सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 16.11% उछला, ₹7.74 लाख करोड़ पर पहुँचा; STT संग्रह में भी तेज़ उछाल
सारांश
मुख्य बातें
भारत का चालू वित्त वर्ष में 13 जुलाई 2025 तक का सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.11 प्रतिशत बढ़कर ₹7.74 लाख करोड़ पर पहुँच गया है। 14 जुलाई को जारी आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, यह वृद्धि कॉरपोरेट कर, गैर-कॉरपोरेट कर और सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) — तीनों मदों में एक साथ हुई बढ़ोतरी के कारण दर्ज की गई है।
शुद्ध संग्रह और रिफंड का ब्यौरा
रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह सालाना आधार पर 16.4 प्रतिशत बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ रहा। इस दौरान करदाताओं को जारी किए गए रिफंड भी 14.57 प्रतिशत बढ़कर ₹1.22 लाख करोड़ हो गए — जो दर्शाता है कि कर प्रशासन तंत्र तेज़ी से दावों का निपटान कर रहा है।
कॉरपोरेट और गैर-कॉरपोरेट कर का प्रदर्शन
रिफंड समायोजन के बाद शुद्ध कॉरपोरेट कर संग्रह पिछले वर्ष की समान अवधि के ₹1.97 लाख करोड़ से बढ़कर ₹2.40 लाख करोड़ हो गया। वहीं, शुद्ध गैर-कॉरपोरेट कर (जिसमें व्यक्तिगत आयकर, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF), फर्म, AOP, BOI, स्थानीय प्राधिकरण और कृत्रिम कानूनी व्यक्ति शामिल हैं) ₹3.44 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.85 लाख करोड़ पर पहुँच गया।
सकल आधार पर (रिफंड सहित) कॉरपोरेट कर संग्रह ₹2.90 लाख करोड़ से बढ़कर ₹3.35 लाख करोड़ और गैर-कॉरपोरेट कर संग्रह ₹3.58 लाख करोड़ से बढ़कर ₹4.12 लाख करोड़ रहा।
STT संग्रह में उल्लेखनीय उछाल
शेयर बाज़ार में लेनदेन पर लगने वाले सिक्योरिटीज़ ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) का शुद्ध संग्रह पिछले वर्ष के ₹17,875.88 करोड़ से तेज़ी से बढ़कर ₹26,428.96 करोड़ हो गया — यह करीब 47.85 प्रतिशत की वृद्धि है। यह आँकड़ा घरेलू पूँजी बाज़ार में बढ़ती निवेशक सक्रियता का स्पष्ट संकेत देता है। गौरतलब है कि अन्य करों का शुद्ध संग्रह इस अवधि में नकारात्मक ₹2.02 करोड़ रहा, जबकि पिछले वर्ष यह ₹269.45 करोड़ था।
आर्थिक संकेत और आगे की राह
आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, प्रत्यक्ष कर संग्रह में यह निरंतर वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था की मज़बूत गति और घरेलू माँग की स्थिरता को रेखांकित करती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर व्यापार अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के कर राजस्व में सुधार जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रफ़्तार बनी रही, तो चालू वित्त वर्ष के लिए निर्धारित प्रत्यक्ष कर संग्रह के लक्ष्य को पार करना संभव हो सकता है।