना अनदेखी नहीं की जा सकती — मूर्ति ठीक उस मार्ग पर थी जहाँ से मुख्यमंत्री शिवकुमार का काफिला गुजरा। कर्नाटक कांग्रेस में सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच नेतृत्व को लेकर जो अनकही प्रतिस्पर्धा सार्वजनिक चर्चा में बनी रहती है, उसकी पृष्ठभूमि में यह 'संयोग' स्वाभाविक रूप से सवाल उठाता है। यह तीसरी बार नहीं है जब बिना अनुमति मूर्ति लगाने-हटाने का यह चक्र दोहराया गया — असली सवाल यह है कि इस बार भी कोई जवाबदेही क्यों नहीं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलबुर्गी में सिद्धारमैया की मूर्ति क्यों हटाई गई?
कलबुर्गी सिटी कॉरपोरेशन ने मूर्ति इसलिए हटाई क्योंकि उसे जिला प्रशासन या कॉरपोरेशन से आवश्यक अनुमति लिए बिना स्थापित किया गया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई थी।
मंत्री अजय सिंह ने मूर्ति विवाद पर क्या कहा?
कर्नाटक के सिंचाई मंत्री अजय सिंह ने कहा कि मूर्ति हटाने के पीछे कोई राजनीतिक मकसद नहीं है और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के कलबुर्गी दौरे से इसका कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि न सिद्धारमैया और न शिवकुमार को मूर्ति लगाने की पहले से जानकारी थी।
मूर्ति किसने लगाई थी और उनकी माँग क्या थी?
अधिकारियों के अनुसार मूर्ति स्थापित करने में कुरुबा समुदाय के सदस्यों सहित लगभग 8 से 10 लोग शामिल थे। यह समूह कथित तौर पर हाईकोर्ट सर्कल का नामकरण सिद्धारमैया के नाम पर किए जाने की माँग करता रहा है।
क्या इससे पहले भी कलबुर्गी में सिद्धारमैया की मूर्ति हटाई गई है?
हाँ, लगभग तीन वर्ष पहले भी इसी हाईकोर्ट सर्कल पर सिद्धारमैया की मूर्ति लगाई गई थी, जिसे उस समय भी अधिकारियों ने हटा दिया था। यह उसी समूह की दूसरी ऐसी कोशिश बताई जा रही है।
मूर्ति हटाने और CM शिवकुमार के दौरे को लेकर अटकलें क्यों उठीं?
मूर्ति उसी मार्ग पर लगाई गई थी जिससे मुख्यमंत्री शिवकुमार अपने कलबुर्गी दौरे और गनागापुरा मंदिर यात्रा के दौरान गुजरे थे, जिससे कार्रवाई के समय को लेकर राजनीतिक अटकलें लगने लगीं। हालाँकि अधिकारियों और मंत्री अजय सिंह दोनों ने इन अटकलों को खारिज किया है।
राष्ट्र प्रेस
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