18 सितंबर 2026
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प्रत्यक्ष कर संग्रह 13% बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़, CBDT का वित्त वर्ष 2026-27 का ताज़ा डेटा

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प्रत्यक्ष कर संग्रह 13% बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़, CBDT का वित्त वर्ष 2026-27 का ताज़ा डेटा

सारांश

चालू वित्त वर्ष के पहले साढ़े पाँच महीनों में ही भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13% बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़ पहुँच गया। कॉर्पोरेट कर में 19.48% और STT में 53% की बढ़ोतरी इस उछाल की मुख्य वजह है — और राजकोषीय घाटा भी पिछले साल से बेहतर स्थिति में है।

मुख्य बातें

CBDT के अनुसार 1 अप्रैल से 17 सितंबर 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13% बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़ पहुँचा।
सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 15% से अधिक बढ़कर ₹14.3 लाख करोड़ ; रिफंड 29% बढ़कर ₹2.2 लाख करोड़ पार।
कॉर्पोरेट कर संग्रह 19.48% बढ़कर ₹5.56 लाख करोड़ ; STT संग्रह 53% उछलकर ₹40,214 करोड़ ।
एडवांस टैक्स संग्रह 16.18% वृद्धि के साथ ₹5.22 लाख करोड़ पर पहुँचा।
अप्रैल–जुलाई 2026 में राजकोषीय घाटा ₹4.55 लाख करोड़ , पूरे वर्ष के लक्ष्य का 26.8% — पिछले वर्ष के 29.9% से कम।
वित्त वर्ष 2027 का राजकोषीय घाटा लक्ष्य ₹16.96 लाख करोड़ यानी GDP का 4.3% ।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने 18 सितंबर 2026 को बताया कि चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 13 प्रतिशत बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़ पर पहुँच गया है। आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि कॉर्पोरेट करों और प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) दोनों मोर्चों पर मज़बूत प्रदर्शन से संचालित है।

सकल और शुद्ध संग्रह का विवरण

CBDT के आँकड़ों के मुताबिक, सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक बढ़कर ₹14.3 लाख करोड़ हो गया है। इस दौरान रिफंड जारी करने में 29 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई और यह राशि ₹2.2 लाख करोड़ के पार पहुँच गई।

शुद्ध संग्रह और सकल संग्रह के बीच यही अंतर रिफंड की बढ़ी रफ़्तार को दर्शाता है, जो सरकार के करदाता-सेवा सुधारों का परिणाम माना जा रहा है।

कॉर्पोरेट कर और व्यक्तिगत आयकर का प्रदर्शन

कॉर्पोरेट कर संग्रह इस अवधि में 19.48 प्रतिशत की मज़बूत बढ़ोतरी के साथ लगभग ₹5.56 लाख करोड़ पर पहुँच गया। वहीं व्यक्तिगत आयकर और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) से होने वाला कर संग्रह 6 प्रतिशत बढ़कर ₹6.16 लाख करोड़ से अधिक हो गया।

गौरतलब है कि सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) संग्रह में सबसे उल्लेखनीय उछाल देखा गया — यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 53 प्रतिशत बढ़कर ₹40,214 करोड़ हो गया, जो शेयर बाज़ार में बढ़ी हुई कारोबारी गतिविधि का संकेत है।

एडवांस टैक्स संग्रह

17 सितंबर तक एडवांस टैक्स संग्रह 16.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹5.22 लाख करोड़ पर पहुँच गया। इसमें एडवांस कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह 18 प्रतिशत बढ़कर ₹4.16 लाख करोड़ रहा, जबकि नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स संग्रह 9.24 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹1.06 लाख करोड़ पर पहुँचा।

एडवांस टैक्स संग्रह में यह बढ़ोतरी कॉर्पोरेट क्षेत्र के मज़बूत मुनाफे और व्यावसायिक आशावाद का प्रतिबिंब मानी जाती है।

राजकोषीय घाटे की स्थिति

पिछले महीने जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों (अप्रैल–जुलाई) में भारत का राजकोषीय घाटा ₹4.55 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वित्त वर्ष के लक्ष्य का 26.8 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के ₹4.7 लाख करोड़ (लक्ष्य का 29.9 प्रतिशत) से कम है।

वित्त वर्ष 2027 के लिए केंद्र सरकार ने ₹16.96 लाख करोड़ के राजकोषीय घाटे का बजट रखा है, जो GDP का 4.3 प्रतिशत है। सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में 4.4 प्रतिशत का राजकोषीय घाटा लक्ष्य हासिल किया था और राजकोषीय समेकन की दिशा में इसे मौजूदा वर्ष में 4.3 प्रतिशत तक सीमित करने का लक्ष्य है।

आर्थिक असर और आगे की राह

राजकोषीय घाटे में गिरावट और कर संग्रह में तेज़ी का संयोजन अर्थव्यवस्था की बुनियाद मज़बूत करता है — सरकारी उधारी घटती है, बैंकिंग क्षेत्र में कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं के लिए ऋण की उपलब्धता बढ़ती है, और इससे आर्थिक विकास को गति मिलती है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ब्याज दर नीति पर निगाह रखे हुए है और राजकोषीय अनुशासन के संकेत उसके निर्णयों पर असर डाल सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई से देखें तो STT का 53% उछाल बाज़ार में सट्टेबाज़ी-जनित गतिविधि पर टैक्स बेस की निर्भरता को उजागर करता है — जो टिकाऊ राजस्व नहीं है। व्यक्तिगत आयकर में महज़ 6% की बढ़ोतरी बताती है कि औपचारिक वेतन-रोज़गार की वृद्धि उतनी मज़बूत नहीं जितनी कॉर्पोरेट मुनाफे की है। राजकोषीय घाटे के आँकड़े उत्साहजनक हैं, पर असली परीक्षा दूसरी छमाही में होगी जब पूँजीगत व्यय की रफ़्तार तेज़ होती है।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 2026-27 में कितना रहा?
CBDT के अनुसार 1 अप्रैल से 17 सितंबर 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 13% बढ़कर ₹12.12 लाख करोड़ पहुँचा। सकल संग्रह 15% से अधिक बढ़कर ₹14.3 लाख करोड़ रहा।
STT संग्रह में इतनी बड़ी बढ़ोतरी क्यों हुई?
सिक्योरिटीज़ ट्रांज़ैक्शन टैक्स (STT) संग्रह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 53% बढ़कर ₹40,214 करोड़ पर पहुँचा, जो शेयर बाज़ार में बढ़ी हुई कारोबारी मात्रा और निवेशकों की सक्रियता को दर्शाता है।
एडवांस टैक्स संग्रह में क्या बदलाव आया?
17 सितंबर 2026 तक एडवांस टैक्स संग्रह 16.18% बढ़कर ₹5.22 लाख करोड़ हो गया। एडवांस कॉर्पोरेट टैक्स 18% बढ़कर ₹4.16 लाख करोड़ और नॉन-कॉर्पोरेट एडवांस टैक्स 9.24% बढ़कर ₹1.06 लाख करोड़ रहा।
राजकोषीय घाटा 2026-27 में कहाँ खड़ा है?
अप्रैल–जुलाई 2026 में राजकोषीय घाटा ₹4.55 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वर्ष के लक्ष्य का 26.8% है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के 29.9% से बेहतर है। वित्त वर्ष 2027 के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य GDP का 4.3% यानी ₹16.96 लाख करोड़ है।
बढ़ता कर संग्रह आम जनता और अर्थव्यवस्था को कैसे प्रभावित करता है?
कर संग्रह में वृद्धि और राजकोषीय घाटे में कमी से सरकार की उधारी घटती है, जिससे बैंकिंग क्षेत्र में कॉर्पोरेट और उपभोक्ताओं के लिए ऋण की उपलब्धता बेहतर होती है। इससे कीमतों में स्थिरता और आर्थिक विकास को गति मिलती है।
राष्ट्र प्रेस
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