भारत का सकल कर संग्रह अप्रैल-जून में 12.46% उछला, ₹6.10 लाख करोड़ के पार
सारांश
मुख्य बातें
भारत का सकल कर संग्रह वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल से 17 जून की अवधि में सालाना आधार पर 12.46 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹6,10,050.53 करोड़ तक पहुँच गया है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह आँकड़ा ₹5,42,478.57 करोड़ था। आयकर विभाग ने गुरुवार को यह डेटा सार्वजनिक किया।
कर संग्रह का विस्तृत विवरण
आयकर विभाग की वेबसाइट पर जारी आँकड़ों के अनुसार, कुल सकल संग्रह में कॉरपोरेट टैक्स का योगदान ₹2,76,538.46 करोड़ रहा। नॉन-कॉरपोरेट टैक्स से ₹3,14,653.07 करोड़, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से ₹18,856.12 करोड़ और अन्य करों से ₹2.88 करोड़ की प्राप्ति हुई।
गौरतलब है कि नॉन-कॉरपोरेट टैक्स — जिसमें मुख्यतः व्यक्तिगत आयकर शामिल है — इस बार कॉरपोरेट टैक्स से अधिक रहा, जो व्यक्तिगत आय और कर अनुपालन में विस्तार का संकेत देता है।
रिफंड और शुद्ध कर संग्रह
समीक्षा अवधि में सरकार ने ₹89,025.71 करोड़ रिफंड के रूप में जारी किए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹87,979.39 करोड़ से मामूली अधिक है। इसमें कॉरपोरेट टैक्स रिफंड ₹68,304.99 करोड़ और नॉन-कॉरपोरेट टैक्स रिफंड ₹20,715.51 करोड़ शामिल हैं।
रिफंड घटाने के बाद शुद्ध कर संग्रह ₹5,21,024.82 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के ₹4,54,499.18 करोड़ की तुलना में 14.64 प्रतिशत अधिक है। शुद्ध संग्रह में कॉरपोरेट टैक्स का योगदान ₹2,08,233.47 करोड़, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स का ₹2,93,937.56 करोड़ और STT का ₹18,856.12 करोड़ रहा।
अग्रिम कर संग्रह में भी तेज़ उछाल
वित्त वर्ष 2026-27 की इसी अवधि में अग्रिम कर संग्रह ₹1,78,373.06 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1,54,706.02 करोड़ से 15.30 प्रतिशत अधिक है। यह आँकड़ा कॉरपोरेट और व्यक्तिगत — दोनों श्रेणियों में मज़बूत अनुमानित आय का संकेत देता है।
अग्रिम कर में कॉरपोरेट टैक्स का योगदान ₹1,40,752.74 करोड़ रहा, जो पिछले साल के ₹1,21,333.03 करोड़ से 16.01 प्रतिशत अधिक है। नॉन-कॉरपोरेट अग्रिम कर ₹37,620.32 करोड़ रहा, जो पहले के ₹33,372.99 करोड़ से 12.73 प्रतिशत अधिक है।
आम जनता और अर्थव्यवस्था पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार राजकोषीय घाटे को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रही है। मज़बूत कर संग्रह सरकार को बुनियादी ढाँचे और सामाजिक योजनाओं पर खर्च की गुंजाइश देता है। आँकड़ों के अनुसार, सकल और शुद्ध — दोनों आधारों पर वृद्धि दर दोहरे अंक में बनी हुई है, जो वित्त वर्ष की मज़बूत शुरुआत का संकेत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि STT संग्रह में वृद्धि शेयर बाज़ार में बढ़ती भागीदारी को दर्शाती है, जबकि नॉन-कॉरपोरेट टैक्स में उछाल मध्यम वर्ग की आय में विस्तार और बेहतर कर अनुपालन का परिणाम हो सकता है। पूरे वित्त वर्ष के लिए संग्रह का लक्ष्य कितना पूरा होगा, यह आने वाली तिमाहियों में स्पष्ट होगा।