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क्या भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 26 में 8.8 प्रतिशत बढ़ा?

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क्या भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 26 में 8.8 प्रतिशत बढ़ा?

सारांश

भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 26 में 8.8 प्रतिशत बढ़कर 18.37 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया है। यह वृद्धि देश की मजबूती अर्थव्यवस्था का संकेत है, जो आगामी समय में और भी सुधार की संभावनाएं दिखा रही है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे यह वृद्धि हुई और इसके पीछे के कारण क्या हैं।

मुख्य बातें

प्रत्यक्ष कर संग्रह में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 8.63 लाख करोड़ रुपए रिफंड में 16.92 प्रतिशत की कमी सकल कर संग्रह 21.49 लाख करोड़ रुपए आर्थिक सुधार के संकेत

नई दिल्ली, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आयकर विभाग ने सोमवार को साझा किया कि देश का शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी तक की अवधि में सालाना आधार पर पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.8 प्रतिशत बढ़कर 18.37 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.88 लाख करोड़ रुपए रहा था।

आयकर विभाग के द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि समीक्षा अवधि में शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह 8.63 लाख करोड़ रुपए रहा है।

इसी प्रकार, शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह 9.29 लाख करोड़ रुपए रहा है। सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) संग्रह 44,866.52 करोड़ रुपए रहा है। इसके साथ ही सरकार ने अन्य करों के रूप में 321.23 करोड़ रुपए एकत्रित किए हैं।

आयकर विभाग ने कहा कि समीक्षा अवधि में 3.11 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया गया है, जिसमें पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 16.92 प्रतिशत की कमी देखी गई है।

इसमें से सरकार ने 1.83 लाख करोड़ रुपए का रिफंड कॉरपोरेट्स को जबकि व्यक्तिगत करदाताओं को 1.28 लाख करोड़ रुपए का रिफंड जारी किया है।

वित्त वर्ष 25 की समान अवधि में यह आंकड़ा 3.75 लाख करोड़ रुपए था।

यदि रिफंड को मिलाया जाए, तो सकल कर संग्रह एक अप्रैल से 11 जनवरी की अवधि में सालाना आधार पर 4.14 प्रतिशत बढ़कर 21.49 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

इसमें से सकल कॉरपोरेट कर संग्रह 10.46 लाख करोड़ रुपए और सकल व्यक्तिगत कर संग्रह 10.58 लाख करोड़ रुपए रहा है।

भारत में कर संग्रह की मजबूती के पीछे देश की अर्थव्यवस्था का तेजी से बढ़ना है।

मॉर्गन स्टेनली की रिपोर्ट में वित्त वर्ष 2026 के लिए रियल जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है, जो कि एनएसओ के पहले अग्रिम अनुमान 7.4 प्रतिशत से अधिक है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 के लिए बाजार का औसत अनुमान 7.5 प्रतिशत है, जबकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान 7.3 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकारी खर्च और मौद्रिक नीति के समर्थन, लोगों की खरीदारी की क्षमता में सुधार और रोजगार की बेहतर स्थिति के चलते उपभोग यानी खपत में बढ़ोतरी होगी, जिससे आर्थिक सुधार को और मजबूती मिलेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

रिफंड के आंकड़े में गिरावट चिंता का विषय है, लेकिन कुल मिलाकर यह एक सकारात्मक संकेत है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का प्रत्यक्ष कर संग्रह किस अवधि में बढ़ा?
यह संग्रह 1 अप्रैल से 11 जनवरी तक की अवधि में 8.8 प्रतिशत बढ़ा।
शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह का आंकड़ा क्या है?
शुद्ध व्यक्तिगत कर संग्रह 9.29 लाख करोड़ रुपए रहा है।
रिफंड की राशि कितनी है?
रिफंड की कुल राशि 3.11 लाख करोड़ रुपए है।
भारत की जीडीपी वृद्धि का अनुमान क्या है?
मॉर्गन स्टेनली के अनुसार, जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
सकल कर संग्रह में वृद्धि का क्या आंकड़ा है?
सकल कर संग्रह 4.14 प्रतिशत बढ़कर 21.49 लाख करोड़ रुपए हो गया है।
राष्ट्र प्रेस
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