शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 23% उछला, ₹8.11 लाख करोड़ पर पहुँचा — अप्रैल से अगस्त 2026 के आँकड़े
सारांश
मुख्य बातें
भारत का चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 10 अगस्त 2026 के बीच शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 23 प्रतिशत बढ़कर ₹8.11 लाख करोड़ हो गया है। सरकार की ओर से मंगलवार, 11 अगस्त को जारी आधिकारिक आँकड़ों में यह जानकारी सामने आई। यह वृद्धि इस बात का संकेत है कि कर अनुपालन और आर्थिक गतिविधि दोनों मज़बूत बनी हुई हैं।
कुल संग्रह और रिफंड का ब्यौरा
रिफंड से पहले कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 19.75 प्रतिशत बढ़कर ₹9.55 लाख करोड़ रहा। समीक्षा अवधि में करदाताओं को जारी किए गए रिफंड का आँकड़ा ₹1.43 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 3.79 प्रतिशत अधिक है। गौरतलब है कि पिछले वर्ष 10 अगस्त तक कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹7.97 लाख करोड़ था — यानी इस बार ₹1.57 लाख करोड़ की अतिरिक्त वृद्धि दर्ज की गई है।
कॉर्पोरेट और नॉन-कॉर्पोरेट कर संग्रह
शुद्ध कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह पिछले वर्ष के ₹2.26 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.70 लाख करोड़ हो गया। वहीं, शुद्ध नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह — जिसमें व्यक्तिगत आयकर, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), फर्म और स्थानीय प्राधिकरण शामिल हैं — ₹4.11 लाख करोड़ से बढ़कर ₹5.07 लाख करोड़ पहुँच गया।
रिफंड से पहले के आँकड़ों में कुल कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह ₹3.32 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.80 लाख करोड़ और कुल नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स संग्रह ₹4.43 लाख करोड़ से बढ़कर ₹5.41 लाख करोड़ हो गया।
सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स में तेज़ उछाल
शेयर बाज़ार की बढ़ती गतिविधि का असर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) संग्रह पर साफ़ दिखा। शुद्ध STT संग्रह पिछले वर्ष के ₹22,354.31 करोड़ से उछलकर ₹33,823.74 करोड़ हो गया — यानी करीब 51 प्रतिशत की वृद्धि। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू इक्विटी बाज़ारों में खुदरा निवेशकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
अन्य करों का कुल संग्रह इस अवधि में ₹14.33 करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह ₹282.96 करोड़ था।
राजकोषीय घाटे की स्थिति
31 जुलाई को कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स (CGA) द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में भारत का अनुमानित राजकोषीय घाटा ₹3.1 लाख करोड़ रहा, जो पूरे वर्ष के बजट अनुमान का 18.2 प्रतिशत है। यह पिछले वित्त वर्ष की अप्रैल-जून अवधि के ₹2.8 लाख करोड़ से अधिक है, जो सरकारी व्यय में बढ़ोतरी को दर्शाता है — हालाँकि कर संग्रह का प्रदर्शन मज़बूत बना रहा।
आगे क्या
कर संग्रह की यह रफ़्तार यदि बनी रहती है, तो चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित प्रत्यक्ष कर लक्ष्य को हासिल करना सरकार के लिए सहज हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नॉन-कॉर्पोरेट टैक्स में तेज़ वृद्धि मध्यम वर्ग की आय और औपचारिक रोज़गार में विस्तार का संकेत देती है, जो दीर्घकालिक राजस्व स्थिरता के लिए सकारात्मक है।